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चार साल की उम्र में पहली बार प्ले किया था सितार पर राष्ट्रीय गान

मेरे पिता एक नामी कलाकार हैं। छोटा था तो घर पर कई कलाकारों को आते देखा। पिता जी के पास स्टूडेंट्स सितार सीखने आते।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 13, 2018, 02:10 AM IST

चार साल की उम्र में पहली बार प्ले किया था सितार पर राष्ट्रीय गान
मेरे पिता एक नामी कलाकार हैं। छोटा था तो घर पर कई कलाकारों को आते देखा। पिता जी के पास स्टूडेंट्स सितार सीखने आते। इसी माहौल का असर मुझ पर भी हुआ और मैंने भी सोच लिया कि मुझे भी कलाकार बनना है। यह कहना है सितार वादक पंडित प्रतीक चौधरी, जो सितार वादक पद्मभूषण पंडित देबु चौधरी के बेटे हैं। टैगोर थिएटर में आयोजित प्राचीन कला केंद्र की 247वीं मासिक बैठक के अंतर्गत परफॉर्म करने पहुंचे तो इनसे बात हुई। प्रतीक ने बताया- सितार चुनने की एक वजह थी पिता का नाम और दूसरी वजह थी कि सितार एक वर्सेटाइल इंस्ट्रूमेंट है। मुझे इसकी साउंड व टोन पसंद बेहद पसंद है। इसलिए बचपन से ही इसे अपने हाथों में थामा और चार साल की उम्र में पहली परफॉर्मेंस दी। घर के पीछे एक स्कूल में मैंने उस वक्त सितार पर राष्ट्रीय गान- जन गण मन बजाया जिसे खूब सराहना मिली। इसके बाद मैं इस इंस्ट्रूमेंट को और प्यार करने लगा।

उन्होंने बताया- सितार सीखने के साथ-साथ उन्होंने काॅमर्स में ऑनर्स किया। उनके पिता और मां ने हमेशा सपोर्ट किया पर कभी ये प्रेशर नहीं दिया कि सितार ही बजाना है। हमेशा यही कहते कि संगीत के क्षेत्र में संघर्ष है। अगर इस संघर्ष के साथ लड़ने को तैयार हो, तो संगीत को अपना करिअर बनाना। प्रतीक सेनिया घराना से हैं। इनमें 17 परदे में सितार बजाया जाता है। अपने परिवार से वह इस परंपरा को कायम रखना चाहता थे। संगीत में डॉक्ट्रेट की डिग्री लेने के बाद उन्होंने न सिर्फ परफॉर्मर के तौर पर खुद को स्थापित किया, बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक प्रोफेसर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं।

प्राचीन कला केंद्र की 247वीं मासिक बैठक के अंतर्गत परफॉर्म करने पहुंचे सितार वादक पंडित प्रतीक चौधरी से बात।

सरकार दे स्कॉलरशिप

प्रतीक ने बताया- सितार को प्ले करना आसान नहीं। अंगुलियों पर कट्स लग रहे होते हैं, दर्द होता है पर लगता है कि ऑडियंस को आनंद आ जाए। अपने दर्द को भूलकर ऑडियंस को संगीत का हर संभव आनंद देने की कोशिश करते हैं। अब यंगस्टर्स सितार को सीख रहे हैं। लेकिन हमारी सरकार को आगे आकर शास्त्रीय संगीत को और प्रमोट करना चाहिए। उन्हें चाहिए कि यंगस्टर्स को स्कॉलरशिप दें ताकि वे प्रेरित होकर सितार सीखें।

यादगार परफॉर्मेंस

बात दस साल पहले की है। पिता जी के साथ जापान परफॉर्म करने गया। वहां लोगों ने कहा कि यहां बहुत दिन से बारिश नहीं हुई। कुछ ऐसा बजाओ कि बारिश हो जाए। हमने कहा- हम कोशिश करते हैं। हमने राग मियां मल्हार बजाना शुरू किया अभी थोड़ा ही बजाया था कि ऑर्गेनाइजर्स बाहर से भागे-भागे आए और बोले बाहर बारिश हो रही है, आपका धन्यवाद।

परफॉर्मेंस कुछ ऐसी

अपनी परफॉर्मेंस की शुरुआत उन्होंने राग मारवा से की, जिसमें आलाप के बाद मसीतखानी गत का सुंदर प्रदर्शन किया। इसके बाद राग बागेश्री में झपताल में निबद्ध बंदिश पेश की। एक ताल की बंदिश के बाद उन्होंने द्रुत तीन ताल की बंदिश और कार्यक्रम का समापन प्रतीक ने एक सुंदर धुन से किया। इसमें प्रसिद्ध भजन ‘जानकी नाथ सहाई करें जब’ पेश किया।

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