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पांचवीं पास इस बिहारी लड़की ने राजनीति के धुरंधरों को ऐसे दी शिकस्त

पांचवीं पास इस बिहारी लड़की ने राजनीति के धुरंधरों को ऐसे दी शिकस्त

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 12:53 PM IST
परिवार के साथ पिंकी देवी। परिवार के साथ पिंकी देवी।

अमृतसर. निगम चुनाव की 85 सीटों में से 64 सीटों पर कांग्रेस काबिज होने के साथ ही पार्टी में मेयर बनने को लेकर अंदरूनी जंग शुरू हो गई है। वार्ड नंबर 15 से आजाद उम्मीदवार पिंकी देवी चुनाव जीतकर इस बार सबसे कम उम्र की पार्षद बनी है। उन्होंने इस दौरान कांग्रेस नेता योगराज की पत्नी वंदना शर्मा को हराया। पिंकी देवी 25 वर्ष की हैं। दिलचस्प यह है कि बिहार से ताल्लुक रखने वाली पिंकी ने निगम चुनाव में आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन भरा और राजनीति के धुरंधरों को शिकस्त देते हुए जीत का ताज भी पहना। महज पांचवीं पास हैं...

बिहार के जिला मोतिहारी से रखती है ताल्लुक...

बिहार के जिला मोतिहारी के बीरा छपरा गांव की रहने वाली पिंकी महज पांचवीं पास हैं। चार साल पहले विवाह बंधन में बंधने के बाद अमृतसर के तुंगपाई आबादी स्थित रामबली चौक में ससुराल घर आ गईं। नगरनिगम चुनाव में वार्ड नंबर 15 का क्षेत्र महिला आरक्षित था। पिंकी के ससुर रामबली ने उन्हें चुनावी दंगल में उतरने को कहा। पिंकी के लिए यह बहुत ही चुनौतीपूर्ण था। घर की जिम्मेदारी और दो बच्चों नीरज व धीरज का लालन-पालन भी उन्हें ही करना था। ससुर की बात मानकर उन्होंने आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन पत्र दाखिल करवा दिया। वार्ड नंबर 15 में पंजाबियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश व बिहार के लोगों की अधिक संख्या है। लोगों ने पिंकी के साथ कदम से कदम मिलाया और उनके चुनाव प्रचार में जुट गए।


17 दिसंबर को मतदान हुआ और देर शाम रिजल्ट भी आ गया। पिंकी कुमारी को 1380 मत मिले वह 480 मतों से विजयी हुईं। इस वार्ड से भाजपा प्रत्याशी अमरजीत कौर को 1005 मतों से संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस की वंदना शर्मा को 1041 मत मिले।

पिंकी बोलीं, पंजाबी भी सीख लेंगी


ससुर रामबली के अनुसार, वह प्रॉपर्टी डीलर का काम करते हैं। लोगों के साथ जमीनी स्तर पर जुड़े रहे। वार्ड की छोटी-बड़ी समस्या का समाधान लेकर लोग उनके पास आते थे। नगरनिगम अधिकारियों से बात कर इन समस्याओं का समाधान वह करवा देते थे। यही वजह है कि लोगों का समर्थन मिला। तुंगपाई आबादी के रामबली चौक में रहने वाली पिंकी के ससुर रामबली ऐसे शख्स हैं, जिनकी पहचान उनके नाम से ही है। उनके नाम पर ही चौक का नाम रामबली चौक है। पिंकी के अनुसार, उन्हें पंजाबी नहीं आती। अब वह पंजाबी भी सीख लेंगी और जनता की सेवक बनकर काम करेगी। मतदाताओं का धन्यवाद, जिन्होंने उन्हें जीत दिलाई।


भाजपा ने बाहरी व्यक्ति कहकर नहीं दिया था टिकट


पिंकी के ससुर रामबली पिछले चालीस वर्षों से अमृतसर में हैं। वह भाजपा समर्थक हैं। उन्होंने भाजपा कोटे से टिकट की मांग रखी थी, पर उन्हें यह कहकर भेज दिया गया कि बाहरी व्यक्ति को टिकट क्यों दें। रामबली बताते हैं कि इलाके के मतदाता चाहते थे कि उनकी बहू चुनाव लड़े, इसलिए उन्होंने उसे आजाद प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतार दिया।

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परिवार के साथ पिंकी देवी।परिवार के साथ पिंकी देवी।
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