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टेंपर कर कोर्ट में लगाए इंस्पेक्टर दिलशेर के फर्जी बयान, दिलशेर ने कहा-एसएचओ रामरत्न के खिलाफ दर्ज हो केस

ड्रग्स और जाली करंसी को दबोचकर जालसाजी को बेनकाब कर थाना मलोया के पहले एसएचओ रहे इंस्पेक्टर रामरतन और उनकी टीम ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 12, 2018, 02:10 AM IST

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    ड्रग्स और जाली करंसी को दबोचकर जालसाजी को बेनकाब कर थाना मलोया के पहले एसएचओ रहे इंस्पेक्टर रामरतन और उनकी टीम ने जून 2016 में खूब वाहवाही ली थी। इंस्पेक्टर तरसेम राणा, हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट जतिन सलवान और अन्य लोगों को दूसरे को ड्रग्स के साथ पकड़वाने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अब कोर्ट में इस वाहवाही की पोल खुलती नजर आ रही है। जो चालान कोर्ट में इंस्पेक्टर रामर| की तरफ से दायर किया गया, उसमें फर्जी और टेंपर किए गए बयान लगाए गए हैं। इसकी पोल खुद यूटी पुलिस के ही इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह चंदेल ने खोल दी है। दिलशेर ने रामर| और एसआई धर्मसिंह पर साजिशन उनके फर्जी बयान तैयार करने, फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने, बयानों की कापियां टेंपर करने, कोर्ट में गलत व फर्जी डॉक्यूमेंट लगाने व कोर्ट को गुमराह करने की आईपीसी की धारा 420 /467/468/471/195/200/219 और 120 बी के तहत केस दर्ज करने की शिकायत दी है। एसएसपी ने जांच डीएसपी साउथ हरजीत कौर को दी है। हालांकि जांच के जरिए मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। 18 मई को दी गई शिकायत पर अभी इंवेस्टिगेशन जारी है।

    इंस्पेक्टर रामर|

    16 जून 2016 का मामला

    पुलिस के मुताबिक 16 जून 2016 को इंस्पेक्टर रामरतन ने तत्कालीन एसपी सिटी नवदीप बराड़ के पास आई एक गुप्त सूचना के आधार पर सेक्टर-38 वेस्ट के पास एक नीले रंग की कार पकड़ी। कार को चंडीगढ़ के बिजनेसमैन सुखबीर सिंह शेरगिल का अकाउंटेंट भगवान सिंह चला रहा था। कार में रखी फाइलों में पुलिस को 15 लाख की जाली करंसी और 2 किलो 600 ग्राम अफीम बरामद हुई। बाद में पुलिस ने कहा कि भगवान सिंह की कार में साजिशन यह ड्रग्स और जाली करंसी रखी गई। उसे फंसाने में यूटी पुलिस के तत्कालीन इंस्पेक्टर तरसेम सिंह राणा, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट जतिन सलवान और लुधियाना के बिजनेसमैन नरिंदर सिंह का रोल है। इन्होंने ही भगवान सिंह की कार में 15 लाख के नकली नोट और 2.600 किलो अफीम एक महिला के जरिए रखवाई। इसके बाद पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अपने अकाउंटेंट के अरेस्ट होते ही बिजनेसमैन शेरगिल ने पुलिस को शिकायत दी कि बड़ी साजिश के तहत पूर्व आईएएस अधिकारी गुरनिहाल सिंह पीरजादा और नरिंदर ने फंसाया है। वहीं, पुलिस की कहानी का हाईकोर्ट की पूरी बार एसोसिएशन ने विरोध किया। आरोप लगा कि पहले पुलिस ने इंस्पेक्टर तरसेम राणा को गवाह बनाकर उसकी 164 की स्टेटमेंट करवा दी। इसमें एडवोकेट जतिन सलवान पर आरोप लगवा दिए और फिर बाद में तरसेम राणा को भी गिरफ्तार कर लिया।

    दिलशेर के फर्जी बयान इसलिए लगाए गए, ताकि तरसेम की भूमिका स्पष्ट कर उसे सजा दिलवाई जाए

    जब इंस्पेक्टर दिलशेर चंदेल एसएचओ सेक्टर-39 थे तो 15 जून 2016 को इंस्पेक्टर तरसेम राणा का दिलशेर को फोन आया। कहा कि वह उसे कल ड्रग्स पैडलिंग की सूचना देगा। अगले ही दिन तरसेम का दिलशेर को फोन आया और एक कार का नंबर देकर कहा कि कार उसके एरिया सेक्टर-40 में आएगी। इसमें ड्रग्स है। उस समय इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह पीजीआई में ट्रीटमेंट करवाने गए हुए थे। उन्होंने कहा कि वह ट्रैप नहीं लगा सकता, इसलिए इन्फॉर्मेशन क्राइम ब्रांच या किसी दूसरी एजेंसी को दे दें। तरसेम ने उस समय के क्राइम ब्रांच इंचार्ज इंस्पेक्टर गुरमुख को इन्फॉर्मेशन दे दी। लेकिन क्राइम ब्रांच के पहुंचने से पहले ही इंस्पेक्टर रामर| ने कार समेत भगवान दास को दबोच लिया। आरोप है कि इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह के इसलिए फर्जी बयान कोर्ट में लगाए गए, ताकि तरसेम की भूमिका को स्पष्ट कर उसे सजा दिलवाई जाए। कोर्ट में जो रिश्वत की पेशकश संबंधी बयान लगाए गए हैं कि तरसेम ने इंस्पेक्टर दिलशेर को पैसे की पेशकश की थी। उससे दिलशेर नाराज हो गए, चूंकि कानूनन अगर सच में ऐसा होता तो उन्हें तुरंत तरसेम पर केस दर्ज करना होता। और न करने पर उनके खिलाफ भी एक्शन बनता था, इसलिए पुलिस अपनी चाल में फंस गई।

    बिजनेसमैन के अकाउंटेंट को जाली करंसी और अफीम के साथ पकड़ा था रामर| ने

    चंदेल बोले-मैंने तो बयान ही नहीं दिए

    चार्जशीट में इंस्पेक्टर रामर| ने इंस्पेक्टर दिलशेर सिंह चंदेल के सीआरपीसी की धारा 161 के बयान दर्ज किए, जो एसआई धर्मसिंह ने लिखे। जबकि दिलशेर सिंह ने एसएसपी निलांबरी विजय जगदाले को शिकायत दी है कि उसके कभी बयान दर्ज ही नहीं हुए। इसके अलावा जो असल बयान की काॅपी पुलिस ने अपने रिकाॅर्ड में रखी और जो कोर्ट में बयानों की कॉपी लगाई, वह भी अलग है। दिलशेर सिंह ने बयानों की काॅपियां भी साथ लगाई, जोकि आरटीआई से हासिल की गई हैं। इसमें साफ खुलासा होता है कि बयान टेंपर किए गए हैं।

    बयानों की तीन कॉपियां बनती हैं, तीनों में ही अलग-अलग फैक्ट...हाेने चाहिए थे सेम

    सीआरपीसी की धारा 161 के तहत लिए गए बयानों में बयान लिखने वाले के साइन होते हैं, बयान देने वाले के नहीं। जबकि 161 के जो बयान दर्ज होते हैं, उसकी तीन कॉपी होती है, जिसमें दो कार्बन कापी होती है। एक बयान पुलिस फाइल में, दूसरा ज्यूडीशियल फाइल में और तीसरा पुलिस फाइल में। यानि तीनों में एक ही बयान होने चाहिए। लेकिन आरोपियों के खिलाफ केस मजबूत करने और इंस्पेक्टर दिलशेर चंदेल को विवादों में फंसाने के लिए चाल रची गई। बिना इंस्पेक्टर को बुलाए मनगढ़ंत बयान लिखे गए। तीनों की कार्बन काॅपी ही आपस में मेल नहीं खाती। जिला अदालत के एडिश्नल सेशंस जज अश्वनी कुमार मेहता की कोर्ट में जो बयान की काॅपी लगाई गई, वह एसएसपी के बीआरके यानि बर्नाकुल रिकाॅर्ड कीपर ब्रांच में मौजूद असल बयानों से भी मेल नहीं खाती। यानि साफ है कि कार्बन काॅपी तक टेंपर करके बयान लिखे गए और सारा मामला बदला गया।



    38 शब्द मेल नहीं खाते... चार्जशीट में जो इंस्पेक्टर चंदेल के बयान लगाए गए और जो पुलिस की बीआरके ब्रांच में बयान हैं वे अलग-अलग हैं। 2 पेज के बयानों में 38 शब्द आपस में मेल नहीं खाते। जीवनी रिपोर्ट में कागजों का नंबर तक अलग है। कोर्ट में दायर बयान की काॅपी में यहां तक लिखा है कि तरसेम ने 15 जून 2016 को जो चंदेल को फोन किया था। कहा था कि वह ड्रग्स और जाली करंसी समेत भगवान सिंह को कार समेत दबोचे। इसके लिए वह उसकी सेवा पानी भी करेगा, यानि रिश्वत देगा। जबकि पुलिस फाइल में दर्ज बयानों में इस रिश्वत की पेशकश का जिक्र तक नहीं है। सूत्रों की मानें तो जिस एसआई धर्मसिंह द्वारा लिखे बयान कोर्ट में लगाए गए हैं, वह हैंडराइटिंग उसकी है ही नहीं। एसआई ने अफसरों को भी इसकी जानकारी दे दी है। कहा है कि वह तो पंजाबी में ही बयान दर्ज करता है। यह बयान हिंदी में है।

    इन्वेस्टिगेशन जारी है...

    हां, इंस्पेक्टर दिलशेर की शिकायत पर मैं जांच कर रही हूं। अभी इन्वेस्टिगेशन जारी है और पूरी केस फाइल को जांचा जा रहा है। इससे ज्यादा नहीं बता सकती।

    -हरजीत कौर, डीएसपी साउथ



    अभी तक मेरे खिलाफ हुई किसी शिकायत की जानकारी नहीं है और न ही अभी तक किसी इंवेस्टिगेशन में मुझे शामिल किया गया है। अब किसने क्यों और क्या शिकायत दी। मुझे नहीं पता।

    -रामर|, इंस्पेक्टर, सांरगपुर थाना



    मेरे खिलाफ जो साजिश हुई, उसकी शिकायत अफसरों से कर दी है। मैं ज्यादा कुछ बताना नहीं चाहता।

    -दिलशेर सिंह चंदेल, इंस्पेक्टर



    मैंने नहीं कुछ कहना। अफसरों काे सब पता है।

    -धर्मसिंह, एसआई

    शेरगिल-पीरजादा में है पुराना डिस्प्यूट...

    बिजनेसमैन शेरगिल का पूर्व आईएएस गुरनिहाल सिंह पीरजादा से पैसों और प्रॉपर्टी का काफी पुराना विवाद है। शेरगिल ने पंजाब इंफोटेक के अफसरों के खिलाफ साजिशन उनकी प्रॉपर्टी कब्जाने का केस कोर्ट में दायर कर रखा है। इसमें कहा है कि उनकी करोड़ों की प्रॉपर्टी नरिंदर के कहने पर पंजाब इंफोटेक के अफसरों ने मॉर्टगेज कर ली। आधार बनाया कि 1978 से उनका और प|ी का बकाया है। जबकि शेरगिल की शादी 1986 में हुई और प्रॉपर्टी उन्होंने 2000 में ली थी।

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