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स्टूडियो से दुनिया में झांक पाता है आर्टिस्ट

अार्ट का अपना एक प्रोसेस है। इसे समझने के लिए स्टूडियो जरूरी है। क्योंकि आर्टिस्ट का आर्टवर्क के साथ असली संवाद...

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 02:05 AM IST
स्टूडियो से दुनिया में झांक पाता है आर्टिस्ट
अार्ट का अपना एक प्रोसेस है। इसे समझने के लिए स्टूडियो जरूरी है। क्योंकि आर्टिस्ट का आर्टवर्क के साथ असली संवाद वहीं होता है। कुछ ऐसी बातें जानने को मिली जब आर्ट स्टूडियो पर बात हुई। दरअसल, शहर में आर्ट स्टूडियोज की एक आर्टिस्ट की जिंदगी में अहमियत पर ललित कला एकेडमी की ओर से टॉक सेशन रखा गया था। यह सेशन बुधवार को कार्बूजिए सेंटर के ओपन आर्ट स्टूडियोज-19 में हुआ। इसे एमिनेंट आर्टिस्ट व पूर्व गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स के प्रिंसीपल प्रेम सिंह ने कंडक्ट किया। उन्होंने पहले अपने आर्ट के सफर काे शेयर किया। फिर स्टूडियो की बात करते हुए विचार रखे।

वह बोले- 1962 में मेरी कला की जर्नी की शुरुआत हुई। जब मैंने आर्ट कॉलेज-10 को जॉइन किया। तब यहां आधा म्यूजियम और आधा कॉलेज था। युवा थे और मन में काफी उम्मीदें, सपने और कुछ करने की चाहत थी। इसलिए अकसर म्यूजियम चले जाते थे और वहां डिस्प्ले हुई चीजों को देखने का मौका मिलता। उन्हें देखते हुए मन में ख्याल आता था कि आर्ट की इस खूबसूरत कल्पना को कहां बैठकर बनाते होंगे। इनका कोई अपना ठिकाना व स्पेस होगा। जिसे वह स्टूडियो का नाम देते हैं। एक तरह से आर्टिस्ट का स्टूडियो उसका अपना रूम होता है। जहां आर्ट को एक शक्ल मिलती है। आर्ट असल में क्या है। यह क्रिएशन है। पेंटेड या फिर क्रिएटेड। ऐसी चीज जिसे आजतक किसी ने न देखा और न महसूस किया हो। बोले- कला की अभिव्यक्ति आंखों से होनी चाहिए। इंडिया में बहुत कम आर्टिस्ट हैं, जिनका अपना आर्ट स्टूडियो है।

स्टूडियोज वक्त के साथ कितने बदले हैं? इसके जवाब में प्रेम सिंह बोले- स्टूडियो नहीं बदलते हैं। बदली है तो सिर्फ इनकी गिनती। इनमें इजाफा हुआ है। पिछले 40 साल में इनकी महत्ता बढ़ी है। 1976 में दिल्ली ललित कला को जब लगा कि कला का स्तर बढ़ने लगा तो गाढ़ी आर्ट स्टूडियो बना। यह एक इंडिविजुअल कम्यूनिटी का स्टूडियो था, जिससे दिल्ली का आर्ट सीन बदला अौर यह अपने आप में लैंडमार्क बना। आर्ट एक कंटेम्पलेट एक्टिविटी है। जिस पर ध्यान देने की जरूरत होती है। इसके लिए एक स्पेस चाहिए होता है। तभी आपका ध्यान बनता है और आर्टिस्ट अपने अंदर की आवाज को सुन पाता है। स्टूडियो में आर्ट पर काम करने का मतलब यह है कि अपने अंदर की आवाजों को रंग रूप, रेखाओं को कैनवस पर अंकित करना।

Talk Session

ओपन हैंड आर्ट स्टूडियोज में आर्टिस्ट प्रेम सिंह के साथ स्टूडियोज की अहमियत पर टॉक सेशन रखा गया।

जरूरत इसलिए है स्टू्डियो की

प्रेम सिंह बताते हैं- स्टूडियो असल में एक इंस्पायर्ड स्पेस है। एक ऐसी जगह जिसमें कलाकार रचनात्मक तरीके से अपनी सोच को आकृति का रूप देता है। यह बिलकुल एक विंडो की तरह है। जिससे आर्टिस्ट अपनी दुनिया में झांक पाता है। यह एक ऐसी जगह है जहां पर आर्टिस्ट कैनवास पर उसकी मौजूदगी को चाहता है। इससे उसकी एकाग्रता बनती है। जैसे ही अपने स्टूडियो में एंटर करते हैं अपनी दुनिया में पहुंच जाते हैं। इससे होता यह है कि आपको खुद को ट्रांसफॉर्म करने को मिल जाता है। इससे इमेजिनेशन क्रिएटिव तरीके से निकलकर सामने आती है।

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