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फ्रांस के बाद इटली में इंडियन टीम से खेलेगा बलकीरत रंगी, टीम इटली के लिए हुई रवाना

रंगी अब तक रोलर स्केटिंग में जीत चुका 100 से ज्यादा मेडल।

मनोज राजपूत | Last Modified - Jul 12, 2018, 02:38 AM IST

फ्रांस के बाद इटली में इंडियन टीम से खेलेगा बलकीरत रंगी, टीम इटली के लिए हुई रवाना

डेराबस्सी. डेराबस्सी का बलकीरत रंगी फ्रांस के बाद अब इटली में होने जा रहे इनलाइन हॉकी वर्ल्ड कप में भी भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। अंडर-19 की 16 सदस्यीय टीम इंडिया में सिलेक्ट हुए बलकीरत रंगी ने पहले पांच खिलाड़ियों में बतौर डिफेंडर जगह बनाई है। अब तक प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर 100 से अधिक मेडल अपने नाम करने वाले बलकीरत ने तैयारी के लिए पिछले तीन महीने से जोधपुर और नोएडा कैंप में खूब पसीना बहाया है।

14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच खेला जाएगा वर्ल्ड कप

उसके परिवार, मेंटर्स समेत इलाकावासी भी बलकीरत की इस उपलब्धि पर गौरवान्वित हैं। यह वर्ल्ड कप इटली के एशियोगो व रुआना में 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच खेला जाएगा। इसके लिए टीम बुधवार को दिल्ली से रवाना हो गई है। बलकीरत के बिजनेसमैन पिता कुलदीप रंगी ने बताया कि बलकीरत इससे पहले 2014 में फ्रांस के टाउलाउज में अंडर 16 वर्ल्ड इनलाइन हॉकी चैंपियनशिप में भी हिस्सा ले चुका है। भारतीय रोलर स्केटिंग महासंघ ने रोलर स्केटिंग में उसका बेजोड़ कौशल देख उसके मेंटर्स व सिलेक्टर्स ने उस पर भरोसा जताया था। उसके फिजिकल कोच रहे जसविंदर गोल्डी व हरप्रीत सिंह के अनुसार वर्ल्ड कप में बलकीरत रफ्तार में दूसरों पर भारी पड़ेगा। मौजूदा कोच हरप्रीत सिंह के अनुसार उसे फिलहाल डिफेंडर की भूमिका में रखा गया है।

रोलर स्केटिंग में माहिर है बलकीरत
इनलाइन हॉकी रोलर स्केटिंग के दम पर खेली जाती है जिसमें पांच सदस्यीय टीमों के बीच मुकाबला होता है। रोलर स्केटिंग में बलकीरत पहले ही इंटरनेशनल लेवल की रफ्तार हासिल कर चुका है। 2007 से लेकर अब तक उसने ढेरों मेडल अपने नाम किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उसने चार गोल्ड मेडल व एक सिल्वर मेडल जीता है जबकि प्रदेश स्तर पर उसके नाम 15 गोल्ड मेडल, 5 सिल्वर मेडल और 1 ब्रॉन्ज मेडल है। इसके अलावा इंटरस्कूल कंपीटिशन में 7 साल की उम्र से ही सक्रिय रहा और अब तक 9 स्वर्ण पदक, 4 रजत और 1 कांस्य पदक जीत चुका है।

आज तक निराश नहीं किया: परिवार

बलकीरत का परिवार गांव दप्पर मूल का है, जबकि पिता कुलदीप रंगी और माता हरविंदर कौर डेराबस्सी के एटीएस मीडोज में रहते हैं। बलकीरत की पढ़ाई व खेलों में रुचि के चलते उन्हें कई साल तक चंडीगढ़ शिफ्ट होना पड़ा। बलकीरत पढ़ाई में होनहार है और दसवीं में उसने 84 परसेंट नंबर लिए थे। बलकीरत परिवार में इकलौती संतान है। 12 साल से उसे प्रेक्टिस के लिए मैदान में छोड़ने की जिम्मेदारी सुबह उनकी मम्मी हरविंदर कौर व शाम को फादर कुलदीप निभाते आ रहे हैं। परिवार का कहना है कि बलकीरत को टारगेटअचीव करते देखना ही उनकी सबसे बड़ी खुशी है और आज तक बलकीरत ने उन्हें निराश नहीं किया।

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