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कभी कड़क चाय बनाने वाले लुका आज कड़क पंच लगाते हैं

गौरव मारवाह | चंडीगढ़/पंचकूला बॉक्सिंग के लिहाज से हरियाणा के भिवानी को मिनी क्यूबा कहा जाता है। यहां के बॉक्सर्स...

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:10 AM IST
गौरव मारवाह | चंडीगढ़/पंचकूला

बॉक्सिंग के लिहाज से हरियाणा के भिवानी को मिनी क्यूबा कहा जाता है। यहां के बॉक्सर्स ने ओलंपिक से लेकर कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल हासिल किए हैं। अब इसी मिनी क्यूबा के बॉक्सर राजेश कसाना उर्फ लुका ने डब्ल्यूबीसी वर्ल्ड यूथ लाइटवेट की चैंपियन बेल्ट हासिल की है। वे इस बेल्ट पर कब्जा करने वाले पहले भारतीय बॉक्सर हैं। लुका की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। दूसरे बॉक्सर जब रिंग में पंच लगाते थे तो लुका चाय की दुकान पर चाय बनाते थे। शनिवार को पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में लुका ने फिलीपींस के बॉक्सर को 3-0 से हराकर बेल्ट हासिल की।

राजेश कसाना ने चाय की दुकान चलाते-चलाते खुद को बनाया प्रोफेशनल बॉक्सर, पंचकूला में जीती डब्ल्यूबीसी वर्ल्ड यूथ लाइटवेट की बेल्ट

घर चलाने के लिए 2012 में खोली चाय की दुकान

लुका ने बॉक्सिंग की शुरुआत 2000 में की थी। गेम के लिए 12वीं के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी। 2012 में पिता का देहांत हुआ तो कुछ समय के लिए बॉक्सिंग छूट गई। घर चलाने के लिए भाई के साथ मिलकर चाय की दुकान खोली। आज भी उसी दुकान पर काम करते हैं। ये दुकान भिवानी में हालुवास गेट के पास है। 2014 में प्रोफेशनल बॉक्सिंग शुरू की।

बॉक्सिंग के लिए रोज साई सेंटर में 8 घंटे प्रैक्टिस

लुका भिवानी के साई सेंटर में ट्रेनिंग करते हैं। सुबह चार घंटे हार्ड ट्रेनिंग होती है। शाम को भी वह चार घंटे रिंग में लगाते हैं। लुका कहते हैं- कोच देवराज सिंह, दलवीर सिंह, दिनेश और अदनान ने ट्रेनिंग में मदद की है। इन्हीं कोचेज की बदौलत मैं यहां तक पहुंच सका हूं।


लुका ने कहा कि मैंने सभी की तरह एमैच्योर बॉक्सिंग में खुद को साबित करने की कोशिश की पर वहां किसी ने मेरा हाथ नहीं थामा। ओलंपियन बॉक्सर्स के साथ भी मैंने पंच लगाए और उन्हें चुनौती भी दी। जब मुझे वहां मौका नहीं मिला तो रॉयल स्पोर्ट्स प्रमाेशन्स के जय शेखावत ने मेरे टैलेंट को पहचाना और आगे आने का मौका दिया।

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