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पीस के लिए सबसे पहले जरूरी है पॉजिटिविटी

यूथ को यह समझना चाहिए कि पीस के लिए सबसे पहले जरूरी है पॉजिटिविटी। अगर माहौल पॉजिटिव मिलेगा तो माइंड भी सही रहेगा।...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:05 AM IST
पीस के लिए सबसे पहले जरूरी है पॉजिटिविटी
यूथ को यह समझना चाहिए कि पीस के लिए सबसे पहले जरूरी है पॉजिटिविटी। अगर माहौल पॉजिटिव मिलेगा तो माइंड भी सही रहेगा। साथ ही एक ऐसी एनर्जी मिलेगी जो पीस से भरी होगी। जब शरीर के अंदर और बाहर पीसफुल माहौल मिलेगा तो ऐसे में आस- पास और देश में भी पीस ही होगी। अगर यूथ नेगेटिविटी की ओर चला जाए तो न घर में, न देश में और न ही विश्व स्तर पर पीस कायम हो सकती है।

ऑथर एंड मोटिवेशनल स्पीकर विवेक अत्रेय ऐसा ही बोले। दरअसल सोमवार को सेक्टर-30 के बाबा मख्खन शाह लुबाना भवन में सिम्पोजियम हुआ। जिसे एनजीओ भारत सोका गाक्काई की ओर से करवाया गया। यह सिम्पोजियम एसजीआई प्रेसिडेंट दाईसाकू इकेदा के 2018 पीस प्रपोजल पर आधारित रहा। जिसका टाइटल टूवर्ड एन एरा ऑफ ह्यूमन राइट्स: बिल्डिंग ए पीपल्स मूवमेंट रहा। इसमें तीन स्पीकर्स ने अपने विचार इस प्रपोजल और अपने अनुभवों के अनुसार रखे। सबसे पहले विवेक अत्रेय स्टेज पर आए। वह बोले- यूथ को पीस से मैंने इसलिए जोड़ा है क्योंकि आने वाला भविष्य वही है। इसके अलावा यूथ को महिलाओं का सम्मान करना आना चाहिए।

सेक्टर-30 के बाबा मख्खन शाह लुबाना भवन में सिम्पोजियम में ऑथर एंड मोटिवेशनल स्पीकर विवेक अत्रेय बोले-

महिलाओं के बिना नहीं कर सकते कल्पना

स्पीकर नवराज संधू जो गवर्नमेंट ऑफ हरियाणा में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हैं, ने न केवल पीस पर बात की बल्कि वुमन राइट्स और इम्पावरमेंट के बारे में भी बात की। वह बोली- पीस की बात करें तो बिना महिलाओं काे समान अधिकार दिए इसकी कल्पना भी नहीं की जाती। उदाहरण के लिए पीस एक पक्षी है। उसे उड़ान भरनी है। एक पंख आदमी है तो दूसरा औरत। यानि दोनों को जब समानता मिलेंगी तो ही एक पीस रहेगी। एक पंख से तो कोई भी पक्षी उड़ान नहीं भरता।

ऐसे विषय जो एक देश से नहीं हर देश से जुड़े हैं

एनजीओ और इस सिम्पोजियम के बारे में भारत सोका गाक्काई के चेयरपर्सन विशेष गुप्ता ने बताया कि यह जापान की संस्था है और इसकी ब्रांचेज 192 कंट्री में हैं। मैं इससे 28 साल से जुड़ा हूं। कुछ कंट्री में यह सिम्पोजियम हर साल होता है। विषय हर बार अलग होते हैं जो दाईसाकू इकेदा ही देते हैं। यह विषय एक देश से नहीं बल्कि हर देश से जुड़ा होता है। जैसे पीस, पर्यावरण और ह्यूमन राइट्स आदि। विश्वस्तर पर इन विषयों को प्रपोजल का रूप देकर सिम्पोजियमम करवाने का मकसद यही है कि सबको ऐसा प्लेटफॉर्म दिया जाए, जिसमें न केवल इन विषयों पर चर्चा की जाए बल्कि सभी अपना योगदान दें।

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