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भूतों जैसे मुखौटे पहन यहां देते हैं एक दूसरे को गंदी गालियां, साल में एक बार इस गांव में होता है ऐसा नजारा

भूतों जैसे मुखौटे पहन यहां देते हैं एक दूसरे को गंदी गालियां, साल में एक बार इस गांव में होता है ऐसा नजारा

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 01:54 PM IST
देवता की रथ यात्रा भी उत्सव मे देवता की रथ यात्रा भी उत्सव मे

कुल्लू। परंपारिक वस्त्र पहने, मुंह पर प्राचीन बुतों जैसे मुखौटे पहन, वो स्थानीय भाषा में गंदी गालियां और अश्लील जुमले कसते गए...और मौजूद हजारों की भीड़ में महिला, बच्चों और बुजुर्गों ने उफ तक नहीं किया। कुछ ऐसा ही नजारा बीते सोमवार हिमाचल की कुल्लू घाटी की पलदी फागली में था। घाटी के करथा और वासुकी नाग को समर्पित पलदी फागली उत्सव में प्राचीन दैवीय परंपरा का निर्वाहन किया गया। पढ़ें पूरी खबर...

महाभारत, रामायण के युद्धों का वर्णन...

अश्लील जुमले कसते हुए ढोल नगाड़ों की थाप पर हारियानों (देव श्रद्धालुओं) ने मडियाहला (मुखौटा) नृत्य किया और पुरानी परंपरा का निर्वाहन किया गया। इस परंपरागत दैवीय रिवायत और प्राचीन नृत्य को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी।
प्राचीन काल से मना रहे उत्सव 7देवता वासुकी के हारियानों की माने तो प्राचीन काल से उनके पूर्वज फागली उत्सव को मनाते आ रहे हैं। जब पूरे हिमाचल में देवता अपने स्वर्ग प्रवास पर होते हैं तो बंजार के पलदी मे देवता करथनाग, वासुकी नाग स्वर्ग प्रवास पर न जाकर हारियानों के बीच रह कर इस अनोखे पर्व को निभाने की रस्म अदा करते हैं। मढियाल्ले यानि मुखौटा धारियों ने देवता करथा नाग व वासुकी नाग के समक्ष रामायण व महाभारत के युद्ध का वर्णन कर नृत्य किया। खास कर समुद्र मंथन का भी उल्लेख होता है।


भूतप्रेत, बद आत्माओं को भगाया...

पोष महीने में यहां के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर होते हैं और क्षेत्रों में भूत-प्रेतों का वास रहता है। इन प्रेत आत्माओं व भूतों को भगाने के लिए देवता करथा नाग व वासुकी नाग और इनके सहायक देवता आहिडू महावीर, सिहडू देवता, गुढ़वाला देवता, खोडू, दंईत देवता इस करथा उत्सव में राक्षस रूपी मखौटों के साथ नृत्य कर, अश्लील जुमलों से भूत-प्रेतों व बूरी आत्माओं को भगाया जाता है।

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