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मैं साक्षी के दांव ठीक कराता हूं और वो मेरे कराती है: सत्यव्रत

मैं साक्षी के दांव ठीक कराता हूं और वो मेरे कराती है: सत्यव्रत

gaurav marwaha | Last Modified - Dec 21, 2017, 04:23 PM IST

चंडीगढ़। साक्षी और मैं एक ही प्रोफेशन से हैं और एक साथ ही अभ्यास करते हैं। हमारे दोनों की वेट कैटेगरी भले ही अलग हो, लेकिन एक-दूसरे के प्लस पॉइंट और कमजोरियों को हम काफी अच्छी तरह से समझते हैं। हम दांव लगाने का अभ्यास करते हुए इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी प्रकार का वीक पॉइंट रह न जाए। ये कहना है ओलंपिक मेडलिस्ट साक्षी मलिक के पति व भारतीय स्टार पहलवान सत्यव्रत कादयान का। प्रो रेसलिंग लीग के सीजन-3 की प्रमोशन ...

- कॉम्नवेल्थ रेसलिंग के गोल्ड मेडलिस्ट सत्यव्रत यहां पर प्रो रेसलिंग लीग के सीजन-3 की ओपनिंग से पहले प्रमोशन के लिए आए थे और उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार का सीजन पहले के मुकाबले तेज और रोमांचक होने वाला है। इस बार लीग में 16 ओलंपिक मेडलिस्ट हिस्सा ले रहे हैं और 60 रेसलर ऐसे हैं जिन्होंने अलग अलग चैंपियनशिप में इस साल मेडल जीते हैं।


- सत्यव्रत ने कहा कि साक्षी और मेरे कोच एक ही हैं। मेरे पिता सत्यवान ने ही हम दोनों को कुश्ती लड़ना सिखाया है। घर में हर समय कुश्ती पर ही बात होती है और हम दोनों ही एक दूसरे को कुछ न कुछ सिखाते हैं। मैं साक्षी के कमजोर दांवों को दुरुस्त करने के लिए उसे टिप्स देता हूं तो वो मेरे कमजोर दांवों को सुधारने के लिए कहती है। हम दोनों ही एक प्रोफेशन से हैं तो अच्छी तरह से एक दूसरे को समझते हैं। फिर वो चाहे मैट के उपर हो या फिर बाहर। एक दूसरे को सपोर्ट करते ही रहते हैं।


कॉम्नवेल्थ गेम्स की तैयारी जारी:


सत्यव्रत ने कहा कि इस समय मैं और साक्षी दोनों ही कड़ा अभ्यास कर रहे हैं। दोनों की हाई इवेंसिव ट्रेनिंग चल रही है और ये तैयारी कॉम्नवेल्थ गेम्स के लिए हो रही है। हम दोनों को ही उसमें देश के लिए मेडल जीतना है। इस बार मेरे वोट 97 किलोग्राम नहीं होगा तो मुझे 92 किलोग्राम में ही मैट पर उतरना है। साक्षी के वेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। प्रो रेसलिंग लीग के बीच में होने से हमें मदद मिलेगी और हम इंटरनेशनल रेसलर्स के साथ अपने आप को तैयार कर सकेंगे।

रेसलिंग को भी मिले पूरा फोकस:


सत्यव्रत ने कहा कि रेसलिंग को अभी तक वो मुकाम नहीं मिला है जो उसे मिलना चाहिए। रेसलिंग अकेला ऐसा गेम है जो पिछले कई सालों से देश को ओलंपिक में मेडल दिला रहा है लेकिन जब बात सहूलियत देने की बात आती है तो उसका नंबर क्रिकेट, टेनिस, बैडमिंटन जैसे गेम्स के बाद आता है। ये सही नहीं है। खिलाडिय़ों की ट्रेनिंग के लिए सभी सहूलियत होनी चाहिए साथ में उन्हें ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए भेजना चाहिए। हमारे पास अच्छे पहलवान हैं और हम आने वाले समय में देश रेसलिंग में मेडल हासिल करता रहेगा।


खेल को खुदा मानें युवा:


सत्यव्रत ने युवाओं को टिप्स देते हुए कहा कि अगर उन्हें सफल होना है तो खेल को खुदा मानना होगा। बिना इसके वे किसी भी मुकाम को हासिल नहीं कर सकते। आप जब अपने खेल को खुदा मानते हो तो हर चीज उसी को समर्पित कर देते हैं। उससे बढ़कर आपके जीवन में कुछ नहीं होता। इसी के बाद आपको सफलता मिलती है।

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Web Title: sakshi ke pti ne share kie donon ke ye sikrate, khaa- hm ek-dusre se sikhte hain
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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