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ह्यूमन बुक द फॉरएवर हैपी गाय, बुलेट राजा और परीमा बैलेरीना नेे सुनाई कहानी

आपने यूं तो दर्जनों लाइब्रेरी विजिट की होंगी। मगर, क्या कभी किसी “ह्यूमन लाइब्रेरी’ के बारे में सुना है, जो इंसानी...

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:00 AM IST
ह्यूमन बुक द फॉरएवर हैपी गाय, बुलेट राजा और परीमा बैलेरीना नेे सुनाई कहानी
आपने यूं तो दर्जनों लाइब्रेरी विजिट की होंगी। मगर, क्या कभी किसी “ह्यूमन लाइब्रेरी’ के बारे में सुना है, जो इंसानी बुक्स से बनी हो। वो दिखती कैसी होगी? कुछ ऐसे ही सवालों से पर्दा उठा शहर के लूमोस कोकोस कैफे एंड लाउंज में। डेनमार्क से शुरू हुए “ह्यूमन लाइब्रेरी’ कंसेप्ट को फॉरएवर फ्रेंड्स की मदद से यहां क्रिएट किया गया था। यह इनिशिएटिव था शिवानी गोयल और साहिल शर्मा का। फर्क सिर्फ इतना था कि इस ह्यूमन लाइब्रेरी में बुक्स थी तो पर इंसानों के रूप में। नाम दिया गया था बुलेट राजा, अनकन्वेंशनल स्टोरी टेलर, वीगन, परीमा बैलेरीना, द वीरागो, द राइट स्पिन, द फरवर हैपी गाय, एक्सपीडिशन: ए जर्नी ऑफ ए थाउजैंड माइल्स जैसे नाम दिए। साथ ही टाइटल दिया गया डॉन्ट जज बुक्स बॉय कवर। इस कंसेप्ट के बारे में शिवानी और साहिल ने बताया कि आमतौर पर लाइब्रेरी में बुक्स होती है। जिन्हें लोग उसके कवर के मुताबिक जज करते हैं। उन्हीं बुक्स को यहां इंसानों से बदला है, ताकि जो चीज बुक्स पढ़कर सीखने को मिलती है उसे जुबानी जानें। किसी को लेकर मनगढ़ंत बात मन में बसी है तो उसे बातचीत से सुलझाएं। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी में ह्यूमन बुक्स के नौ जोन्स क्रिएट किए है। बुक के पीछे उसकी कहानी के बारे में थोड़ी जानकारी मिलती है वैसा ही कैटलॉग इन ह्यूमन बुक का बनाया।

शिवानी गोयल और साहिल शर्मा ने ह्यूमन लाइब्रेरी और फरएवर फ्रेंड्स ने बुक्स का अलग ही कंसेप्ट दिखाया। जिसमें लोगों ने ह्यूमन बुक्स बनकर कहानी सुनाई।

इनकी टीम तनावयुक्त लोगों को मदद करती है

विकास लूथरा और शेरखां को द फॉरएवर हैपी गाय बुक का टाइटल दिया गया। विकास एनिमल रेस्कयूअर होने के साथ आईटी कंपनी में जॉब करते हैं। जबकि शेरखां इनका पेट है। साथ ही फरएवर हैपी गाय का फाउंडर सीईओ है। इनकी टीम में पांच डॉग्स हैं जो डिप्रेशन से जूझ रहे लोगों की मदद करते हैं। विकास बताते हैं- यह इकलौता फॉर लेग आंत्रप्रिन्योर है। जिसका काम है कडलिंग करना है यानि लोगों के साथ खेलते हैं। खासतौर पर कॉरपोरेट फील्ड के लोगों के बीच। पैट्स को लेकर लोगों की मानसिकता है कि वह काट लेगा। लेकिन जब इससे कोई मिलता तो उसका डर निकल जाता है। तीन साल पहले शेरखां मिला तो उसके चेहरे पर मिगोट्स लगे थे। अकसर इस हालत में देखकर पेट डंडे मारते हैं। मैंने उसे रेस्क्यू किया। अब शेरखां के जरिए दूसरे डॉग्स की मदद से उनके लिए जॉब क्रिएट करके देते हैं।

दो बार एवरेस्ट चढ़ना पड़ा

माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करने वाले दलजिंदर सिंह को बुक एक्सपेडीशन- द जर्नी ऑफ थाउजैंड माइल्स का टाइटल मिला। दलजिंदर पंजाब पुलिस में क्राइम ब्रांच में कार्यरत हैं। वह बोले- पिछले साल मई में यह चढ़ाई की। पर मुझे दो बार एवरेस्ट चढ़ना पड़ा। पहले छुट्टी की अर्जी के लिए। उसके बाद चढ़ाई। असल में बारह साल पहले पंजाब पुलिस के एडिशनल डीजीपी, एसआई और हेड कांस्टेबल ने इसका सफर तय किया। पर एक्सपिडिशन में अविलास की वजह से वह पूरा न हो पाया। उसके बाद विभाग से किसी शख्स ने पूरा करने की कोशिश नहीं की। मुझमें था कि उस सपने को पूरा करना है। मैंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने की तैयारी की और मुश्किल परिस्थिति को जाना। जैसे माउंटेनियरिंग में फरास बाइट हो जाती है। जिससे हाथ-पैर काटने पड़ जाते हैं। एवरेस्ट पर जाने के दो रास्ते हैंं। साउथ से कुंभु ग्लेशियर पार करते आठ घंटे का सफर। दूसरा, नार्थ से दो घंटे का सीधा सफर।

मैंने कथक डांस को अपने अंदर बसाया

कथक आर्टिस्ट मनीश कुमार ने परीमा बैलेरीना नामक बुक से कहानी शेयर की। खुद को लेकर सोसाइटी की सोच व नकारात्मक बातों पर राय रखते हुए बोले- मैं जैसा हूं उसे मैंने स्वीकार किया है। अगर एक लड़का लड़की की चाल चलने लगे तो वैसे ही उसके हाव भाव बन जाते हैं। वैसा ही मेरे साथ रहा। मैंने कथक डांस को अपने अंदर बसाया है। कथक असल में मंदिरों का डांस है जिससे हम प्रकृति को दिखाते हैं। कथक बेहद आसानी से इंसानी जिंदगी से रिलेट होती है।

वीगन चीजों से फैशन संभव है

स्पिनेच एंड सौवे बुक से फैशन डिजाइनर व वीगन एनिमल एक्टिविस्ट राओ श्रुति राठौड़ ने अपनी स्टोरी बताई। बोलीं- विदेशी फैशन ब्रैंड्स का हिस्सा रही हूं। जब इंडिया आई तो कुछ ऐसा घटा जिससे तनाव में चली गई। फिर मेरी जिंदगी में डॉग आया। उससे जुड़ी तो थोड़ा इंटेलिजेंट बनीं। देखा कि फैशन की चीजों को तैयार करने के लिए पशुओं को मारा जाता है। बिना निर्दयी होते हुए फैशन को बढ़ावा मिले। लेदर, वूल, फर, सिल्क के बिना भी फैशनेबल दिखा जा सकता है इसलिए वीगन एनिमल एक्टिविस्ट बनीं। डिजाइनिंग के बहाने उसे ही प्रमोट करती हूं।

आईटी फील्ड छोड़ बनाया बाइकर्स कैफे

बुलेट राजा टाइटल दिया गया आंत्रप्रिन्योर सुमित धर को। उन्होंने आईटी की जॉब छोड़ अपना द बुलेट्स कैफे बनाया। वह बताते हैं- 1998 से बुलेट चला रहा हूं। पैरेंट्स पहले मेरे हक में नहीं थे। बाद में वह मान गए। 2010 से प्रोफेशनली शुरुआत की। ढाई साल पहले बुलेट को लेकर क्लब बनाया। क्योंकि यहां ऐसा कोई क्लब व कैफे नहीं था, जहां इससे जुड़े लोग मिले। क्लब राइडिंग के बहाने लोग एक-दूसरे की मदद कर पाएं। जितने ज्यादा लोग होंगे उतना ही रोमांच रहता है। यही एडवेंचर होता है और चीजों को एक्सप्लोर कर सके।

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