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पूंजी निवेश के नाम पर हो रहे एमओयू को लेकर विपक्ष के नेता का सरकार से सवाल

पूंजी निवेश के नाम पर हो रहे एमओयू को लेकर विपक्ष के नेता का सरकार से सवाल

suraj thakur | Last Modified - Nov 05, 2017, 04:39 PM IST

चंडीगढ़।हरियाणा में पूंजी निवेश के लिए राज्य की भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे एमओयू पर विपक्ष के नेता अभय चौटाला ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन एमओयू के बहाने खट्टर सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार के झूठे सब्जबाग दिखा रही है। जबकि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स सम्मिट के दौरान किए गए 5.84 लाख करोड़ रुपए के निवेश वाले 359 एमओयू का क्या हुआ।
उनसे राज्य में रोजगार के 5 लाख अवसर उपलब्ध होने का दावा किया गया था। आखिर रोजगार के ये अवसर गए कहां? उन्होंने कहा कि हाल ही मुंबई में सीआईआई इन्वेस्ट नार्थ-2017 के दौरान भी हरियाणा ने वरबिंड कंपनी के साथ 20 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का एमओयू किया है। इसके तहत गुरुग्राम के निकट 600 एकड़ जमीन में लॉजिस्टिक एवं ट्रेडिंग हब बनाने की योजना है।
प्रदेश के लोगों को आशंका है कि इस एमओयू की आड़ में एक औद्योगिक घराने को फायदा पहुंचाने की कोशिश है। यह वही घराना है जिसने पिछली कांग्रेस सरकार के साथ भी एसईजेड बनाने का समझौता किया था। चूंकि वह एसईजेड तो नहीं बना, इसलिए यह जमीन किसानों को वापस लौटाई जानी चाहिए थी।

अभय चौटाला ने शनिवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि वे पहले से ही आरोप लगाते आ रहे हैं कि भाजपा और कांग्रेस दोनों एक-दूसरे से मिले हुए हैं। मुंबई में वरबिंड कंपनी के साथ हुए समझौते से इस बात को और बल मिला है।
उन्होंने कहा कि गुडग़ांव और झज्जर क्षेत्र में किसानों की भूमि खरीद के लिए हुड्डा सरकार ने खरीददार को विशेष सुविधाएं इसलिए दीं थी, क्योंकि उसका लक्ष्य एक एसईजेड विकसित करना था। उस विशेष औद्योगिक घराने को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार नई योजना बनाती है तो उचित नहीं है।
थोथी साबित हो रही हैं सरकारी घोषणाएंः

अभय चौटाला ने आऱोप लगाया कि पूंजी निवेश और उससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की भाजपा सरकार की घोषणाएं थोथी साबित हो रही हैं। हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए एमओयू में से कितना पूंजी निवेश धरातल पर आया और कितने युवाओं को रोजगार मिला, राज्य सरकार अब तक इसका खुलासा नहीं कर पाई है। बल्कि उस समय चीन के वांडा ग्रुप की ओऱ से 10 अरब डॉलर के पूंजी निवेश का बढ़-चढ़कर प्रचार-प्रसार किया गया था। वह निवेश आने के बजाय अटक गया।
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