नौवीं क्लास में लिखी कविताएं मैंने आज भी अपने पास संभालकर रखी हैं...

Chandigarh News - नौवीं क्लास से मैंने लिखना शुरू कर दिया था। घर में पढ़ने का माहौल था। सभी ढेरों किताबें पढ़ा करते थे। किताबों काे...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:25 AM IST
Chandigarh News - i have kept the poems written in the ninth class with me even today
नौवीं क्लास से मैंने लिखना शुरू कर दिया था। घर में पढ़ने का माहौल था। सभी ढेरों किताबें पढ़ा करते थे। किताबों काे देखकर ही लिखने का रुझान बढ़ा। दूसरी ओर स्कूल की एक टीचर डायरी में कविताएं लिखने को कहते, उन्होंने लिखने में मेरी मदद भी की। यह बता रही हैं लेखिका सपना चमड़िया कि कैसे और कब उन्होंने लिखने की शुरुआत की। वह हाल ही में साहित्य चिंतन चंडीगढ़ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पहुंची। जिसमें उनके द्वारा लिखी किताबाें पर चर्चा हुई, जिसका पंजाबी में अनुवाद किया गया था। हमने सपना से बात की और जाना किताब और उनके लिखने के अनुभव के बारे में। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोलीं- बचपन की उस डायरी में मैंने अब तक 50 कविताएं लिखी हैं। इसे मैंने अब तक संभालकर रखा है। वैसे कई लोगों ने मुझे कहा भी है कि इसे किताब का रूप दे देना चाहिए। अब मैं जल्द ही ऐसा करूंगी। मैं दिल्ली में रहती हूं, वहीं यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हूं। जब भी समय मिलता है लिखने बैठती हूं।

Interaction

लेखिका सपना चमड़िया हाल ही में साहित्य चिंतन चंडीगढ़ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पहुंची। जिसमें उनके द्वारा लिखी किताबाें पर चर्चा हुई।

ऐसे हुआ “रोज वाली स्त्री” का अनुवाद

किताब के बारे में सपना ने बताया- 2017 में मेरी किताब “रोज वाली स्त्री” प्रकाशित हुई। ठीक इसके एक साल बाद प्रो. नीतू अरोड़ा का मुझे फोन आया। किताब पढ़ने के बाद वह बेहद प्रभावित हुई। नीतू जी ने कहा कि मैंने आपकी किताब पढ़ी और चाहती हूं कि इसका पंजाबी में अनुवाद करूं। मुझे पता था जो भी संवदेनशील होगा वह पढ़ने के बाद कुछ न कुछ एेसा जरूर सोचेगा। दूसरी बात यह है कि हमारी कोई पहले से जान-पहचान नहीं थी। मतलब न मैं उन्हें जानती थी और न वो मुझे। खैर अब यानि 2019 में 100 पन्नों की पंजाबी में अनुवादित किताब प्रकाशित हुई। इसका टाइटल किताब के चैप्टर “मैंनू छुट्टी चाहिदी ए” से लिया है।

जो है वही लिखा|सपना बोलीं- काफी समय से सामाजिक मुद्दों पर अखबार, मैगजीन में आर्टिकल लिखा करती थी। इस दौरान लगा कि औरतों के जीवन के हर पहलू के बारे में न केवल लिखना चाहिए बल्कि इसको किताब का रूप भी देना चाहिए। इस किताब को लिखने के पीछे यही वजह रही। इसमें 25 के करीब चैप्टर हैं, अलग-अलग टाइटल के नाम से। कुछ टिप्पणियां की है, कुछ कविताएं हैं तो कुछ सफरनामे।

X
Chandigarh News - i have kept the poems written in the ninth class with me even today
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना