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गीतों से एंटरटेनमेंट होता है, पर गजल से लोग कुछ सीखते हैं

खूबसूरत पोएट्री से खूबसूरत गजल बनती है। इसमें पोएट्री का अहम रोल है, इसलिए सुनने वाला कुछ-न-कुछ जरूर सीखता है। जबकि...

Danik Bhaskar | May 03, 2018, 02:05 AM IST
खूबसूरत पोएट्री से खूबसूरत गजल बनती है। इसमें पोएट्री का अहम रोल है, इसलिए सुनने वाला कुछ-न-कुछ जरूर सीखता है। जबकि बाकी के गीतों से आपका एंटरटेनमेंट होता है। पर सीखने के लिए कुछ नहीं होता। यह कहना है सिटी बेस्ड गजल सिंगर रणबीर कुमार का। यही वजह है कि म्युजिक के किसी और जॉनर की बजाय उन्होंने गजल को चुना। रणबीर की अब तक चार गजल एलबम गजल लवर्स के बीच आ चुकी हैं। इनमें चुभन, माज्ही, सफर और इमोशन शामिल हैं। कुछ समय पहले इनकी एलबम- जुस्तजू भी रिलीज हुई है।

रणबीर के नाना बांसुरी बजाते थे और मां ढोलक। इसलिए बचपन से ही इनके हाथ तबला और हारमोनियम पर रहते थे। वह जब भी कुछ बजाते, उसमें रिदम होता। इसके अलावा मां और पिता, दोनों को ही गजलें सुनने का शौक था। इसलिए इनका रुझान बचपन से ही गजल की ओर था। स्कूल टाइम में म्युजिक टीचर पुष्पा ने जब इनकी आवाज सुनी तो पेरेंट्स को कहा कि इसे इसी फील्ड में आगे बढ़ाओ। इसके बाद से रणबीर ने अपनी सारी पढ़ाई संगीत में की। टीचर पुष्पा के अलावा उस्ताद नंद लाल और डॉ. परमजीत से भी संगीत सीखा। गजल माएस्त्रो जगजीत सिंह के आखिरी पांच साल में उनसे आशीर्वाद मिला। उनसे भी गजल की कई बारीकियां सीखने को मिलीं। रणबीर अब तक निदा फाजली, एस राकेश, फरक शहजाद और मीता परसुराम और रूपा सबा की लिखी गजलें गाई हैं। 15 साल से कंसर्ट कर रहे हैं। शुरुआत में सीनियर सिटीजंस के कई प्रोग्राम किए हैं। दिल्ली, गोवा, मुंबई, शिमला और चंडीगढ़ के अलावा इंग्लैंड, इटली, जर्मनी और ऑस्ट्रिया में परफॉर्म कर चुके हैं। पिछले साल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल प्रयाग में इन्हें बेस्ट गजल सिंगर का अवॉर्ड मिला था। जगजीत सिंह के अलावा इन्हें मेहंदी हसन खान की गजलें सुनना पसंद है।

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सिटी बेस्ड गजल सिंगर रणबीर कुमार ने म्युजिक के किसी और जॉनर की बजाय गजल चुनने को लेकर हमसे बात की।