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इरशाद, पीयू से रुख्सत हुआ है उसकी रूह तो यहीं घूमती फिरती है

आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़ स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की यादें ताउम्र एक सरमाया (पूंजी) बनकर साथ रहती हैं। फिर...

Dainik Bhaskar

May 03, 2018, 02:05 AM IST
इरशाद, पीयू से रुख्सत हुआ है उसकी रूह तो यहीं घूमती फिरती है
आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़

स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की यादें ताउम्र एक सरमाया (पूंजी) बनकर साथ रहती हैं। फिर चाहे वहां से रुख्सत हुए कितना ही लंबा अरसा क्यों न हो गया हो। आप जब भी उस माहौल में वापस आते हैं, वो पुराने दिन फिर से याद आ जाते हैं। अवॉर्ड विनिंग गीतकार इरशाद कामिल भी जब बुधवार को पीयू पहुंचे तो उनके साथ भी ऐसा ही हुआ। यहां हुए कार्यक्रम रुख्सत में उन्होंने हिंदी विभाग से रुख्सत होने के वक्त की कुछ यादें शेयर कीं।

बोले- अपने वक्त में न तो मैं कभी मिस्टर फ्रेशर बना और न ही कभी कोई और टाइटल जीता। पर मन में इच्छा जरूर होती थी कि कुछ-न-कुछ बोलूं। अब मैं अपने गीतों और कविताओं के माध्यम से अपनी बात कह जाता हूं। पर मुझे अपने वक्त की कई बातें याद हैं। तब की कई फोटोज भी हैं। एक फोटो मेरे पास फ्रेशर पार्टी की है, जिसमें मैंने हरे रंग की शर्ट पहनी हुई है और गले में सफेद रंग का स्कार्फ है, बाल घुंघराले हैं। एक स्टूडेंट कैंप के दौरान की फोटो है जब हम ईंटों की भट्टी बनाकर उसपर खाना पका रहे हैं। बोले- नॉस्टेल्जिया (पुरानी यादें) एक सरमाए की तरह होता है। इसे सोचकर खर्च करना चाहिए, खर्च करते वक्त डरना चाहिए। मैं अपने पीयू डेज को कभी नहीं भूला। मेरी रूह अब भी यहीं घूमती फिरती है।

down Memory lane

पंजाब यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट में आयोजित हिंदी विभाग के कार्यक्रम-रुख्सत में पहुंचे अवॉर्ड विनर लिरिसिस्ट इरशाद कामिल से हमारी बात।


कोई भी यूनिवर्सिटी साहित्यकार पैदा नहीं कर रही

इरशाद कामिल ने कहा- मुझे ये कहते हुए अच्छा नहीं लग रहा कि हिंदी हो, अंग्रेजी या पंजाबी कोई भी यूनिवर्सिटी साहित्यकार पैदा नहीं कर रही। जो लोग साहित्यकार बनने की कोशिश भी कर रहे हैं, उन्हें घास काटने की मशीन की तरह काट दिया जाता है। पोएट्री को यंगस्टर्स से जोड़ने के लिए भारी-भरकम नहीं हल्के शब्द चाहिएं। यही कोशिश मैं अपने बैंड- इंक बैंड के माध्यम से कर रहा हूं। इस मार्च वर्ल्ड पोएट्री डे पर सिंगर व कंपोजर एआर रहमान ने इस बैंड का वीडियो आॅफिशयली लॉन्च किया था। वैसे ये बैंड 2015 से चल रहा है। इससे हम नाॅन-फिल्मी पोएट्री पर फोकस कर रहे हैं। इसके बाद इरशाद ने बच्चों के साहित्य पर बात की। बोले- संस्था एकलव्य के लिए मैं काम करता हूं। ये हर एज ग्रुप के बच्चों के लिए किताबें निकालती है।

काली औरत का ख्वाब

इरशाद ने बताया- मेरी किताब, काली औरत का ख्वाब जल्द रीडर्स के बीच आएगी। इसमें मेरे पहले गीत से लेकर पहले फिल्मफेयर तक की कहानी है। हर गाने के पीछे की कहानी है। कैसे एक-एक लाइन बचाने के लिए प्रीतम से लड़ा। किसी गाने के लिए इम्तियाज अली ने दो दिन तक मुझसे बात नहीं की।

कुछ मुश्किल नहीं होता

इरशाद ने कहा-इंडिपेंडेंट पोएट्री मैं अपने लिए लिखता हूं। पर जब फिल्मों के लिए लिखता हूं तो मैं खुद लिखते हुए भी खुद नहीं लिखता। उदाहरण के तौर पर फिल्म सुल्तान के लिए अगर मैंने गाना, जग घुमेया लिखा है तो मान लीजिए वो सलमान ने खुद के लिए लिखा है। फिल्मों में लिखने का चैलेंज तब तक है जब तक आपको आता न हो। बोले- जब हॉबी प्रोफेशन बन जाती है, तो पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के बीच की लाइन खत्म हो जाती है।

बदलाव सुनने वालों में चाहिए

मैं पंजाबी गीतों के बारे में ज्यादा नहीं जानता। पर सुना है अब कानून सख्त हो गया है पंजाबी गीतों को लेकर। ये अच्छी बात है। पर मैं यहां गुरु रंधावा के गीत लगदी पंजाब दी ए का जिक्र करना चाहूंगा। क्या बोल हैं? अब उस गीत को हिट गुरु रंधावा ने नहीं, सुनने वालों ने बनाया है। इसलिए बदलाव सुनने वालों में चाहिए।

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