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इन कविताओं में समानता, जाति-वाद और धर्म की बात

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 02:00 AM IST

News - “शब्द उजागर हो गए” यह काव्य संग्रह है। इसे जगवंत गिल ने लिखा। शनिवार को बाबा फरीद फाउंडेशन इंटरनेशनल, पंजाब कला...

इन कविताओं में समानता, जाति-वाद और धर्म की बात
“शब्द उजागर हो गए” यह काव्य संग्रह है। इसे जगवंत गिल ने लिखा। शनिवार को बाबा फरीद फाउंडेशन इंटरनेशनल, पंजाब कला परिषद व पंजाबी लेखक सभा चंडीगढ़ के सहयोग से सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में इस काव्य संग्रह का विमोचन हुआ। इसके बाद इस पर चर्चा की गई। इस दौरान परिषद के चेयरमैन पद्मश्री डॉ. सुरजीत पातर भी मौजूद रहे। जगवंत गिल ने बताया- इस किताब में 90 कविताएं हैं। कुछ ऐसी हैं जो मेरे जीवन से जुड़ी हैं तो कई में लोगों और राजनीति के बारे में लिखा है। कई कविताओं में समानता, जाति-वाद, धर्म के पीछे लड़ने वालों के लिए मैसेज है। बोले- मैं 7 साल से लिख रहा हूं, लेकिन कविताओं को किताब का रूप पहली बारी दिया।

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सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में काव्य संग्रह “शब्द उजागर हो गए” का विमोचन हुआ।

ऐसे शुरू हुआ लिखने का सिलसिला

जगवंत बोले- लिखने के लिए मुझे एक चीज नहीं बल्कि कई चीजों ने प्रेरित किया। 24 साल से कनाडा में बिजनेस कर रहा हूं। हर साल अपने होम टाउन मोगा पंजाब आता हूं। इतने वर्षों में जिंदगी के अनुभवों ने काफी कुछ सिखा दिया। चाहे वह परिवार से जुड़े हों या फिर देश- विदेश से। अपने इन्हीं अनुभवों को मैंने शब्दों का रूप देकर उजागर किया।

बटालवी और सुरजीत पातर हैं आइडल

जगवंत बोले- ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ लिखता हूं। मुझे पढ़ने का शौक भी है। शिव कुमार बटालवी और सुरजीत पातर को सबसे ज्यादा पढ़ता हूं। यह दोनों मेरे आइडल हैं। खुशी इस बात है कि अपने ही देश में इस किताब को अपने आइडल के साथ विमोचन करने का मौका मिला।

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