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ये हैं सीएम के 5 दोस्त, इनके लिए रिक्शा तक चलाया, ऐसे हुई थी शादी

ये हैं सीएम के 5 दोस्त, इनके लिए रिक्शा तक चलाया, ऐसे हुई थी शादी

Danik Bhaskar

Dec 27, 2017, 11:19 AM IST
अपने खास दोस्तों के साथ जयराम अपने खास दोस्तों के साथ जयराम

शिमला. पहली बार हिमाचल के सीएम की पारी शुरू कर रहे जयराम ठाकुर की लाइफ के कई दिलचस्प किस्से हैं। जयराम ठाकुर का जन्म 6 जनवरी 1965 में मंडी जिला के थुनाग में गरीब परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम स्व. जेठू राम व माता का नाम बृक्मू देवी है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला कुराणी व माध्यमिक शिक्षा थुनाग से हुई थी।

माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद उन्होंने हाईस्कूल बगस्याड़ से दसवीं कक्षा हासिल की। हाईस्कूल की शिक्षा ग्रहण करने के लिए उन्हें स्कूल आने व जाने के लिए रोजाना 14 किमी का फासला पैदल तय करना पड़ता था। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह उनके तीन भाई और दो बहने हैं। वर्ष 1980-81 में वह आर्थिक तंगी के कारण एक साल तक अपने गांव में ही रहे और खेतीबाड़ी में अपने माता-पिता का हाथ बंटाते रहे।

यह है सीएम के कॉलेज के दिनों के 5 दोस्त


कर्मजीत सिंह मल्होत्रा, गुरसेव मल्होत्रा, संजय आहुजा, अश्वनी कुमार, दिनेश कंवर व स्वयं जय राम ठाकुर। सभी मंडी वल्लभ कॉलेज से चंडीगढ़ तक साथ रहे है। सभी दोस्त 8 साल 1982 से 1989 तक एक साथ रह कर अपनी पढ़ाई को पूरा किया है। जयराम ठाकुर के यह सभी दोस्त प्रदेश के टॉप क्लास बिजनेस मैन है। राजनीति से यह सभी दोस्त बहुत दूर है। लेकिन अब जयराम के सीएम बनने से सभी गदगद भी है। कर्मजीत सिंह मल्होत्रा, गुरसेव मल्होत्रा ने बताया कि सीएम जयराम ठाकुर शुरू से ही पहाड़ी गानों व पहाड़ी नाटी के शौक पाले हुए है। जिनसे उनका विशेष लगाव रहा है।


ऐसे थामा था संगठन का दामन...


एक साल तक गांव में ही रहने के बाद उन्होंने मंडी के बल्लभ सांध्य कॉलेज में यह सोचकर दाखिला लिया कि वह दिन में कोई रोजगार हासिल कर पढ़ाई पूरी कर लेंगे। लेकिन उन्हें रोजगार कम ही मिला। इस दौरान वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से भी जुड़ गए और मंडी के राजकीय महाविद्यालय में उन्होंने रेगुलर तौर पर दाखिला लिया। बीए की शिक्षा ग्रहण करने के बाद वह जम्मू में होल टाइमर एबीवीपी के कार्यकर्ता बनकर गए, जहां से उनके जीवन की सही मायने में राजनीतिक पारी शुरू हुई।


ऐसे आए राजनीति की मुख्य धारा में...


स्टूडेंट लाइफ में करीब दस साल तक संघर्ष करने के बाद 90 के दशक में उन्हें मंडी के सिराज विधानसभा क्षेत्र से युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद 1993 में वह युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने सबसे पहले 1998 में चुनाव लड़ा और इस बार पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं।

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