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बर्फबारी के दीदार के साथ यहां होते हैं देवी मां के दर्शन, ऐसा होता है नजारा

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 14, 2017, 03:52 PM IST

दिसंबर माह के अंत में त्रिकुटा पर्वत और उसके आसपास के इलाकों में ऐसा नजारा देखने को मिलता है।
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    जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले की त्रिकुटा पर्वत पर स्थित वैष्णो देवी गुफा मंदिर केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का एक सबसे व्यस्त तीर्थस्थल है।

    चंडीगढ़। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) द्वारा वैष्णों देवी मां के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित करने के बाद मंदिर श्राइन बोर्ड ने भी राहत की सांस ली है। मौसम कैसा भी हो वैष्णों देवी में श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आती है। सर्दी के मौसम में बर्फबारी में देवी मां के दर्शनों के लिए हर साल भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ता है। पढ़ें पूरी खबर...

    -अगर आप बर्फीली चोटियों की सैर और मां भगवती के दर्शनों की इच्छा रखते हैं तो वैष्णो देवी के दरबार में दिसंबर से जनवरी माह के बीच वैष्णों देवी जा सकते हैं।
    -दिसंबर माह के अंत में आपको वहां बर्फ की सफेद चादर से ढंकी त्रिकुटा पर्वत की चोटियां ही नहीं यात्रा मार्ग में अनेकों स्थानों पर जमे दो से तीन फीट के बर्फ के ढेर भी मिल जाएंगे।
    -दिसंबर माह के अंत में त्रिकुटा पर्वत और उसके आसपास के इलाकों में ऐसा नजारा देखने को मिलता है।
    -कभी कभी कटड़ा के बेस कैम्प में बाण गंगा के इलाके में भी बर्फ की हल्की चादर देखने को मिल जाती है।
    -भैरों घाटी में 3-4 फुट की बर्फबारी होने पर श्राइन बोर्ड रास्ते भी बंद कर देता है।
    -क्योंकि इस दौरान भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
    -कुल मिलाकर वैष्णों देवी एक ऐसा धार्मिक स्थल है जहां आप सर्दियों में बर्फबारी का दीदार करने के साथ देवी मां के दर्शन भी कर सकते हैं।
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    त्रिकुटा पर्वत पर स्थित होने के कारण वैष्णो देवी का एक नाम त्रिकुटा देवी भी है।
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    यात्रियों को वैष्णो देवी का दर्शन करने के लिए कटरा में यात्रा पर्ची लेना पड़ती है।
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    यात्रा पर्ची लेने के 6 घंटे के भीतर यदि इसे चेक पोस्ट पर एंट्री नहीं करवाया जाता है, तो यात्रा पर्ची रद्द हो जाती है।
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    मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए वर्तमान में जिस मार्ग का प्रयोग किया जाता है, वह प्राकृतिक मार्ग नहीं है।
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    इसका निर्माण तब करवाया गया था, जब यहां आनेवाले तीर्थयात्रियों की तादाद काफी बढ़ गई।
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    जब दर्शनार्थियों के संख्या कम होती है, तब प्राचीन गुफा का मार्ग भी खोल दिया जाता है।
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    वैष्णो देवी गुफा मंदिर लगभग 98 मीटर लम्बा है।
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    गुफा के अन्दर एक वृहत चबूतरा है, जिसे ‘मां का आसन’ कहा जाता है।
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    यहां आने जाने के लिए दो और कृत्रिम रास्ते बने हुए हैं।
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    गुफा के एक स्थान को ‘गर्भ-पूजन स्थान’ या ‘गर्भजून’ कहते हैं।
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    श्रद्धालुओं का मानना है कि जिस तरह से शिशु नौ मास तक गर्भ में रहता है, उसी प्रकार वैष्णो देवी ने यहां वास किया था।
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    मान्यता है कि यहीं पर वैष्णो देवी ने भैरोनाथ का वध किया था।
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    नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने श्री माता वैष्णो देवी के मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या को नियंत्रित करने का आदेश दिया है।
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    माता वैष्णो देवी के मंदिर में अब एक दिन में सिर्फ 50 हजार श्रद्धालुओं को ही दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी।
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    यह माना जाता है की इस मंदिर का निर्माण करीबन 700 साल पहले पंडित श्रीधर द्वारा हुआ था।
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    वैष्णो देवी के मंदिर में पुरे भारत वर्ष से भक्त आते है |
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    मंदिर का मुख्‍य आकर्षण गुफा में रखे तीन पिंड है।
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    इस मंदिर की देखरेख की जिम्‍मेदारी वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की है।
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Web Title: Vaishno Devi, Also Known As Mata Rani, Trikuta And Vaishnavi,
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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