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Republic Day: यहां पाकिस्तान को मिली थी तगड़ी हार, ये है कहानी

65 की जंग में हुसैनीवाला मोर्चे पर पाकिस्तान को मिली थी तगड़ी हार।

Lakhwant Singh | Last Modified - Jan 26, 2018, 11:31 AM IST

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    यहां आज भी मौजूद है पाक हमले के निशान

    मोहाली. देश के महान शहीदों की सरजर्मी हुसैनीवाला में पहुंच कर किसी भी भारतीय का सीना देशभक्ती से चौड़ा हो जाता है। शहीदे-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव की समाधियों के अलावा भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त की समाधि भी यहां पर है। इसके अलावा भगत सिंह की माता विद्यावती देवी, जिन्हें पंजाब माता का खिताब दिया गया था उनकी समाधि भी उनकी इच्छा के अनुसार यहीं पर है। यहां पर हर साल 26 जनवरी और 15 अगस्त सहित अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन कर देश के इन वीर जवानों को याद किया जाता है। कहते हैं कि 1965 में पाकिस्तानी सेना ने हर मोर्चे पर भारतीय फौज के हाथों करारी हार झेली थी और पाकिस्तानी सेना जलते टैंकों और अपने मरे हुए साथियों की लाशों को छोड़ कर भाग खड़ी हुई थी।

    4 दिन चला था पाकिस्तान से युद्ध...

    गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना ने 18-19 सितंबर की रात पूरी इंफेंट्री ब्रिगेड, टैंकों और हवाई हमले के साथ हुसैनीवाला बोर्डर पर हमला कर दिया था। उस समय हुसैनीवाला बोर्डर पर सेकेंड लाइट इंफेंट्री मराठा के जवानों ने मोर्चा संभाला हुआ था। देश के इन रणबांकुरों ने पाकिस्तानी टेंकों व फौज की परवाह किए बगैर पूरी मजबूती के साथ पाकिस्तानी सेना का मुंहतोड़ जवाब दिया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया।

    पाकिस्तानी सेना ने हुसैनीवाला पर हमला कर समाधिस्थल को नुकसान पहुंचाने का मकसद था। सतलज नदी के किनारे हुए पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भारतीय सेना की ओर से विरोधियों के कई टेंकों को बमों से ध्वस्त कर दिया गया था और उनके कई सैनिकों को भी अपनी गोलियों का निशाना बना कर मौत के घाट उतार दिया गया था। पाकिस्तानी सेना को मिले मुंहतोड़ जवाब के कारण उनके होश उड़ गए और वे अपने जलते हुए टैंकों और मरे हुए साथियों की लाशों को छोड़ कर पीछे की ओर भाग गए थे। भारतीय वीर जवानों के अदभ्य साहस और वीरता के कारण समाधिस्थल को किसी तरह से पाकिस्तानी सेना कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकी थी। 18 से 21 सितंबर तक 4 दिनों तक चले युद्ध के दौरान हुसैनीवाला गांव के लोगों ने सेना के साथ पूरी तरह से मिल कर दुश्मनों के दांत खट्‌टे करने में अहम भूमिका निभाई थी।


    आज भी निशान मौजूद है पाक हमले के:


    हुसैनीवाला समाधिस्थल के पास सतलज नदी के किनारे हुसैनीवाला रेलवे स्टेशन था, जहां आज भी छोटी रेलवे लाइन बिछी हुई है। यहां पर वीर जवानों का स्मारक स्थल है। जहां पर रेलवे स्टेशन के पुराने सिरे पर आज भी पाकिस्तान की ओर से की ओर से दागे गए गोलों के चिन्ह दिखते है।


    12 गांवों के बदले लिया गया था हुसैनीवाला

    भारत-पाक बंटवारे के समय हुसैनीवाला पाकिस्तान में चला गया था, लेकिन इस गांव में देश के महान शहीदों की समाधिस्थल होने के कारण और देश के सपूतों के लिए प्यार को देखते हुए सरकार की ओर से इस गांव के बदले पाकिस्तान को 12 गांव दिए गए थे। उसके बाद हुसैनीवाला को 1960 में भारत में वापस मिलाया गया था।

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    हुसैनीवाला बोर्डर
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    4 दिनों के युद्ध में कई टैंक और कई रेंजरों की लाशों को छोड़ कर भाग गई थी पाकिस्तानी सेना।
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Web Title: Know The Story Of Hussainiwala Border
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