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ध्वज में इस्तेमाल होने वाले ८ रुपए के डंडे ने ३० दिन तक रोक रखी तिरंगा यात्रा

ध्वज में इस्तेमाल होने वाले ८ रुपए के डंडे ने ३० दिन तक रोक रखी तिरंगा यात्रा

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 06:14 PM IST

अमृतसर. 13 अप्रैल 2019 को पूरा देश जलियांवाला बाग कांड की शताब्दी मनाने जा रहा है। इसी शताब्दी समागम से जुड़ी तिरंगा यात्रा बाग से चंद कदम की दूरी पर एक महीने से रुकी पड़ी है। इसका कारण है यात्रा में शामिल होने वालों के हाथों में जो राष्ट्रीय ध्वज थमाया जाएगा उसके लिए डंडे नहीं हैं और इसकी कीमत महज 8 रुपए हैं। ऐसी बात भी नहीं है कि यात्रा के संचालक इसे खरीद नहीं सकते, लेकिन उनको इंतजार है कि हालिया चुने गए नगर निगम के कौंसलर इसे अपनी जेब से खर्चें।


खादी का ध्वज ही लौटाएगा राष्ट्र का सम्मान :

हाल गेट के कुछ ही दूरी पर स्थित केंद्रीय श्री वाल्मीकि मंदिर में आश्रय ले रहे विजय दत्ता ने बताया कि वह अपने हाथ में एक खादी का ध्वज और राम प्रसाद बिस्मिल के नाम का कलश भी साथ लाए हैं। उनका कहना है कि जिस दिन डंडे की व्यवस्था निगम कौंसलर कर देंगे उसी दिन यात्रा को शहीद ऊधम सिंह के बुत से ध्वज फहरा कर यात्रा बाग तक जाएगी। यात्रा में शामिल होने वाला हरेक नागरिक अपने साथ किसी शहीद सेनानी, शहीद सैनिक या फिर देश और समाज के लिए बलिदान देने वाले आम नागरिक का फोटो, एक ध्वज तथा 44 नंबर का 100 ग्राम खादी का सूत लेकर आएगा। सूत को कलश में डाला जाएगा और ध्वज उसे घर पर फहराने के लिए दिया जाएगा। जिस किसी के पास इसकी व्यवस्था नहीं होगी उसे हालगेट के बाहर से यह दोनों वस्तुएं सिर्फ 100 रुपए में उपलब्ध कराई जाएंगी।

दत्ता ने बताया कि इस इकट्ठा सूत को राष्ट्रीय ध्वज बनाने वाली सरकारी कंपनी को दिया जाएगा ताकि सिल्क अथवा टेरीकाट की बजाय पूरे देश में खादी का ही ध्वज फहराए। उनका कहना है कि खादी से ही हमारा आत्म सम्मान तथा राष्ट्र का गौरव लौट सकता है। उन्होंने हरेक कौंसलर से अपील की है कि वह सिर्फ 100 रुपए खर्च करके 8 डंडे उपलब्ध कराए ताकि यात्रा को जल्द शुरू किया जा सके।



४२ सालों से शिवपुरी में जलियांवाला बाग का मेला : दत्ता देश के पहले इंसान हैं जिसने शिवपुरी स्थित तांत्या टोपे की समाधि पर1975 से 16 से 18 अक्टूबर तक जलियांवाला बाग शहीदी मेले का आयोजन करवाते आ रहे हैं। खैर, अब 2019 में जलियांवाला बाग कांड के 100 साल पूरे होने पर इस पावन भूमि को राष्ट्रीय तीर्थ का दर्जा दिलाने तथा इसमें हरेक देशवासी को शामिल करने के लिए वह तिरंगा यात्रा लेकर यहां पहुंचे हैं। अब तक इस यात्रा पर दो लाख रुपए से अधिक की रकम खर्च कर चुके दत्ता अपने साथ करीब १,००० ध्वज लेकर आए हैं। उन्होंने यात्रा के लिए और ध्वज तैयार करने के लिए यहीं पर कांट्रैक्ट भी दे दिया है।

कहां से चली और क्या है तिरंगा यात्रा :

इस तिरंगा यात्रा को अमर शहीद तांत्या टोपे के शहीदी स्थल शिवपुरी, मध्य प्रदेश से एडवोकेट रूप दत्ता लेकर आए हैं। इसकी शुरुआत महात्मा गांधी के बलिदान दिवस ३० जनवरी २०१७ को की गई थी। ५० सालों तक जिला कोर्ट में वकालत करने वाले दत्ता २०१६ से पंच प्यारे शहीद समवेत श्रद्धांजलि मिशन का संचालन करते आ रहे हैं। इसके तहत वह देश और समाज में फैले टकराव, आपसी वैमनस्य, आतंकवाद, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के प्रति लोगों को सचेत करते हुए लोगों को एक राष्ट्रीय ध्वज के नीचे एकजुट होने का आह्वान करते आ रहे हैं। खैर, इस यात्रा का मकसद १३ अप्रैल १९१९ के दिन हुए जलियांवाला कांड की शताब्दी पर पूरे देश के ६,००० गांवों और शहरों के लोगों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करना और रचनात्मक स्वयं सैनिक तैयार करना है।