चंडीगढ़ समाचार

--Advertisement--

आंचल का आज मनाली पहुंचने पर स्वागत

आंचल का आज मनाली पहुंचने पर स्वागत

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2018, 12:57 PM IST
एअरपोर्ट पर आंचल ठाकुर। एअरपोर्ट पर आंचल ठाकुर।

कुल्लू। विश्व स्तर पर स्कीइंग में भारत का नाम रोशन करने वाली हिमाचल के मनाली की 21 वर्षीय आंचल शनिवार को हिमाचल के भुंतर पहुंची। आंचल ठाकुर के गांव में हर युवा स्कीयर है और साहसिक खेलों से जुड़ा हुआ है। प्रदेश सरकार ने आंचल ठाकुर को पांच लाख रुपए देने की घोषणा की है। पढ़ें पूरी खबर...

भुंतर पहुंचते ही आंचल ठाकुर के स्वागत का दौर शुरू...


- भारत का नाम रोशन करने वाली मनाली की आंचल ठाकुर का एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही लोगोंं ने स्वागत किया। उसके बाद भुंतर कुल्लू होते हुए आंचल अपने मनाली स्थित घर के लिए रवाना हो गई हैं। जहां लोग जगह जगह उनके स्वागत के लिए फूल मालाओं को लेकर बैठे हुए हैं। दूसरी तरफ प्रदेश सरकार में परिवहन, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर भी आंचल ठाकुर के स्वागत के लिए भुंतर एयरपोर्ट पहुंचे और आंचल काे फूल देकर स्वागत किया। इस दौरान जिला कुल्लू के विभिन्न विभागों के अधिकारी भी आंचल के स्वागत के लिए मंत्री के साथ पहुंचे थे।

भाई आैर पिता भी स्कीयर...

मनाली के आगे एक छोटा गांव है बुरुआ। यहां पर मौसम साफ रहता है तो पैराग्लाइडर्स को देखा जा सकता है। हमेशा बर्फ से ढंके रहने वाले इस इलाके में एक ही घर खूबसूरत और बंगलानुमा है। ये घर 'कमांडो' रोशन का है। कुछ समय तक भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में काम करने के कारण लोग रोशन को कमांडो कहते हैं। इस बंगले में रोशन अपनी पत्नी रामदई, बेटे हिमांशु और बेटी आंचल के साथ रहते हैं। ये तीनों नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय स्कीईंग चैम्पियनशिप में भाग लेते हैं।

लकड़ी के बोर्ड से सीखी थी स्कीइंग...

ठाकुर ने स्कीइंग लकड़ी के बोर्ड से शुरू की थी। फिर पता चला कि प्लास्टिक बर्फ पर अच्छे से फिसल पाती है तो लकड़ी की स्की में टूटी बाल्टी का प्लास्टिक चिपका दिया जाता था। 1978 में उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में जब कांस्य पदक जीता तो उन्हें भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में नौकरी मिल गई। जबकि इसके पहले तक तमाम अंतरराष्ट्रीय खेलों में भाग लेने वाले खिलाड़ी कश्मीर से होते थे या फिर सेना से।

आंचल ने दिलाया देश को पहला कांस्य पदक...


आंचल इन्हीं की बेटी हैं। वे भी देश देश के लिए पहला कांस्य पदक लाई हैं। आंचल ने 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्कीईंग प्रतिस्पर्धा में भाग लिया है। बचपन से स्कीइंग कर रही आंचल का बड़ा भाई हिमांशु, कजिन हीरालाल और वर्षा भी स्कीइंग ही करते हैं। हीरालाल और हिमांशु ने तो ओलिम्पिक, एशियाई खेलों में भी भाग लिया है। कई बार स्कूल और कॉलेज की परीक्षाएं अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा के दौरान ही होती हैं तो माता-पिता बच्चों को फैसला करने के लिए स्वतंत्र छोड़ देते हैं।

सरकार से नहीं मिलती है कोई मदद...

ये चारों भाई-बहन 2013 के विश्व स्कीइंग चैम्पियनशिप में भाग लेने ऑस्ट्रिया के स्कलदमिंग भी गए थे। इनकी परेशानी ये है कि इन्हें इस खेल की पूर्ति के लिए कोई सरकारी मदद नहीं मिल पाती है। ये खर्च इन्हें स्वयं वहन करना होता है, इसलिए भी पूरा ध्यान खेल पर नहीं दे पाते हैं, पहले पैसा जुटाते, फिर खेल पाते हैं।

X
एअरपोर्ट पर आंचल ठाकुर।एअरपोर्ट पर आंचल ठाकुर।
Click to listen..