कंजूस आशुतोष को मिल जाती है 30 दिन की जिंदगी

Chandigarh News - जिंदगी बार-बार नहीं मिलती। इसलिए जरूरी है कि इसे खुलकर जीया जाए। बेवजह की बातों और उलझनों में फंस कर अपना वक्त...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:25 AM IST
Chandigarh News - ashutosh gets 30 days of life
जिंदगी बार-बार नहीं मिलती। इसलिए जरूरी है कि इसे खुलकर जीया जाए। बेवजह की बातों और उलझनों में फंस कर अपना वक्त बर्बाद न करें। यही देखने को मिला नाटक “वेलकम जिंदगी” में। इस नाटक का मंचन सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में हुआ। दरअसल वीरवार से 8वां चंडीगढ़ थिएटर फेस्टिवल शुरू हुआ। डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स, टैगोर थिएटर सोसाइटी की ओर से आयोजित इस फेस्टिवल के पहले दिन इस नाटक का मंचन हुआ। इसे पेश किया थिएटर पीपल मुंबई के कलाकारों ने। कहानी आशुतोष नाम के ऐसे कंजूस शख्स के इर्द- गिर्द घूमती है जो स्टेशन मास्टर है। दो घंटे के इस नाटक का सीन शुरू होता है आशुतोष के घर से। जिसकी ऑफिस में आज रिटायरमेंट पार्टी है। ऐसे में प|ी इंदूमती, बेटी सेतू और बेटा आयुष कुछ न कुछ खरीद कर लाते हैं, ताकि पार्टी में आशुतोष पहन सके। लेकिन वह खुश होने की बजाए गुस्सा करता है कि पैसे खर्च क्यूं किए। बच्चे जब गाड़ी और यूरोप ट्रिप के लिए पैसे मांगते हैं तो वह उन्हें देने से इंकार कर देता है। कहानी का रूख दूसरी ओर तब जाता है जब यमराज आशुतोष को लेने आता है, पहले तो उसे यकीन नहीं होता। यमराज अंतिम इच्छा पूछता है। पहले वह जिंदगी मांगता है लेकिन ऐसा संभव न होने पर उसे 30 दिन ही मिलते हैं, ताकि वह अपनी गलती और अधूरे काम पूरे कर सके। आशुतोष सबको पैसे देता है और अच्छे से पेश आता है, अपने दोस्त से भी। लेकिन वह घरवालों से यमराज की बात का जिक्र कर देता है। वहीं उसके 30 दिन पूरे हो जाते हैं और यमराज उसे अपने साथ ले जाते हैं। बाद में पता चलता है कि यमराज आशुतोष को समझाने के लिए ही यह सब माया रचते हैं। उम्र तो आशुतोष की लंबी होती है।

वीरवार से सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में 8वां चंडीगढ़ थिएटर फेस्टिवल शुरू हुआ। पहले दिन नाटक “वेलकम जिंदगी” का मंचन हुआ।

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