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हरियाणा में आज से नहीं होगी रोडवेज कर्मियों की हड़ताल

हरियाणा में आज से नहीं होगी रोडवेज कर्मियों की हड़ताल

vikas sharma | Last Modified - Dec 28, 2017, 10:44 AM IST

चंडीगढ़.हरियाणा में वीरवार से प्रस्तावित रोडवेज कर्मियों की हड़ताल अब नहीं होगी। इसे दो महीने के लिए टाल दिया गया है। इस बीच, सरकार ने कर्मचारियों की 2-3 मांगें तुरंत प्रभाव से स्वीकार कर ली हैं।

इनमें पिछले साल ही लगे कंडक्टरों को सुप्रीम कोर्ट के समान काम के लिए समान वेतन संबंधी आदेश के तहत अब 12500 रुपए के बजाय 27000 रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा। इसी तरह घाटे वाले रूट्स समेत सभी अंतर राज्यीय मार्गों पर रोडवेज की बसें पहले की तरह यथावत चलती रहेंगी। वर्ष 1992 से 2002 के बीच लगे कर्मचारियों को स्थायी करने से पैदा हुई विसंगतियों को दूर किया जाएगा। इन्हें वर्ष 2003 की रेगुलराइजेशन पॉलिसी के तहत समान रूप से लाभ दिए जाएंगे।


परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के साथ बुधवार को चंडीगढ़ में हरियाणा रोडवेज की 5 यूनियनों के कर्मचारी नेताओं की बातचीत में यह सहमति बनी। ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले आए इन कर्मचारी नेताओं ने मंत्री पंवार के सामने 16 सूत्रीय मांग-पत्र रखा था। इनमें उनकी कई मांगें ऐसी थीं, जो लंबे समय से चली आ रही थीं।


मीटिंग के बाद परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने मीडिया को बताया कि उन्होंने आज सभी 9 यूनियनों के साथ अलग-अलग मीटिंग की है। इनकी कई मांगें तो सरकार पहले ही पूरी कर चुकी है। जबकि कुछ मांगों पर काम चल रहा है। जैसे वर्ष 2016-17 की परिवहन नीति को पहली ही रद्द किया जा चुका है। नई नीति का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इसमें कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, सरकार उसके बाद नई पॉलिसी को लागू करने के प्रयास किए जाएंगे। इसी तरह कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से पदोन्नति और बोनस दिए जाने पर विचार किया जाएगा। हरियाणा रोडवेज के बेड़े में जल्दी ही 600 नई बसें शामिल हो जाएंगी।


इधर, ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्य दलबीर किरमारा ने बताया कि परिवहन मंत्री के साथ ही मीटिंग में ज्यादातर मांगों पर सहमति बन गई है। जिन मांगों पर सहमति बनी है, उन पर काम करने का जिम्मा परिवहन महानिदेशक विकास गुप्ता और अतिरिक्त आयुक्त विरेंदर दहिया को सौंपा गया है।

इन मांगों को लागू करने के लिए उनकी ओर से सरकार को 2 माह का समय दिया गया है। अगर, इस अवधि में सरकार समझौते के बिंदुओं को लागू नहीं करती है तो एक्शन कमेटी अगली रणनीति तय करेगी। किरमारा ने बताया कि वर्ष 2016-17 की परिवहन पॉलिसी के तहत सरकार को करीब 12500 आवेदन मिले हैं। इन पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक किसी तरह की कार्रवाई न करने का भी भरोसा दिलाया गया है।

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