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इंसानी अधिकारों के लिए लड़ते थे डॉ. अंबेडकर

एक नाटकीय पेशकश जिससे सोसाइटी में फैली कास्टिज्म की बुराई पर रोशनी डाली गई। बताया गया कि कैसे उच्च वर्ग की वजह से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 02:00 AM IST

इंसानी अधिकारों के लिए लड़ते थे डॉ. अंबेडकर
एक नाटकीय पेशकश जिससे सोसाइटी में फैली कास्टिज्म की बुराई पर रोशनी डाली गई। बताया गया कि कैसे उच्च वर्ग की वजह से निचले वर्ग के लोगों पर दबाव बना रहता है। इसी दबाव की कहानी पर बात हुई। यह प्रस्तुति थिएटर ऑफ पीपुल के कलाकारों की रही। पंचकूला के यावनिका थिएटर में लाइट एंड साउंड शो से नाटक माशा और मशाल खेला गया। लेखन अश्विनी कुमार सावन ने किया। वहीं, डायरेक्शन रहा तेज भान गांधी का। इस नाटक की कहानी डॉ. भीम राव अंबेडकर की जिंदगी पर आधारित रही। उनका राष्ट्र के प्रति कंट्रीब्यूशन को दर्शाया गया। नाटक से डॉ. भीम राव अंबेडकर से दिखाया वह किसी एक क्लास की बजाए इंसानी अधिकारों के लिए लड़ते थे। इसकी कहानी उनकी जिंदगी के आसपास घूमती है। दिखाया गया कि कैसे स्कूल में डॉ. अंबेडकर के साथ भेदभाव होता है। उन्हें सवालों के जवाब देने ही नहीं दिया जाता। क्योंकि हाई क्लास के बच्चे उन्हें पसंद नहीं करते हैं। वहीं जब वह पढ़ने के लिए विदेश जाते हैं बाहर लोगों को ऑब्जर्व करते हैं तो उन्हें पता चलता है कि दूसरे देशों में कास्टिज्म (जाति) जैसा कुछ नहीं है। वह देश भारत से काफी एडवांस हैं। क्योंकि वह किसी भी चीज में यहां के लोगों की तरह यूं ही आंख बंध करके फॉलो नहीं करते हैं। डॉ. अंबेडकर एमपी के तौर पर पार्लियामेंट की एसेंबली में बिल प्रपोज करते हैं। जिससे सोसाइटी में महिला का दर्जा बढ़े। साथ ही उन्हें निचले तबके का न समझा जाए।

पंचकूला के यावनिका थिएटर में लाइट एंड साउंड शो माशा और मशाल खेला गया।

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