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हादसे में गंवाया पैर, अब एक टांग पर 1 किलो. पैदल स्कूल जाती है 6 साल की ये बेटी

हादसे में गंवाया पैर, अब एक टांग पर 1 किलो. पैदल स्कूल जाती है 6 साल की ये बेटी

vikas sharma | Last Modified - Dec 14, 2017, 10:53 AM IST

मानसा.पंजाब के मानसा जिले की एक 6 साल की बेटी के हौसले और जज्बे का पूरा गांव कायल है। बोहा कस्बे की छह साल की बच्ची मीरा जब एक टांग पर रोज सवा किलोमीटर दूर स्कूल आती-जाती है तो उसे देखने वाला उसके जज्बे और जुनून का कायल हो जाता है। पूरा गांव उसके इस बुलंद हौसले को सलाम करता है।ट्रक ने मारी टक्कर और काटनी पड़ी थी टांग...


जानकारी के मुताबिक, मीरा के माता-पिता मानसा जिले के सरदूलगढ़ में रहते थे। वहां, वे खेतों में मजदूरी करते थे। एक दिन मीरा अपने भाई के साथ बकरियां चराने गए थे। तभी एक ट्रक से उसका हादसा हो गया। इसके बाद मीरा की एक टांग काटनी पड़ी थी।


ड्रॉप आउट बच्चों के सर्वे में कराया गया था दाखिला...


मीरा के परिजनों ने बताया कि बोहा के सरकारी प्राइमरी स्कूल के टीचर कुछ महीने पहले ड्रॉप आउट बच्चों के लिए सर्वे कर रहे थे। उनका मकसद था कि राइट टु एजुकेशन एक्ट के तहत स्कूल से वंचित रह गए बच्चों को दाखिल कराया जा सके। तभी कुछ दूर स्थित झुग्गियों में उन्हें मीरा और उसके भाई-बहन मिले। मीरा की एक टांग थी। यह देख टीचरों को खास उम्मीद नहीं थी कि बच्ची पढ़ पाएगी। लेकिन उन्होंने तीनों बच्चों का दाखिला कर लिया। बच्चों की ड्रेस और किताबों का इंतजाम भी स्कूल की तरफ से कर दिया गया।


टीचरों के लिए यह रुटीन था, उन्होंने सोचा कि बाकी दो बच्चे स्कूल आ जाएं, वहीं बहुत है। लेकिन अगले ही दिन इलाके के लोग सुबह एक छोटी सी बच्ची एक टांग और पूरी रफ्तार के साथ बैग लिए स्कूल यूनिफार्म में देख टीचर्स हैरान रह गए। इसके स्कूल प्रिंसिपल गुरमेल सिंह ने मीरा का जज्बा देख सभी टीचर्स को हिदायत दी कि इस हर संभव मदद करें और इसकी पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। मीरा के इस जज्बे को देख हाल ही में मल्ली वेलफेयर क्लब और पंजाब के एनजीओ द्वारा नगद सहायता राशि दी गई है। इसके अलावा मीरा के लिए एक आर्टिफिशियल पैर की भी व्यवस्था कर दी गई है।

पिता बीमार, दादी भरती है बच्चों का पेट


मानसा के रतिया रोड के नजदीक स्थित झुग्गियों में रहने वाले मीरा के परिवार की हालत बेहद खराब है। उसके पिता रमेश को गठिया है। वे बिस्तर पर हैं। मां उसके साथ नहीं रहती। दो भाई और एक बहन हैं। दादा की आंखें खराब हैं। बूढ़ी दादी लोगों से मांग कर परिवार का पालन करती हैं।



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