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साइकिल शुरू करने का क्रेडिट लेने पर वाइस प्रेसिडेंट व जॉइंट सेक्रेटरी में होड़

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट काउंसिल (पीयू सीएससी) के वाइस प्रेसिडेंट करण सिंह और जॉइंट सेक्रेटरी करणवीर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:10 AM IST

पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट काउंसिल (पीयू सीएससी) के वाइस प्रेसिडेंट करण सिंह और जॉइंट सेक्रेटरी करणवीर सिंह रंधावा के बीच स्टूडेंट के लिए हाल ही में हुए कामों को लेकर क्रेडिट लेने का विवाद शुरू हो गया। यूनिवर्सिटी ने कैंपस में स्पेशली एबल्ड स्टूडेंट्स को ई-रिक्शा फ्री देने की योजना को पास किया है। जबकि सभी हॉस्टलों में शुरुआती तौर पर 15 -15 साइकिलें देने की योजना बनाई है। यह सुविधा उन स्टूडेंट के लिए होगी जो साइकिल का इस्तेमाल करना चाहते हैं। स्टूडेंट नेताओं का दावा है कि यह काम उनकी ओर से दिए गए मेमोरेंडम की वजह से हुए हैं। इसे लेकर दोनों के बीच सोशल मीडिया पर वाद विवाद भी शुरू हो गया। इससे पहले भी करण का सेक्रेटरी वाणी सूद के साथ विवाद हो गया था। उनकी एक कल्चरल नाइट और उसके बाद हास्य कवि सम्मेलन को आपसी विवाद के कारण रद्द कर दिया गया था।

एक का ये दावा... इंडियन स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के प्रेसिडेंट करण ने ई-रिक्शा के लिए अगस्त में हड़ताल की थी और साइकिल के लिए भी उन्होंने मेमोरेंडम दिया था। यूनिवर्सिटी कैंपस के एकेडमिक एरिया को व्हीकल फ्री जोन बनाने के लिए काफी लंबे समय से काम कर रही है। इसी के तहत साइकिल खरीदने के लिए करीब 17 लाख रुपए की रकम यूनिवर्सिटी के पास करीब 8 महीने से एक खास फंड में पड़ी है। हॉस्टल के लिए साइकिल इसी फंड में से खरीदी जानी है। हॉस्टल वाली योजना सफल होने के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में मामूली किराए पर साइकिल उपलब्ध कराएगी।

मेरे पास सबूत हैं

नेशनल पार्टी फायदा उठाने के लिए झूठे दावे कर रही है जबकि मेरे पास पूरे सबूत मौजूद हैं। बेशक साइकिल की योजना काफी पुरानी है लेकिन मेरे मेमोरेंडम के बाद ही इसमें फेरबदल करके हॉस्टलों को साइकिल देने वाली योजना के लिए डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन प्रो. मीनाक्षी मल्होत्रा वाली कमेटी का गठन किया गया था। -करणबीर सिंह रंधावा, जॉइंट सेक्रेटरी

वाइस प्रेसिडेंट करणवीर का दावा...

वाइस प्रेसिडेंट करण ने दावा किया है कि वह इस मामले का फॉलोअप लगातार कर रहे थे। उन्होंने करण के साथ तो एक जॉइंट मेमोरंडम दिया ही था। इसके बाद भी अपना एक अलग मेमोरेंडम दिया। वह लगातार पीयू के रजिस्ट्रार से भी इस मसले पर बात कर रहे थे। जिसके सुबूत एसएमएस के तौर पर उनके पास मौजूद हैं। वह करण के एफर्ट का भी सम्मान करते हैं। हो सकता है कि दोनों की साझा कोशिश से यूनिवर्सिटी अथॉरिटी पर दबाव पड़ा हो।

मैंने मेमोरेंडम सौंपा था

मैंने किसी का क्रेडिट लेने की कोशिश नहीं की। हो सकता है कि करणवीर रंधावा ने भी इसके लिए कोशिश की हो मैंने सिर्फ इतना कहा कि यह मेमोरंडम मैंने सौंपा था और इसको सफलता मिली है।

-करणवीर सिंह, वाइस प्रेसिडेंट

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