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मन पर 1984 दंगों का असर था, इसलिए लिखा यह नाॅवल

द असेसिनेशंस- अ नॉवल ऑफ 1984 में विक्रम कपूर ने उस विषय पर लिखा है, जिसकी याद आज भी लोगों को हिला देती है। उन्होंने...

Danik Bhaskar | Apr 08, 2018, 02:00 AM IST
द असेसिनेशंस- अ नॉवल ऑफ 1984 में विक्रम कपूर ने उस विषय पर लिखा है, जिसकी याद आज भी लोगों को हिला देती है। उन्होंने अस्सी के दशक की दिल्ली की दशा को भी अपनी कलम से बयां किया है। विक्रम के मुताबिक इस घटना से संबंधित ऐसे कई मुद्दे हैं जो अनसुलझे हैं। अभी भी बहुत पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। नॉवल का रीडिंग सेशन शनिवार को सेक्टर-7 स्थित हेड्जहॉग में रखा गया था।

विक्रम ने बताया- 1984 पर एंथोलॉजी- 1984 इन मेमोरी एंड इमेजिनेशन को एडिट करते-करते खयाल आया कि क्यों न इस पूरी घटना और इसके अंजाम पर एक किताब लिखी जाए। बस इसी खयाल के साथ 2016 की शुरुआत में मैंने लिखना शुरू किया। फरवरी 2017 में इसकी मैन्युस्क्रिप्ट सबमिट की और नवंबर में किताब सामने थी। विक्रम आर्मी बैकग्राउंड से हैं। वे बोले- यह बात उस वक्त की है जब मैं मिड टीन में था। हिंदु और सिख समुदायों में आपस में नफरत हो गई थी। कुछ ने अपने पड़ोसियों की मदद की तो कुछ ने हिंसा को अंजाम दिया। हम दिल्ली की डिफेंस कालोनी में रहा करते थे। वहां साथ ही त्रिलोकपुरी इलाका था, जहां हिंसा हुई। मेरे कई सिख दोस्त थे जो इससे प्रभावित हुए थे। इन सब बातों का मेरे मन पर गहरा असर था। मैं उन चीजों को भूल नहीं पाया। इसलिए ये किताब बनकर सामने आई है।

यूपी और दिल्ली के सिखों पर इसका ज्यादा असर

विक्रम कहते हैं- मैंने दिल्ली में कई जगह बुक रीडिंग सेशन किए। दिल्ली से बाहर पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में पहली बार इस किताब को पढ़ा। हालांकि रिस्पॉन्स में मुझे कुछ ज्यादा फर्क नहीं लगा, पर मुझे ऐसा लगता है कि यहां के लोग इस किताब को सिखों के नजरिए से ज्यादा देखेंगे। हालांकि ये भी सच है कि 1984 के दंगों का असर दिल्ली और यूपी के सिखों पर ज्यादा हुआ क्योंकि वहां सिख माइनॉरिटी में थे।

विक्रम कपूर

विक्रम कपूर शिव नादर यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं और क्रिएटिव राइटिंग व लिट्रेचर पढ़ाते हैं। ये दो नॉवल्स- टाइम इज अ फायर और द वेजेस ऑफ लाइफ के ऑथर हैं। 1984 के एंटी सिख रायट्स पर एंथोलॉजी- 1984 इन मेमरी एंड इमेजिनेशन के एडिटर हैं। इनकी शॉर्ट स्टोरीज का चयन बड़े इंटरनेशनल प्राइज के लिए हो चुका है। इसमें कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज शामिल है।