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ये हैं बीजेपी के सीएम कैंडिडेट को मात देने वाले कांग्रेसी नेता, ऐसी है इनकी लाइफ

ये हैं बीजेपी के सीएम कैंडिडेट को मात देने वाले कांग्रेसी नेता, ऐसी है इनकी लाइफ

Dainik Bhaskar

Dec 19, 2017, 04:24 PM IST
कई युवा क्लबों को वह वित्तीय स कई युवा क्लबों को वह वित्तीय स

शिमला। चुनाव से पहले कयास लगाए जा रहे थे कि हिमाचल में भाजपा के सीएम कैंडीडेट प्रेम कुमार धूमल कम मतों से ही सही पर अपनी सीट निकाल लेंगे। अपनी जीत को लेकर धूमल भी आश्वस्त थे, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था, कि लोगों के घर के बरामदों में जनसभाएं करने वाले कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र राणा के आग उनकी सियासी जमीन खिसक जाएगी। राजेंद्र राणा राजनति में आने से पहले सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं और अभी भी सामाजिक कार्यों में पीछे नहीं हैं। पढ़ें 26 करोड़ से अधिक संपत्ति के मालिक हैं राणा...

धूमल को शिकस्त देने वाले 51 साल के राजेंद्र राणा की 26 करोड 48 लाख रुपए की संपति है। राजेंद्र की चंडीगढ़ में में एक कोठी और जिम भी है। इनके पास 3 गाड़ियां हैं, जिनमें 2 राणा के पास जबकि एक उनकी पत्नी अनीता राणा के नाम पर है। इन गाड़ियों की कीमत 35 हजार से लेकर 19 लाख तक है। सबसे दिलचस्प बात है कि इन सब गाड़ियों के नंबर चंडीगढ़ के हैं। दोनों पति पत्नी के पास 14 लाख की ज्वैलरी भी है।

पांच साल बाद प्रदेश में सरकार बदलने की परंपरा पर चलते हुए हिमाचल प्रदेश में भाजपा की दो तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी हुई है। पार्टी भले ही 50+के दावे तक नहीं पहुंच पाई लेकिन 44 सीटें जीतने में सफल हो गई। कमाल की बात की रही कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित होने के बावजूद पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल को सुजानपुर की जनता ने नकार दिया। उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र रे राणा ने बुरी तरह हरा दिया। भाजपा के कई दिग्गज अपनी सीट नहीं बचा पाए। इनमें प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती, रविंद्र रवि, कुल्लू के महेश्वर सिहं और जोगिंद्रनगर से गुलाब सिहं ठाकुर शामिल हैं।

धूमल के ही करीब रहे हैं राजेंद्र राणा...

बीजेपी के सीएम कैंडिडेट धूमल का हराने वाले राजेंद्र राणा उनके बहुत करीबी थे। साल 2008 में भाजपा जब सत्ता में आई थी तो, प्रेम कुमार धूमल ने ही राजेंद्र राणा को हिमाचल प्रदेश मीडिया बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया था। लेकिन विवाद के चलते कुछ समय के बाद ही राजेंद्र राणा को यह पद पार्टी छोड़नी पड़ी थी। साल 2012 में उन्होंने सुजानपुर विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा और वह भारी मतों से जीते थे।

बेटे से हार गए थे, अब पिता को हराया

2012 में वीरभद्र सरकार बनने पर राजेंद्र राणा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। 2014 में उन्होंने विधायक पद छोड़ कर धूमल के बेटे सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। सुजानपुर से उनका पद छोड़ने के बाद कांग्रेस ने राणा की धर्मपत्नी अनीता राणा को सुजानपुर सीट से उपचुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उतारा, लेकिन मोदी लहर में उन्हें भी हार का समाना करना पड़ा था। लेकिन अब 2017 में अनुराग ठाकुर के पिता प्रेम कुमार धूमल को मात दे दी।

धूमल की हार के पांच मुख्य कारण...
-भाजपा उम्मीदवार प्रो. प्रेमकुमार धूमल के चुनाव प्रचार में बाहरी लोगों का हस्तक्षेप और संगठन की पैठ न होना।

-सुजानपुर में भाजपा संगठन के अलावा पार्टी के अन्य सहयोगी मोर्चे सक्रिय नहीं थे।
-चुनाव से 20 दिन पहले हमीरपुर से सुजानपुर आना और रणनीति के अभाव में रही खामियां।
-राजेंद्र राणा की घर-घर में पैठ और बमसन को छोड़कर 10 साल बाद धूमल का सुजानपुर आना लोगों ने नहीं स्वीकारा।
-राणा का कैंपेन बूथ स स्तर तक था। भाजपा सेंध नहीं लगा पाई। राणा के करवाए काम भी लोगों ने स्वीकार किए। चुनाव प्रबंधन में भाजपा की कमजोरी, छुटभैया नेताओं की मौजूदगी भी ले डूबी भाजपा को।

आगे की स्लाइड्स में देखें उनकी राजनीतिक लाइफ के फोटो

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