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कुमार ने दिया चंडीगढ़ को मेडल जीतने का उपदेश

कुमार ने दिया चंडीगढ़ को मेडल जीतने का उपदेश

gaurav marwaha | Last Modified - Nov 22, 2017, 08:08 PM IST

चंडीगढ़।डॉक्टरों की गलती से अपना पैर गंवाने वाले चंडीगढ़ के पैरा स्विमर उपदेश कुमार ने एक और बड़ी सफलता हासिल कर ली है। उन्होंने ही पैरा नेशनल स्विमिंग में चंडीगढ़ के लिए पहला मेडल जीता था और अब उदयपुर में उन्होंने सिटी ब्यूटीफुल के खाते में दूसरा मेडल डाला। उदयपुर में उपदेश ने 100 मीटर बटरफ्लाई इवेंट में 1.57.43 सेकंड्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इसका आयोजन पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया द्वारा किया गया था। उपदेश का ये दूसरा नेशनल मेडल था। उन्होंने पिछले साल भी नेशनल में मेडल जीता था। उपदेश पंजाब यूनिवर्सिटी में एमए हिंदी सेकंड ईयर के स्टूडेंट हैं आैर अपनी गेम के साथ वे पढ़ाई को भी पूरा समय देते हैं। वे अपनी सफलता का क्रेडिट भी पीयू स्टाफ और कोचेज को देते हैं।


पीयू में हुई स्विमिंग की शुरुआत:
उपदेश ने अपने स्पोर्ट्स करियर की शुरुआत क्रिकेट खेलने के साथ की थी। एक टांग के दम पर वे क्रिकेट में खेले और रन भी बनाए। लेकिन दूसरे पैर पर पड़ते भार के कारण उन्हें डॉक्टर ने क्रिकेट छोड़ने की सलाह दी। उपदेश का मन खेलों में ही लगता था तो उन्होंने स्विमिंग करने का मन बनाया। पीयू स्टूडेंट होने के कारण उन्होंने यहां के पूल में काेचिंग लेनी शुरू की। कुछ ही महीनों की ट्रेनिंग के बाद उन्होंने पहला मेडल जीता। जब उन्होंने जयपुर में एस-9 हैंडीकैप कैटेगरी के 100 मीटर बटरफ्लाई इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता था और ये मेडल चंडीगढ़ का पैरा स्विमिंग में पहला मेडल था। इस मेडल के लिए उन्होंने 1.58.63 का समय निकाला।

खुद उठाते हैं अपना खर्च:
उपदेश बचपन से ही अपना खर्च खुद उठाते हैं। फिर वो चाहे पढ़ाई का हो या गेम का। बचपन में स्कूल के साथ साथ उन्होंने सिलाई कढ़ाई का काम सीखा। इसी की बदौलत उपदेश अपना खर्च खुद उठाते हैं। पहले वे पढ़ाई करते हैं और शाम को सिलाई करके अपनी आजीविका कमाते हैं। बचपन में डॉक्टर के एक गलत इंजेक्शन के कारण उन्हें अपना पैर गंवाना पढ़ा। पिता मजदूर हैं इसलिए उनका खर्च नहीं उठा सकते थे। वे खुद ही अपने पैरों पर खड़े हो गए। चार भाई बहनों में वे तीसरे नंबर पर हैं। दिव्यांग होने के बाद भी वे अपने सभी भाई बहनों में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे हैं। उनका मकसद अब अगले नेशनल के लिए तैयारी करना है। यहां पर वे मेडल जीतकर कॉम्नवेल्थ गेम्स का टिकट कटाना चाहते हैं।

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