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अभी तो पटियाला पैग से कॉकटेल पर आए हैं चंडीगढ़ के बारटेंडर्स

जिस तरह शेफ का काम होता है जायकों काे बैलेंस करते हुए डिश तैयार करना। वैसे ही जॉब बारटेंडर की भी होती है। एक कॉकटेल...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 02:00 AM IST
अभी तो पटियाला पैग से कॉकटेल पर आए हैं चंडीगढ़ के बारटेंडर्स
जिस तरह शेफ का काम होता है जायकों काे बैलेंस करते हुए डिश तैयार करना। वैसे ही जॉब बारटेंडर की भी होती है। एक कॉकटेल में बैलेंस बनाना। इसी कसौटी पर खरे उतरे हुए दिखे बारटेंडर्स शहर में। दरअसल, वीरवार को देशभर में हो रही “अल्टीमेट बारटेंडर चैंपियनशिप’ चंडीगढ़ पहुंची। सेक्टर-35 के पैडलर्स लाउंज में यह चैंपियनशिप हुई। इसमें चंडीगढ़ और देहरादून के बारटेंडर्स ने हिस्सा लिया। इसे जज करने के लिए मंकी शोल्डर इंडिया के ब्रैंड एंबेसडर पंकज बालाचंद्रन पहुंचे। जो पिछले नौ साल से हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। पंकज ने पार्टिसिपेंट्स को उनकी नॉलेज व मिक्सिंग टेक्नीक के आधार पर आंका। उन्हें ड्रिंक तैयार करने की टेक्नीक से वाकिफ कराया।

पंकज बताते हैं- बारटेंडर को कॉकटेल मेकिंग के हर पहलू के बारे में पता होना जरूरी है। छह राउंड्स नॉलेज, जीपी, पोरिंग, नोजिंग, टेबल सर्विस और राउंड बिल्डिंग में देखा गया कि अगर बारटेंडर बिना नाप तोल के ड्रिंक को ग्लास में डाल रहा है तो उसे अंदाजा हो कि वो कितनी है। महक से ही अंदाजा लगा ले कि किस ब्रैंड की व्हिस्की या स्पिरिट है। वह अपने ग्रास प्रॉफिट को गिन सके। उसे कॉकटेल की कॉस्टिंग का पता हो कि उससे उन्हें कितना मुनाफा होगा। बारटेंडिंग का सीन कितना बदला है? पंकज कहते हैं- यहां के बारटेंडर्स पटियाला पैग से कॉकटेल की तरफ बढ़े हैं। अभी काफी बदलाव जरूरी है बाकी मैट्रो शहरों के मुकाबले। क्योंकि वहां बारटेंडिंग सीन काफी अलग है। लोगों का रुझान इसकी तरफ काफी बढ़ा है। वह इस पेशे में आ रहे हैं। मगर सबकुछ इस बात पर निर्भर करता है कि वह इसे कितना कैच कर पा रहे हैं। आमतौर पर जब भी ड्रिंक की बात होती है तो एलआईटी, कॉस्मोपॉलिटन, मोजितो का नाम लिया जाता है। असल में यह एक आर्ट है।तकरीबन नौ सौ क्लासिक कॉकटेल्स हैं, जिन्हें बारटेंडिंग से अोवरटाइज कर सकते हैं।

Championship

देश की अल्टीमेट बारटेंडर चैंपियनशिप चंडीगढ़ में हुई। नाॅर्थ के 20 बारटेंडर्स ने इसमें हिस्सा लिया।

कॉकटेल बनाने का यह तरीका

पंकज बोले- कॉकटेल बनाने का एक प्रोसेस होता है। इसके लिए ग्लास में बर्फ डालनी जरूरी होती है। यह ड्रिंक डायल्यूट करती है उसमें मौजूद एल्कोहल कंटेंट को 45 से 20 फीसदी तक कम करने में। आमतौर पर कॉकटेल में कम से कम दो क्यूब डाले जाते हैं। इसके बाद इसकी असली मेकिंग शुरू होती है। कॉकटेल में बेस स्पिरिट व व्हिस्की से लेना होता है। जो शाइन थ्रू हो। उसके बाद दो तरह से मिक्सिंग करनी होती है। पहला, स्वीट और साॅल्ट यानि मीठा और नमक के बैलेंस से। दूसरा, बिटर स्वीट यानि लाइम और मीठे के बैलेंस से। फिर कॉकटेल को सटर करते हुए उसकी गार्निशिंग कर सर्व किया जाता है।

सिर्फ कॉकटेल बनाते हैं

पिछले साल बारटेंडिंग चैंपियनशिप के विनर रहे परमवीर ने कहा- इंडस्ट्री को ग्लैमराइज बनाना है हालांकि दिल्ली मुंबई के बारटेंडर्स यहां के बारटेंडर्स से काफी आगे हैं। यहां के बारटेंडर्स ने अभी शुरुआत की है। इस चैंपियनशिप में एक पार्टिसिपेशन चार साल से बारटेंडिंग कर रहे हीरा सिंह का भी रहा। बताते हैं- मैंने होटल लाइन को पेशा बनाने का सोचा क्योंकि मुझे फ्लेयरिंग यानि बोतलों को घुमाने का शौक था। इसलिए बारटेंडर बना। हालांकि ड्रिंक नहीं करता। पर नई-नई कॉकटेल बनाने का शौक रखता हूं। इसे एंजॉय करता हूं।

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