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सीएम ऑफिस से गायब हुई आईएफएस संजीव के केस की फाइल, डीडीआर दर्ज

सुपरिंटेंडेंट छिल्लर ने कहा-आखिरी बार फाइल पीएस टू सीएम से वापस मिली थी

Bhaskar News | Last Modified - Jun 13, 2018, 03:31 AM IST

सीएम ऑफिस से गायब हुई आईएफएस संजीव के केस की फाइल, डीडीआर दर्ज

-आईएफएस पर दर्ज केस वापस लेने के लिए सीएम ऑफिस भेजी गई थी फाइल

चंडीगढ़.वन विभाग में पूर्व कांग्रेस सरकार में घोटाले उजागर करने वाले इंडियन फॉरेस्ट सर्विसेज (आईएफएस) के सीनियर अफसर संजीव चतुर्वेदी के मामले की गायब हुई फाइलों का ठीकरा महकमे के अधिकारियों ने सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय पर फोड़ दिया है। चंडीगढ़ में अब फाइल और दस्तावेज गायब होने को लेकर विभाग के सुपरिटेंडेंट राजेंद्र सिंह छिल्लर ने डीडीआर दर्ज कराई है। इसमें शिकायत की गई है कि यह फाइल सीएम के पास केस वापस लेने के लिए भेजी थी। लेकिन जब फाइल वापस मिली तो उसमें से अॉरिजनल नोटिंग और कई कागज गायब थे। चंडीगढ़ थाना-17 पुलिस ने डीडीआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

- इधर, इसी मामले में डीडीआर से पहले अधिकारियों के बीच नोटिंग भी चली। इसमें लिखा कि चतुर्वेदी की ओर से केस से संबंधित सूचना मांगी गई है। इससे संबंधित फाइल 16 मार्च को सीएम ऑफिस से मिली लेकिन इसके साथ आॅरिजनल नोटिंग वापस नहीं मिली।

- जबकि यह कागजात अतिरिक्त महाधिवक्ता परमिंद्र सिंह चौहान की ओर से 30 जून, 2016 के पत्र के अनुसरण में विभाग की ओर से 27 जून, 2016 को भेजे गए थे। यह फाइल पीएस टू सीएम से 7 मार्च, 2018 को वापस मिली है।

- यानी विभाग नोटिंग में यह कह रहा है कि फाइल आखिरी बार सीएम के प्रधान सचिव से वापस मिली थी। शिकायत दर्ज कराने वाले सुपरिंंटेंडेंट छिल्लर का कहना है कि फाइल आखिरी बार पीएस टू सीएम आरके खुल्लर से वापस आई थी, लेकिन उसमें नोटिंग समेत कुछ पेपर्स नहीं थे। अब इसे लेकर चंडीगढ़ पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है।

प्रधान सचिव ने कहा, मुझे इस बारे में ध्यान नहीं

- वन विभाग के प्रधान सचिव एसएन राय से जब इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी ध्यान नहीं है। उन्हें एफआईआर के बारे में भी नहीं पता। उनसे जब पूछा गया कि एफआईआर उनसे डिस्कस करके ही दर्ज कराई गई है, तो उन्होंने कहा कि वे इस बारे में ऑफिस में फाइल देखकर ही कुछ कह सकते हैं।

हिसार के डीएफओ रहते हुए संजीव ने किए थे फर्जीवाड़े के खुलासे

- हिसार में डीएफओ रहते संजीव चतुर्वेदी ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध खनन, फर्जी पौधारोपण, शिकार, हर्बल पार्क में भ्रष्टाचार आदि का मामला उजागर किया था। इसमें उन्होंने तत्कालीन सीएम, वन मंत्री और कई सीनियर अधिकारियों पर शामिल होने के आरोप लगाए थे।

- इस पर सरकार ने उन पर काम में बाधा का मामला बनाते हुए उन्हें चार्जशीट कर दिया था। इस पर संजीव चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार से मामले की सीबीआई जांच कराने के साथ उन पर लगे आरोपों को रद्द करने की मांग की थी। केंद्र सरकार की ओर से मामले में गठित की गई दो सदस्यीय कमेटी ने मामले की सीबीआई जांच कराने के साथ उन पर लगे आरोपों को रद्द करने की सिफारिश की।

- इसके बाद जनवरी, 2011 में राष्ट्रपति ने भी आरोप रद्द करने के आदेश दिए। इसके बाद फरवरी, 2011 में तत्कालीन राज्यपाल ने इसे लेकर आदेश दिए। लेकिन इसी बीच प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच से इनकार कर दिया। नवंबर, 2012 में संजीव सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

- सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए लेकिन मार्च, 2014 में प्रदेश सरकार हाईकोर्ट चली गई और राष्ट्रपति की ओर से उन पर लगे आरोपों को खारिज करने और केंद्र की सीबीआई जांच की सिफारिश को रद्द करने की मांग की।

- मई, 2016 में एडवोकेट जनरल ने केस को वापस लेने की अनुशंसा की। नवंबर, 2017 में संजीव चतुर्वेदी ने राज्यपाल से शिकायत की कि तत्कालीन सरकार ने उनके आदेशों को छुपाकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर राज्यपाल ने मुख्य सचिव से रिपोर्ट तलब करने के आदेश दिए। मार्च, 2018 में संजीव चतुर्वेदी ने आरटीआई से वन विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी तो बताया गया कि फाइल नहीं मिल रही है।

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