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वापस होंगे 31 मार्च के बाद बढ़े रेट, पार्किंग का कॉन्ट्रैक्ट भी होगा रद्द

स्मार्ट पार्किंग के नाम पर 31 मार्च के बाद बढ़ाए गए रेट वापस होंगे और इन पार्किंग्स को मेंटेन करने का आर्या टोल...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

स्मार्ट पार्किंग के नाम पर 31 मार्च के बाद बढ़ाए गए रेट वापस होंगे और इन पार्किंग्स को मेंटेन करने का आर्या टोल इंफ्रा कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट कैंसिल होगा। पब्लिक इंटरेस्ट को देखते हुए सोमवार को नगर निगम हाउस ने यह एजेंडा पास किया है। अब इसे मंजूरी के लिए सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट को भेजा जाएगा। एजेंडा सेक्रेटरी को भेजने के लिए निगम कमिश्नर जितेंद्र यादव को अधिकृत किया गया है। निगम की ओर से एजेंडा भेजने और वहां से क्लीयरेंस में कम से कम एक हफ्ता लगेगा। यानी पब्लिक को तब तक पार्किंग की ज्यादा कीमत ही चुकानी होगी। पार्किंग को लेकर मेयर देवेश मोदगिल द्वारा गठित कमेटी की हाउस में रखी रिपोर्ट पर सोमवार को चर्चा के बाद यह फैसला हुआ। चर्चा के दौरान ज्यादातर पार्षदों ने बताया कि पार्किंग्स में तमाम खामियां हैं, यह किसी तरह से स्मार्ट नहीं हैं। ऐसे में लोगों को बढ़े हुए दाम चुभेंगे ही। राजबाला मलिक ने पार्किंग्स की चेकिंग का पर्सनल एक्सपीरियंस भी शेयर किया। नॉमिनेटेड काउंसलर सतप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि शहर की जनता ऐसे पार्किंग से परेशान है। गुरबख्श रावत ने पार्किंग्स में खराब सीसीटीवी की बात रखी। (विस्तृत पेज-3)

पार्किंग रेट डबल

पब्लिक को ट्रबल

सूद ने कहा- कंपनी कोर्ट चली जाएगी, कॉन्ट्रैक्ट रद्द नहीं कर सकते... अरुण सूद ने कहा कि पार्किंग केे लिए एमओयू की कंडीशंस हाउस में पास हुई हैं। इस पर कांग्रेस अब विरोध कर रही है, जबिक स्मार्ट पार्किंग मेजॉरिटी का फैसला है। तब केवल पांच काउंसलर्स ने ही विरोध किया था। पार्किंग से एमसी को 14.78 करोड़ आए हैं। यहां फाइनेंशियल क्राइसिस है। रेट वापस लिए गए तो कंपनी कोर्ट चली जाएगी।

मौजूदा रेट

मेयर का जवाब- हम भी कोर्ट जाएंगे, यहां ऐसे वकील हैं जो पीएम का केस भी लड़ चुके हैं इस पर मेयर ने कहा कि कंपनी कोर्ट चली जाएगी तो हम भी कोर्ट जाएंगे। यहां ऐसे वकील हैं जिन्होंने पीएम का केस भी लड़ा है। एक्ट 416 में भी प्रावधान है कि पब्लिक हित में टेंडर रद्द किया जा सकता है। (गैलरी में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्यपाल जैन मौजूद थे, जो पीएम के पक्ष में बनारस कंस्टीट्यूएंसी से संबंधित केस लड़ चुके हैं)

रेट कम होने पर

निगम हाउस में एजेंडा पास, हफ्तेे में सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट देंगे अप्रूवल, तब तक पार्किंग की ज्यादा कीमत ही चुकानी होगी

एक हफ्ता भी ज्यादा पैसे क्यों दे पब्लिक?

पार्किंग में कई खामियां हैं और हाउस में भी तय हो चुका है कि बढ़े हुए रेट वापस लिए जाएंगे। ऐसे में पब्लिक एक हफ्ते तक अव्यवस्थाओं से भरी पार्किंग के ज्यादा पैसे क्यों दे? ऐसे मौकों पर सरकार या प्रशासन सबसे पहले तत्कला प्रभाव से ज्यादा चार्जिंग पर रोक लगाती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। एक हफ्ते तक सेक्रेटरी लोकल गवर्नमेंट इस पर मंजूरी देंगे। तब तक कंपनी को कोर्ट जाने का भरपूर वक्त मिल जाएगा। ऐसे हालात तब हैं जब प्रशासक वीपी सिंह बदनोर खुद कह चुके हैं कि पार्किंग के रेट ज्यादा हैं, इसे वापस लिया जाना चाहिए।

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