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ऐसे हुआ इस खतरनाक गैंगेस्टर का अंत, एनकाउंटर के दौरान आंख में मारी गोली

ऐसे हुआ इस खतरनाक गैंगेस्टर का अंत, एनकाउंटर के दौरान आंख में मारी गोली

Danik Bhaskar | Jan 27, 2018, 10:37 AM IST
कुएं में गहने और सिक्के भी मिल कुएं में गहने और सिक्के भी मिल

अजनाला. पंजाब के चर्चित कालिया वाला खूह (कुएं) की सफाई के दौरान एक बार फिर कई हैरान करने वाली चीजें निकली हैं। अमृतसर से 30 किमी दूर अजनाला गांव के इस ऐतिहासिक कुएं में करीब 157 साल पहले 282 भारतीय सैनिकों को अंग्रेजों ने जिंदा दफना दिया था। ये सैनिक लाहौर में ब्रिटिश शासन के खिलाफ बगावत कर दिल्ली की ओर बढ़ रहे थे। कुछ दिन पहले ही सिख श्रद्धालुओं ने 'कालिया वाला खूह' नामक इस कुएं की खुदाई कर अवशेषों को निकाला था। बाद में इस कुएं को 'शहीदोंवाला कुआं' कहा जाने लगा था।


- 26 जनवरी शुक्रवार को कालिया वाला खूह यादगारी फाउंडेशन कमेटी ने यहां सफाई कराई तो कई पुरातत्व चीजें यहां नजर आई। इसके बाद इन चीजों को देखने के लिए लोगों की यहां लाइन लग गई। यहां खुदाई में पानी निकालने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चीजें, मटके, नरकंकाल, खोपड़ियां आदि मिले हैं।


1857 में सैनिकों ने की थी बगावत

- 500 के करीब सैनिक लाहौर से दिल्ली के लिए निकले थे।
- 218 निहत्थे भारतीय सैनिकों को अजनाला के पास दादिया गांव में मारा गया था।
- 282 सैनिकों को अजनाला के एक कुएं में जिंदा दफन कर दिया था।

2 अंग्रेज सैनिक अफसरों की हत्या कर शुरू की थी बगावत

- 80 खोपड़ियों और नरकंकाल के अलावा सिक्के और मेडल भी मिले थे खुदाई में
- 26वें बंगाल नेटिव इनफेंट्री के थे ये सभी जवान।

नरसंहार की अंग्रेजों ने बनाई थी योजना

अगस्त 1857 में अमृतसर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हैनरी कूपर और कर्नल जेम्स जॉर्ज ने इस नरसंहार की योजना बनाई थी। कूपर ने अपनी पुस्तक "द क्राइसिस ऑफ पंजाब" में भी इस घटना का उल्लेख किया है। नरसंहार में मारे गए क्रान्तिकारी अंग्रेजों की बंगाल नेटिव इन्फेंट्री से संबंद्ध थे, जिन्होंने बगावत कर दी थी। इनमें से अंग्रेजी सेनाओं ने 150 को गोली मार दी, जबकि 283 सिपाहियों को रस्सियों से बांध कर अजनाला लाया गया और इस कुएं में फेंक दिया गया था।