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कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले 42.5 परसेंट लोग डिप्रेशन के शिकार

अमावस्या पर्व के उपलक्ष्य पर आर्य समाज, सेक्टर-20 में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के बाद आचार्य अशोक पाल ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 03:05 AM IST

अमावस्या पर्व के उपलक्ष्य पर आर्य समाज, सेक्टर-20 में विशेष यज्ञ का आयोजन किया गया। यज्ञ के बाद आचार्य अशोक पाल ने प्रवचन दिए कि विश्व में मानसिक अवसाद महामारी का रूप धारण कर चुका है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 2015 में भारत में 5 करोड़ 66 लाख से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार थे। जो भारत की कुल जनसंख्या का 4.5% है। 36% भारतीय लोगों को उनके जीवन में कभी न कभी डिप्रेशन हुआ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि काॅर्पोरेट सेक्टर में काम करने वाले 42.5% लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। आत्महत्या करने की एक बड़ी वजह डिप्रेशन ही है। हमारे देश में डिप्रेशन के शिकार लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। पूरी दुनिया में हर वर्ष करीब 7 लाख 88 हज़ार लोग आत्महत्या करते हैं। इनमें से लगभग हर छठा इंसान भारतीय होता है। भारत में 2011 से 2015 तक 5 वर्षों में कुल 6 लाख 71 हज़ार 118 लोगों ने आत्महत्या की थी। इस आत्महत्या के पीछे पारिवारिक कारण थे या किसी निजी कारण की वजह से उन्होंने आत्महत्या की। लेकिन हमारा विश्लेषण यहां से शुरू होगा हम आर्यों को विचारना होगा कि क्या भय्यू जी महाराज जैसे लोगों को आत्महत्या करने से रोका जा सकता है। इस पर विश्लेषण केंद्रित करना होगा कि एक तथाकथित आध्यात्मिक गुरु का जीवन से मोहभंग क्यों हुआ?

वैदिक जीवन ही सुख का आधार: आचार्य अशोक पाल

आचार्य अशोक पाल ने कहा कि समाज जितना वेदों से दूर हो रहा है, रोग ग्रस्त हो रहा है। वेद ईश्वर द्वारा दिया अनूपम उपहार है, जो विशिष्ट जीवन शैली सिखाता है। हम सब वेदों की और लौटें, बहुत दुख उठा लिए हैं। अब तो संभलें। वैदिक जीवन ही सुख का आधार है। सुबह जल्दी उठें, उपासना करें, सुख-दुख बांटें, सर्वस्व ईश्वर को अर्पण कर परोपकार करें। दिखावे से बचें, आर्य अर्थात श्रेष्ठ समाजिक प्राणी बनें।

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