Hindi News »Union Territory »Chandigarh »News» Government Jobs News Of Haryana

अब हरियाणा सरकार की नौकरियों में जातिगत प्रतिनिधित्व के आंकड़ों पर भी

अब हरियाणा सरकार की नौकरियों में जातिगत प्रतिनिधित्व के आंकड़ों पर भी

vikas sharma | Last Modified - Dec 30, 2017, 10:13 AM IST

चंडीगढ़.हरियाणा सरकार की नौकरियों में जातिगत प्रतिनिधित्व के आंकड़ों को लेकर विवाद हो गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य की भाजपा सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए इन आंकड़ों को कमीशन ने अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक किया है। विभिन्न संगठनों, व्यक्तियों और समुदायों को इन पर दावे-आपत्तियां और सुझाव देने के लिए 30 दिसंबर, 2018 तक का वक्त दिया गया है।

इसके बाद कमीशन सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के आधार पर ही अपनी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंप देगा। कमीशन की इस रिपोर्ट के आधार पर ही राज्य में जाट समेत 6 जातियों के आरक्षण का मामला निर्भर करेगा।


इधर, इन आंकड़ों पर आपत्ति करते हुए शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पिछड़ा वर्ग आयोग के चेयरमैन एस.एन. अग्रवाल को विभिन्न समुदायों के लोगों ने ज्ञापन दिए। इनमें अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति, पिछड़ा वर्ग कल्याण सभा, हरियाणा पिछड़ा वर्ग ब्लॉक ए कल्याण समिति समेत कई संगठन शामिल हैं। इन सभी संगठनों ने जातिगत प्रतिनिधित्व के सरकारी आंकड़ों पर आपत्ति करते हुए कमीशन से मांग की है कि वह सरकार से सही आंकड़े मंगवाए।


कोटे में आए कर्मियों को भी कर दिया शामिल: यशपाल मलिक


राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को ज्ञापन देने के बाद अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने मीडिया में आरोप लगाया कि जाटों को आरक्षण न मिल सके, इसके लिए कुछ कर्मचारियों ने तो अपनी जाति लिखने के बजाय गोत्र लिख दिया है। चूंकि ये गोत्र जाटों से मिलते हैं, इसलिए वे उनके कोटे में शामिल हो गए हैं।

इसके अलावा जो लोग खेल, पूर्व सैनिक, दिव्यांग अथवा अन्य कोटे से नौकरी लगें हैं, उन्हें भी जातिगत प्रतिनिधित्व के तहत जाटों के कोटे में शामिल कर दिया गया है। इसी तरह राज्य सरकार करीब 16 हजार कर्मचारियों का जातिगत डाटा तो जुटा ही नहीं पाई है। इसलिए हमने आयोग से कहा है कि वह सरकार से प्रतिनिधित्व संबंधी सही आंकड़े मांगे। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि आयोग अब जातिगत सर्वे कराने की बात भी बोल रहा है, जबकि इसकी जरूरत नहीं है। क्योंकि आयोग को केवल सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ापन ही साबित करना है। शैक्षणिक पिछड़ेपन के लिए केंद्र सरकार का डाटा उपलब्ध है। जबकि सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के लिए कई वरिष्ठ लेखकों की किताबें मौजूद हैं। मलिक ने आशंका जताई कि सरकार ही आयोग से रिपोर्ट तैयार करवाने में देरी कर रही है।


बीसी-सी वर्ग का प्रतिनिधित्व बहुत ज्यादा है: पिछड़ा वर्ग


पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष प्रो. आर. सी. लिंबा और हरियाणा पिछड़ा वर्ग ब्लॉक ए कल्याण समिति के प्रदेशाध्यक्ष शांता कुमार आर्य समेत कई संगठनों के पदाधिकारियों ने भी आयोग को ज्ञापन सौंपा। लिंबा और आर्य ने यहां जारी एक संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि जाटों समेत 6 जातियों को बीसी-सी कैटेगरी में आरक्षण देने के उद्देश्य से जातिगत प्रतिनिधित्व संबंधी अधूरे दिए हैं।

नौकरियों में इनका प्रतिनिधित्व 40 प्रतिशत से भी ज्यादा निकलेगा। इसलिए सरकार से सही आंकड़े मांगे जाएं। दोनों नेताओं ने यह भी कहा कि हरियाणा में जाट समुदाय की आबादी 17 या 18 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती, जबकि ये 25 फीसदी होने का दावा कर रहे हैं। इसलिए वर्ष 2011 की जातिय जनगणना के आंकड़ों को भी सार्वजनिक करवाया जाए। इन नेताओं ने ज्ञापन में यह भी मांग की है कि नौकरियों में जातिगत प्रतिनिधित्व की सही जानकारी के लिए आउट सोर्सिंग, अनुबंधित, गेस्ट टीचर्स, लेक्चरर और विश्वविद्यालय कर्मियों के भी आंकड़े मंगवाए जाएं।
--

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×