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पिता बीमार पड़े तो गिरवी रखने पड़े खेत, फिर इस महिला ने नई टेक्निक से की खेती और सही हुई परिवार की हालत

हमेशा बांधती हैं पगड़ी, पीएम मोदी भी कर चुके हैं सम्मानित

Bhaskar News| Last Modified - May 14, 2018, 10:07 AM IST

Female farming from new technique
पिता बीमार पड़े तो गिरवी रखने पड़े खेत, फिर इस महिला ने नई टेक्निक से की खेती और सही हुई परिवार की हालत

मुक्तसर (चंडीगढ़). मालवा, जहां रोज कोई किसान या खेत मजदूर आर्थिक तंगी में आत्महत्या करता है। पंजाब के इसी हिस्से के गांव दोदा की 33 साल की गुरप्रीत कौर ने खेती को लाभदायक साबित कर दिखाया है। खेती में नई तकनीक की मदद से न सिर्फ परिवार को तंगहाली से निकाला, बल्कि अपने इलाके के लोगों की सोच भी बदल दी। खास यह है कि गुरप्रीत हमेशा कुर्ता-पायजामा और पगड़ी ही पहनती हैं। वे बाइक और टैंपो भी चलाती हैं। उनकी मेहनत को पहचानते हुए कृषि विभाग ने उनका नाम भारत सरकार के 'कृषि कर्मण अवाॅर्ड' के लिए प्रस्तावित किया।

 

 

केंद्र सरकार ने उन्हें पंजाब की प्रगतिशील महिला किसान माना और पीएम मोदी ने 17 मार्च को 'कृषि कर्मण अवाॅर्ड' से सम्मानित किया। गुरप्रीत के परिवार के पास सिर्फ ढाई एकड़ जमीन थी, वो भी गिरवी रखनी पड़ी। काेई मदद नहीं मिली। फिर खुद ठेके पर जमीन लेकर नई तकनीक से खेती शुरू की। आज उनका एक खुशहाल परिवार है, जिसमें दादी, मां-बाप और भाई-बहन हैं। 

 

टेंपो खरीदा, जब काम न हो, बाजार से सब्जी लाकर बेचती हैं 


12 साल की उम्र में ही गुरप्रीत अपने पिता बलजीत सिंह के लिए खाना लेकर खेत जाती थीं। वहां खेती में हाथ भी बंटातीं। 19 साल में जब बीए सेकंड ईयर में पढ़ ही थीं, तो फेफड़ों में पानी भरने से पिता बीमार हो गए। घर में कमाने वाला कोई नहीं था और खाने वाले 6 लोग। आर्थिक संकट से पूरा परिवार टूट गया था। पुस्तैनी ढाई एकड़ जमीन गिरवी पड़ी थी। तब गुरप्रीत ने पढ़ाई छोड़ खुद खेती करने का फैसला किया। मुश्किलें और बढ़ी जब छोटी बहन की शादी करनी थी। गुरप्रीत ने जमीन ठेके पर लेकर खुद ही खेती शुरू कर दी। लेजर लैंड-लेवलिंग और डीएसआर पद्धति से धान की बुआई की।

 

जमीन के एक छोटे टुकड़े पर सब्जियां उगाती और गांवों में बेचती। किस्तों पर ऑटो लिया। जब खेत में सब्जी न होती तो वे मार्केट से सब्जियां खरीदती और गांव में बेचती, क्योंकि अपने ग्राहकों भी टूटने नहीं देना चाहती थी। ऐसा कर उन्होंने परिवार काे सहारा तो दिया ही, साथ ही पिता का इलाज भी कराया। 

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