अपने एल्युमिनाइज से खफा पीयू टीचर्स, इस बार तीन स्टूडेंट्स, एक टीचर चुनाव मैदान में

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:26 AM IST

Chandigarh News - चंडीगढ़ से सांसद पद पर इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस से यूनिवर्सिटी के तीन एल्युमिनाइज मैदान में हैं और एक टीचर...

Chandigarh News - khafa pu teacher from its aluminaase this time three students a teacher in the election field
चंडीगढ़ से सांसद पद पर इस बार पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस से यूनिवर्सिटी के तीन एल्युमिनाइज मैदान में हैं और एक टीचर भी। सोमवार और बुधवार को यूनिवर्सिटी में किरण खेर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थकों से मुलाकात की और पवन बंसल सेक्टर-25 स्थित एक टीचर के घर पर वीरवार को अपने समर्थकों से मिले और वोट मांगी। हरमोहन धवन भी यूनिवर्सिटी से ही पढ़े हैं, हालांकि यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट या सीनेट व सिंडीकेट में कभी भी वे एक्टिव नहीं रहे।

डिपार्टमेंट ऑफ सोशियोलॉजी से प्रो. देवी सिरोही भी आजाद कैंडीडेट के रूप में चुनाव में खड़ी हैं। लेकिन स्टूडेंट्स, टीचर्स और स्टाफ अपने दोनों पूर्व सांसदों से खफा है। खासतौर पर पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी स्टेटस व ग्रांट रेगुलराइज करने को लेकर। यूनिवर्सिटी के प्रति उनके लगाव की स्थिति ये है कि खेर ने नवंबर 2016 से लेकर अब तक हुई 17 मीटिंग में से सिर्फ दो मीटिंग ही अटेंड की हैं। उनके मुकाबले पवन बंसल ने 10 मीटिंग अटेंड की हैं।

सेंट्रल स्टेटस की डिमांड: यूनिवर्सिटी में सेंट्रल स्टेटस की डिमांड उस समय शुरू हुई, जब पंजाब सरकार ने ग्रांट फिक्स कर दी थी। इसके बाद सैलरी व पेंशन के संकट की वजह से एक ही सॉल्युशन था कि यूनिवर्सिटी को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिले। पीयू टीचर्स एसोसिएशन ने धरना दिया। पंजाब के तत्कालीन सीएम ने नो आॅब्जेक्शन लेटर दिया, लेकिन रातों-रात वापस ले लिया। उस समय से यह डिमांड लगातार उठती रही।

पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में एक मीटिंग हुई, जिसमें पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने भी मदद की। इसके बाद यूपीए सरकार ने यूनिवर्सिटी को डेफिसिट बजट मिलना शुरू हुआ। लेकिन भाजपा सरकार के समय ये भी बंद हो गया। बाद में कोर्ट के दखल से केंद्र सरकार ने टीचरों की सैलरी देने पर सहमति दी, लेकिन अभी तक सातवां वेतन आयोग नहीं मिला है।

किरण खेर ने वादा किया था कि उन्होंने एमएचआरडी मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर से बात की है और पीयू की रुकी हुई 40 लाख रुपए की ग्रांट मिल जाएगी। लेकिन बाद में इस बात को दबा दिया गया। पता चला कि यह मामला भाजपा की अंदरूनी राजनीति की भेंट चढ़ गया। खेर ने अपनी सांसद निधि में से पीयू को जो भी मदद दी, वह पांचवें साल में दी। दोनों ने ही पीयू को केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाने के लिए प्रस्ताव नहीं रखा। प्रो देवी सिरोही भी कैंपस में संपर्क कर रही हैं। वहीं, धवन ने अब तक पीयू के लोगों से संपर्क नहीं किया है।

सातवां वेतन आयोग नहीं मिला

सेंट्रल यूनिवर्सिटी का मुद्दा हो या यूपीए ने जाे ग्रंाट दी वह रेगुलर होने के सभी मामले अटके हुए हैं। अभी तक सातवां वेतन अायाेग नहीं मिला है अाैर हायर एजुकेशन काे लेकर लगातार उदासीनता नजर अाई। काॅलेज टीचर्स काे 15600 का जाे वेतन दिया जा रहा है, वह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। यह सभी सांसदों की नाकामियों का सबूत है।
यूटी में हाउसिंग की जितनी भी स्कीम निकलती हैं, उसमें हर डिपार्टमेंट के लोगों को कंसीडर किया जाता है, लेकिन उसमें पीयू के टीचर्स को कंसीडर ही नहीं किया जाता। इस दिशा में कभी भी किसी ने काम नहीं किया।

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