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CM के इंतजार में 3 घंटे नहीं दिए बच्चों के शव, जो रात को सौंपे वे भी वापस मंगाए

बस हादसे में मारे गए 23 बच्चों के परिवारों को मंगलवार को करीब तीन घंटे तक शवों के लिए अस्पताल के बाहर बैठाकर रखा

Dainik Bhaskar

Apr 11, 2018, 05:00 AM IST
घिनौनी राजनीति का ये सारा खेल इस तस्वीर के लिए... घिनौनी राजनीति का ये सारा खेल इस तस्वीर के लिए...

नूरपुर (हिमाचल)। सोमवार को स्कूल बस हादसे में मारे गए 23 बच्चों के परिवारों को मंगलवार को करीब तीन घंटे तक शवों के लिए अस्पताल के बाहर बैठाकर रखा गया। बिलखते परिवारों को बताया गया कि सीएम जयराम ठाकुर के आने के बाद ही शव सौंपे जाएंगे। कुछ परिवार, जिन्हें रात को शव सौंपे गए थे, उनसे शव वापस मंगाए गए। यही नहीं, जिन तीन बच्चों की मौत पठानकोट के अस्पताल में हुई, उनके शव भी नूरपुर के अस्पताल में पहुंचाए गए।

सरकार की मरी हुई आत्मा का असली चेहरा.
बच्चों को श्रद्धांजलि देने के नाम पर यहां मंच बनाया गया। पंडाल-माइक-स्पीकर आिद सारी व्यवस्था कर दी गई। लोगों को ये कहकर रोका गया कि सीएम फौरी राहत के चेक बांटेंगे। 23 बच्चों समेत 27 मौतों के बाद प्रशासन कितना लापरवाह रहा, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रात को सवा 3 बजे जब भास्कर टीम सिविल हॉस्पिटल में पहुंची तो सिर्फ दो नर्सें उन चार बच्चों की देखभाल में जुटी थी जो हादसे में जिंदा बचे थे। लेकिन, सुबह दर्जनों सरकारी गाड़ियाें में भरे लोग सीएम के आने की तैयारियों में जुट गए।

बच्चों की लाशों पर श्रद्धांजलि की सियासत
सुबह 7:36 बजे सभी बच्चों, टीचर्स और ड्राइवर का पोस्टमार्टम हो गया था। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्‌डा सुबह 8:40 बजे गग्गल एयरपोर्ट पहुंचे। उन्हें वहां सीएम जयराम ठाकुर का इंतजार करना पड़ा। ठाकुर 9:40 बजे पहुंचे और 10:24 बजे दोनों नूरपुर हॉस्पिटल पहुंचे। ठाकुर मंडी के सर्किट हाउस से चले थे। वहां 8:03 बजे उन्होंने लोगों से मुलाकातें शुरू कीं। 9:15 बजे क्रिकेटर ऋषि धवन से भी मिले। 8:47 बजे सीएम पड्‌डल के लिए निकले। वहां हेलिकॉप्टर इंतजार कर रहा था। इधर, नूरपुर में सुबह 6 बजे से ही बच्चों के परिवार अस्पताल के बाहर जुट गए थे। मौसम खराब था और हल्की बूंदाबांदी भी हो रही थी। इसलिए परिजन चाहते थे कि शव जल्दी उन्हें सौंपे जाए। लेकिन, अस्पताल में प्रशासन का कोई अफसर नहीं था। पोस्टमार्टम के दौरान एक-एक परिवार को मॉर्चरी में ले जाया गया, ताकि वे शिनाख्त कर सकें। तभी डीसी संदीप कुमार कुछ अफसरों के साथ पहुंचे। वे निर्देश दे रहे थे कि सीएम के आने पर शवों को कैसे निकाला जाना है। कौन क्या जिम्मेदारी देखेगा वगैरह-वगैरह। बच्चों की लाशों पर राजनीति के सवाल पर सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया। लेकिन, सीएम ठाकुर ने इतना जरूर कहा कि हादसे के कारणों की जांच चल रही है। दो दिन में एक बड़ी मीटिंग होगी, जिसमें स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर चर्चा करेंगे।

सीधी बात

मुझे यहां आकर पता चला कि शव रोककर रखे हैं...

-आप चाहते तो निर्देश दे सकते थे कि आपके आने तक शव रोककर न रखे जाएं, ये कैसी सियासत है?
-मुझे इसकी जानकारी नहीं थी कि मेरे आने की वजह से बच्चों के शवों को संस्कार के लिए ले जाने से रोका गया। मुझे सिर्फ ये बताया गया था कि अस्पताल जाना है और यहां आकर पता चला कि परिवार वाले बच्चों की लाशों के साथ इंतजार कर रहे थे।
-क्या पोस्टमार्टम पिछली शाम को नहीं हो सकता था, एक दिन तक क्यों नहीं होने दिया गया?
-ये पूरी व्यवस्था लोकल प्रशासन और एमएलए को देखनी चाहिए थी। पोस्टमार्टम अगर रात को करना था तो यह भी लोकल अथॉरिटी की ही जिम्मेदारी है।

जेपी नड्‌डा,  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री। जेपी नड्‌डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री।
बेटी की लाश अंदर मॉर्चरी में थी, मां के आंसू पोछ रहा था बेटा बेटी की लाश अंदर मॉर्चरी में थी, मां के आंसू पोछ रहा था बेटा
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जेपी नड्‌डा,  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री।जेपी नड्‌डा, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री।
बेटी की लाश अंदर मॉर्चरी में थी, मां के आंसू पोछ रहा था बेटाबेटी की लाश अंदर मॉर्चरी में थी, मां के आंसू पोछ रहा था बेटा
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