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किसानों के बनाए औजारों की धूम अमेरिका तक

किसानों के बनाए औजारों की धूम अमेरिका तक

Dainik Bhaskar

Jan 05, 2018, 11:11 AM IST
गांव में किसानों को औजार बनाने गांव में किसानों को औजार बनाने

अबोहर। पंजाब के फाजिल्का जिले का गांव कबूलशाह खुब्बन अपनी खूबियों के लिए देश ही नहीं विदेशों में भी जाना जा रहा है। इसका श्रेय गांव में स्थित एमबीबीएस कंपनी के मालिक बलविंद्र और बलदेव सिंह को देना गलत न होगा। लगभग 3 हजार की आबादी वाले इस गांव के 60 फीसदी लोग खेती के साथ-साथ कृषि औजारों का निर्माण भी करते हैं। करोड़ों में बिकते हैं औजार...

- यहां बने औजार ऐसे कि अमेरिका सहित अन्य देशों में जबरदस्त डिमांड रहती है। सलाना 3 करोड़ रुपए से ज्यादा के टर्नओवर वाली इस कंपनी का संचालन करने वाले सगे भाई बलविंद्र और बलदेव बताते हैं कि पहले कंपनी के औजार भारत में ही सप्लाई होते थे, लेकिन सोशल मीडिया की मदद से उन्होंने 2016 में केन्या और अमेरिका में एक्सपोर्ट किया।

- औजार इतने पसंद किए गए कि यहां से उनके पास लगातार मांग बनी रहती है। गांव में दो बड़ी कंपनी है एमबीबीएस के अलावा एक और कंपनी है जिसका का सालाना टर्नओवर 2 करोड़ है जबकि अन्य छोटी भी कई कंपनियां है। डिमांड इतनी बढ़ गई है कि वो इसे पूरा करने के लिए खरीदारों से ज्यादा कीमत के बजाय उन्हें समय दने की मांग करते हैं, ताकि औजारों की पूर्ति की जा सके।

कस्सी से शुरू हुआ सफर...

- भास्कर टीम जब गांव पहुंची तो 1947 से पुश्तैनी कार्य को संभाल रहे बलविंद्र सिंह और बलदेव सिंह ने बताया कि 1940 में उनके पास थोड़ी जमीन थी। आमदनी न होने की वजह से दादा मघर सिंह ने सबसे पहले कस्सी बनाने का काम शुरु किया। यह इतना उम्दा बना कि आस-पास के गांवों के किसान इसे ले जाने लगे। आर्थिक रुप से लाभ हुआ, तो कृषि के साथ-साथ दादा ने इसे व्यापार बना लिया। कस्सी के अलावा खेती में उपयोग होने वाले दूसरे किस्म के उपकरणों का भी निर्माण शुरू हो गया। दादा ने कई लोगों को प्रेरित भी किया। देखते ही देखते पूरा गांव इससे जुड़ गया और हर कोई खेती के साथ-साथ औजार बनाने लगा। गांव के गुरदेव सिंह, जसबीर सिंह, नरेंद्र सिंह, बूटा सिंह, सेवक सिंह, करतार सिंह व मंगल सिंह कृषि औजार बनाते हैं और अच्छी कमाई कर रहे हैं।

सरकार करे सहयोग तो न जलानी पड़े पराली...


बलविंद्र और बलदेव सिंह ने बताया कि उनके पास एक ऐसी मशीन है जिससे पराली जलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने पराली को जमीन में मिक्स करने के लिए 40 हजार और 1 लाख 15 हजार रुपए कीमत के दो अलग किस्म के उपकरण बनाए हैं। मंहगे वाले औजार में सरकार द्वारा 42 हजार की सब्सिडी दी तो जा रही है लेकिन वह लॉटरी सिस्टम के माध्यम से दी जाती है। इसलिए किसान उस औजार को नहीं खरीदता, अगर उस औजार का हर किसान उपयोग करें तो पराली को आग लगाने की जरूरत न पड़े। सरकार चाहे तो लॉटरी सिस्टम खत्म कर सकती है।

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