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पीजी कॉलेजों के प्रिंसिपल बाय डिफॉल्ट नहीं होंगे अकादमी काउंसिल के मेंबर्स

पीयू से एफिलिएटेड कॉलेजों में दो या दो से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट चलाने वाले कॉलेजों के प्रिंसिपल अब बाय डिफॉल्ट...

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 02:10 AM IST
पीजी कॉलेजों के प्रिंसिपल बाय डिफॉल्ट नहीं होंगे अकादमी काउंसिल के मेंबर्स
पीयू से एफिलिएटेड कॉलेजों में दो या दो से अधिक पोस्ट ग्रेजुएट चलाने वाले कॉलेजों के प्रिंसिपल अब बाय डिफॉल्ट एकेडमिक काउंसिल के मेंबर्स नहीं होंगे। पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म के लिए बनी जस्टिस बीबी प्रसून वाली कमेटी ने जो सिर्फ सिफारिशें की हैं, उसमें प्रिंसिपलों को अपने-आप मिलने वाली यह सुविधा अब नहीं मिलेगी। कमेटी की रिपोर्ट ना सिर्फ सीनेटरों के अधिकारों को कम करती है बल्कि एफिलिएटेड कॉलेजों की लॉबी का दबदबा भी कम करती है। इसमें रजिस्ट्रार और वीसी के कुछ अधिकार बढ़ा दिए हैं। हालांकि यह बदलाव मामूली है। अंडर ग्रेजुएट बोर्ड ऑफ स्टडीज में मेंबर्स की नियुक्ति का अधिकार वाइस चांसलर को दिया गया है। सिंडिकेट में पास हो चुके सिर्फ उन्हीं विषयों पर सीनेट में बहस हो सकेगी जिसकी इजाजत वाइस चांसलर देंगे। रजिस्ट्रार के पास सीनेट या सिंडिकेट का एजेंडा भेजने से कम से कम 2 दिन पहले पहुंचने वाले प्रस्ताव को ही मीटिंग में डिस्कशन के लिए जोड़ा जाएगा। वह भी लिखित में होना चाहिए। 23 जून को होने वाली मीटिंग के बाद इस कमेटी की रिपोर्ट पर कोई डिसीजन होगा। यूनिवर्सिटी के फाइनेंशियल क्रंच को लेकर चल रहे कोर्ट केस में अब गवर्नेंस रिफॉर्म भी एक हिस्सा हो गए हैं। ऐसे ही सीनेट से भी काफी सारे काम वापस ले लिए गए जो प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर पर ही हो जाएंगे। कमेटी ने डेढ़ साल में करीब 60 मीटिंगों के बाद यह रिपोर्ट तैयार की है।

एकेडमिक काउंसिल में अब लैंग्वेज लिटरेचर एंड फाइन आर्ट, सोशल साइंस, 9 बिजनेस मैनेजमेंट एंड कॉमर्स मेडिकल साइंस और इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डीन एक्स ऑफिशियो मेंबर्स होंगे। अभी तक इंजीनियरिंग और मेडिकल को यह सुविधा नहीं थी। एकेडमिक काउंसिल के इलेक्शन के लिए टीचरों के 11वीं 12वीं व विशेष कोर्सेज पढ़ाने की शर्त को खत्म कर दिया गया है। इसके बजाय एफिलिएटेड कॉलेज में 12 महीने तक पढ़ाने वाला कोई भी व्यक्ति इसके एलिजिबल होगा।


कमेटी ने फैकल्टीज की संख्या 11 से कम करके छह कर दी है। पहले लैंग्वेज, आर्ट्स, साइंस, लॉ, मेडिकल साइंसेस, बिजनेस मैनेजमेंट एंड कॉमर्स, इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, एजुकेशन, डेयरी एंड एनिमल हसबेंडरी एंड एग्रीकल्चर, डिजाइन एंड फाइन आर्ट्स और फार्मास्यूटिकल साइंसेस फैकल्टी थीं। अब लैंग्वेज लिटरेचर एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स, सोशल साइंसेज, साइंस, लॉ बिजनेस मैनेजमेंट एंड कॉमर्स, मेडिकल साइंसेज और इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी फैकल्टी रहेगी। इंजीनियरिंग फैकल्टी में ही फैकल्टी ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग को जोड़ दिया जाएगा। 2007 में सीनेट ने इसको पास किया था और 2008 से यह प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास गया हुआ है।






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