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नव वर्ष पर श्री राम शरणं में सत्संग व प्रीति भोज हुआ

आर्य समाज में 25 वर्ष तक वैदिक प्रचार करते रहे और दो ग्रंथ ओंकार उपासना तथा दयानंद प्रकाश लिखे जो कि माननीय है।

Lalit Kumar | Last Modified - Jan 01, 2018, 05:56 PM IST

नव वर्ष पर श्री राम शरणं में सत्संग व प्रीति भोज हुआ

चंडीगढ़।सेक्टर 35 बी स्थित श्री राम शरणम् आश्रम में नव वर्ष पर एक जनवरी को साढ़े ग्यारह बजे से एक बजे तक सत्संग व प्रीति भोज का आयोजन किया गया। आश्रम के संचालक सतपाल ने कहा कि आयोजन में भाग लेने के लिए चंडीगढ़ के अलावा दिल्ली, लुधियाना, हरिद्वार, जम्मू, जालंधर, उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश के दूर दराज के इलाकों से लोग आए। श्री राम शरणम् आश्रम स्वामी सत्यानंद जी महाराज के नाम से चलाए जा रहे हैं।


स्वामी जी का जन्म वर्ष 1861 की चैत्र शुक्ला पूर्णमासी को एक मोहयाल ब्राह्मण परिवार में रावलपिंडी के एक गांव जग्गू का मोर मे हुआ। आपको नाना के यहां लक्ष्मण और दादा के यहां गोविंद नाम से पुकारा जाता था। आपकी उम्र जब 17 वर्ष की हुई तो आप जैन यति बन गए और 13 वर्ष तक सेवा की। वर्ष 1891 में जैन मत को छोड़कर आर्य समाज में प्रवेश किया।


आर्य समाज में 25 वर्ष तक वैदिक प्रचार करते रहे और दो ग्रंथ ओंकार उपासना तथा दयानंद प्रकाश लिखे जो कि माननीय है। स्वामी जी वर्ष 1925 में डलहौजी के एकांत स्थान मे साधना में बैठ गए जब तक उन्हें परम प्राप्ति नहीं हुई , तब तक दिन रात तपस्या की। एक महीने के बाद प्रभु ने स्वयं गुरु बनकर आकाशवाणी की ओर से राम नाम झोली में डोल दिया तथा च्रा और म, अक्षर मयी च्राम, रूप तेजोमय दर्शन हुए।


इसके साथ साथ प्रभु ने अनेक सिद्धि एवं शक्ति की अनमोल बख्शीश भी कर दी। इसके बाद स्वामी जी महाराज ने श्री भक्ति प्रकाश ग्रंथ की रचना की। स्वामी जी महाराज 13 नवंबर 1960 को ज्योति जोत समा गए। आज शारीरिक रूप में तो स्वामी जी महाराज नहीं है लेकिन आत्मिक रूप में सब भक्तों के अंग-संग हैं। देश व विदेशों में श्री राम शरणम् आश्रम उनके नाम से ही चलाए जा रहे हैं।

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