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अब जल्द ही आएगी मेरे 100 गीतों की किताब

विनय लक्ष्मी भटनागर बताती हैं कि बढ़ती उम्र के साथ उनकी संवेदनाएं अौर भावनाएं कागज पर उतरने लगीं थीं। पिता जी को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 02:05 AM IST

अब जल्द ही आएगी मेरे 100 गीतों की किताब
विनय लक्ष्मी भटनागर बताती हैं कि बढ़ती उम्र के साथ उनकी संवेदनाएं अौर भावनाएं कागज पर उतरने लगीं थीं। पिता जी को सुनाती को वे खुश होते। क्योंकि पिताजी आर्य समाज से संबंध रखते थे, इसलिए घर पर भी साहित्यकारों, गीतकारों और विद्वानों का आना जाना लगा रहता। पिता जी उन्हें भी मेरा लेखन दिखाते तो मुझे सराहना और प्रेरणा मिलती।

इस तरह मेरा मनोबल और बढ़ता गया और मैं लिखती गई। यह कहना है विनय लक्ष्मी भटनागर का। चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने इनकी पहली किताब- भावों का पंछी को अवॉर्ड दिया गया। इसमें हर गीत कोई न कोई संदेश देता है। जो मां-पिता, जीवन संघर्ष, सामाजिक, अध्यात्म, जीवन, प्रकृति आदि पर आधारित हैं। उन्होंने बताया- 44 साल वह हाई स्कूल में प्रिंसिपल रही हैं। हिंदी, अंग्रेजी, संगीत सब पढ़ाती आई हैं। पर 2015 में पति के स्वर्ग सिधार जाने के बाद उन्होंने मुज्जफरनगर स्थित अपने इस स्कूल को बंद कर दिया। पति के शोक में उनका लिखना गहरा होता गया। वह कवि सम्मेलनों में जाने लगीं। वहां भी जब उनके लेखन की प्रशंसा होती तो खुशी होती। कहा- जनवरी में जब उनकी इस किताब को अवॉर्ड के लिए चुना गया तो विश्वास हुआ कि निश्चित रूप से उनके गीत चयनकर्ताओं को पसंद आए होंगे। अब मेरे 100 गीत और तैयार हैं। किताब के रूप में इनका संग्रह भी जल्द ही छपकर आएगा।

चंडीगढ़ साहित्य अकादमी ने राइटर विनय लक्ष्मी भटनागर की पहली किताब- भावों का पंछी को अवॉर्ड दिया है।

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