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नौकरी से ज्यादा स्टार्टअप पर हो जोर: प्रो. अनिल

इंजीनियर अगर काबिल है और उसे सब्जेक्ट की जानकारी है तो उसके लिए नौकरियों की कमी नहीं है। लेकिन समय की जरूरत है कि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

इंजीनियर अगर काबिल है और उसे सब्जेक्ट की जानकारी है तो उसके लिए नौकरियों की कमी नहीं है। लेकिन समय की जरूरत है कि नौकरी से ज्यादा स्टार्टअप पर जोर दिया जाए। यह कहना था ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे का। वह सोमवार को पंजाब यूनिवर्सिटी में इंडिया यूके इंडस्ट्री एकेडमी सिंपोजियम में मुख्य स्पीकर के तौर पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग में नौकरियां कम हुई हैं। सरकार या आईसीटी के लिए सभी को इन्कयूबेशन सेंटर के लिए पैसा देना संभव नहीं है लेकिन सबको अपने-अपने तौर पर यह काम करना होगा। यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन द्वारा दी गई ऑटोनॉमी के बाद एआईसीटीई के अधिकार पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि जो यूनिवर्सिटी ऑटोनॉमी के दायरे में आ गई हैं उनको कोई भी टेक्निकल कोर्स शुरू करते समय एआईसीटीई की अप्रूवल की जरूरत नहीं है। पंजाब यूनिवर्सिटी इनमें से एक है। उन्होंने कहा कि मूक की बेवसाइट के जरिए फैकल्टी को ट्रेंड करने का भी प्रयास होगा। आईआईटी के एक्सपर्ट टीचर्स के लेक्चर भी मूक पर मिलेंगे, जिनको किसी भी कॉलेज में बैठा टीचर या स्टूडेंट इस्तेमाल कर सकता है। उन्होंने कहा कि इससे एजुकेशन बेहतर होगी। इसके साथ ही 3 सप्ताह का एक प्रोग्राम शुरू किया जाएगा जिसमें एक फैकल्टी 25 स्टूडेंट्स की मेंटर करेगी इससे स्टूडेंट टीचर का संबंध मजबूत होगा। स्टूडेंट्स को विरोध प्रदर्शन की जरूरत ही नहीं रहेगी।

रिसर्च मार्केट तक पहुंचाने की इच्छा ही नहीं

रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग यूके ऑल डीएसटी पॉलिसी रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट सेंटर के सहयोग से हो रही गोष्ठी में एक्सपर्ट्स ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों में रिसर्च को बाजार पहुंचाने की इच्छा ही नहीं है। इसकी बड़ी वजह कहीं ना कहीं उनका आकलन रिसर्च पेपरों के जरिए करना है। ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू आयरे, रॉयल एकेडमी से प्रो. विलियम बेखम फ्रेंच और आईएसबी से डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव ने भी अपने विचार रखे।

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