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शिष्य तो मिल ही जाएंगे, गुरु चुनने के लिए हुए ऑडिशंस

आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़ शहर में म्यूजिक और डांस को लेकर कई ऑडिशन होते रहते हैं। पर ये ऑडिशन थोड़ा अलग था।...

Danik Bhaskar | Jun 13, 2018, 02:10 AM IST
आरती एम अग्निहोत्री | चंडीगढ़

शहर में म्यूजिक और डांस को लेकर कई ऑडिशन होते रहते हैं। पर ये ऑडिशन थोड़ा अलग था। इसमें हिस्सा लेने आए सभी पार्टिसिपेंट्स 50 या इससे ज्यादा की उम्र के थे। माहौल की बात करें तो बिलकुल वैसा जैसे हम टीवी में देखते हैं। कंटेस्टेंट पहले अपने बारे में बताता, फिर परफॉर्म करता। इसके बाद जज अपनी डिमांड पर परफॉर्मेंस करवाते और फिर सवाल-जवाब का सिलसिला। सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक ये सिलसिला जारी रहा और चार राज्यों के 122 कलाकार इसमें हिस्सा लेने पहुंचे। दरअसल, लुप्त होती गुरु-शिष्य परंपरा और लोक कलाओं को प्रमोट करने के लिए अपनी स्कीम गुरु शिष्य के अंतर्गत नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला ने इन ऑडिशंस को मनीमाजरा स्थित कलाग्राम में आयोजित किया था। इससे लोगों को फाइनेंशियल मदद भी मिलेगी और आर्ट की प्रमोशन भी होगी। ये ऑडिशन गुरु चुनने के लिए किया गया था। इसलिए हर कंटेस्टेंट की नॉलेज को हर एंगल से परखा गया। नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला के डायरेक्टर प्रो. सौभाग्य वर्धन ने बताया- मर रही कलाओं को जीवित रखने के लिए इस परंपरा को शुरू किया गया। 10 साल से इसमें कोई काम नहीं हुआ। अब फिर से इसकी शुरुआत की गई। प्रो. सौभाग्य वर्धन ने बताया- एनजेडसीसी पटियाला के अंतर्गत आते सात राज्यों- जम्मू एंड कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, राजस्थान और उत्तरांचल की अखबारों में विज्ञापन दिया गया था। सात राज्यों से हमारे पास 320 आवेदन आए। इनमें फोक सिंगिंग, फोक डांस, विजुअल आर्ट्स, क्लासिकल आर्ट के कलाकार शामिल हैं। उन्होंने बताया- चंडीगढ़ में हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के लोग ऑडिशन देने आए। बाकी राज्यों के ऑडिशन अभी होने हैं।

गुरु शिष्य दोनों को मिलेगा स्टाइपेंड

सौभाग्य वर्धन ने बताया - गुरु चुने जाने वाले को हर महीने एनजेडसीसी द्वारा साढ़े सात हजार रुपए का स्टाइपेंड दिया जाएगा। साथ ही साढ़े तीन हजार रुपए अकंपनिस्ट को। एक गुरु के पास चार शिष्य होंगे। शिष्य को हर महीने डाई हजार रुपए दिए जाएंगे। बस शिष्य ब्लड रिलेशन में नहीं होना चाहिए। डांस में कहीं एक ही शिष्य अलग-अलग ग्रुप में तो नहीं, इसलिए शिष्य के आधार कार्ड अौर उसके परिवार का रजिस्ट्रेशन होगा। हर छह महीने में कलाग्राम में परफॉर्मेंस करवाई जाएगी। उसी आधार पर गुरु और शिष्य की कला की डेडीकेशन को देखकर उसे कंटीन्यू रखा जाएगा। ये स्कीम तीन साल तक चलेगी।

यह कहना है पार्टिसिपेंट्स का

 मैं बिजनेस करता हूं पर म्यूजिक का शौक है। बच्चों को भी मुफ्त में म्यूजिक सिखाता हूं। इन ऑडिशन के बारे में पता चला तो आ गया। ये सरकार की अच्छी कोशिश है। गुरु और शिष्य, दोनों के लिए फायदेमंद रहेगी।  अजय डोगरा, हिमाचल प्रदेश

बोले जज...

 ऑडिशन देने आए ज्यादातर लोग विज्ञापन देखकर यहां आ गए। इन्हें देखकर लगा कि कई बार काबिल लोगों को मौके नहीं मिलते। इस स्कीम से इन्हें व अन्य कलाकारों को फायदा मिलेगा।  डॉली गुलेरिया, फोक सिंगर

 साल 1983 से मैं पंजाब का फोक इंस्ट्रूमेंट बुगचो बजा रहा हूं। यंगस्टर्स को भी सिखाता हूं। ये एक अच्छा मौका है काबलियत दिखाने का। इससे मुझे भी थोड़ा फायदा हो जाएगा और लुप्त होती कला बच भी जाएगी।  मुरली खान, पंजाब

 विजुअल आर्ट के कम लोग थे पर मैंने ज्यादातर म्यूजिक के लोगों को सुना। पर जितना टैलेंट भी देखा वो बेहतरीन था। विरासत को सहेजने की ये अच्छी कोशिश है।  गुरमीत गोल्डी, पेंटर व स्कल्प्टरिस्ट