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बाबा जेल में, बाहर सोशल मीडिया पर फॉलोअर की तलाश

जोधपुर कोर्ट ने हाल ही में आसाराम को उम्र कैद की सजा दी, जिसके बाद से वह जेल में कैदी की तरह रहता है। आसाराम की एक...

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:05 AM IST
बाबा जेल में, बाहर सोशल मीडिया पर फॉलोअर की तलाश
जोधपुर कोर्ट ने हाल ही में आसाराम को उम्र कैद की सजा दी, जिसके बाद से वह जेल में कैदी की तरह रहता है। आसाराम की एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद उसे फटकार भी लगी। सिर्फ आसाराम ही नहीं हरियाणा में राम रहीम और रामपाल जैसे बाबाओं का भी सोशल मीडिया से लिंक बहुत पुराना है, जो समय और जरूरत अनुसार बढ़ता जा रहा है। बाबा जब जेल से बाहर थे, तो खुद सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते थे। अब जेल के अंदर है, तो अपना वजूद बचाए रखने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। तीनों का सोशल मीडिया पर लोगों को जोड़ने का एक बड़ा अभियान लगातार चल रहा है। भले ही कोर्ट ने दोषी करार दे दिया हो, लेकिन इनकी सोशल मीडिया टीम लगातार पाक साफ बताने के प्रयास में लगी रहती है।

बाबाओं को डर सता रहा है कि कहीं उनके जेल जाने के बाद उनके भक्त यानी फॉलोअर बिखर न जाएं, इसलिए उन्हें एकजुट रखने के प्रयास हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर यूथ से लेकर अन्य वर्गों का भी एक बड़ा हिस्सा आज जुड़ा हुआ है। इसलिए बाबा लगातार इसको अपना हथियार बनाकर प्रयोग कर रहे हैं।

दीवानगी से ट्रेंड तक

हरियाणा के बाबा जो अभी जेल में हैं, उनमें से एक की आईटी टीम के सदस्य ने बताया कि इस काम के लिए बड़े आईटी विशेषज्ञ रखे गए हैं। जिन्हें भारी भरकम सेलरी दी जाती है। इनका काम है कि हर रोज के फेमस ट्विट, पोस्ट या ट्रेंड को फॉलो करके उसमें अपनी पोस्ट या कमेंट डालना। इसके अतिरिक्त अलग-अलग नामों #बापूजी निद्रोष हैं, जैसे हैशटैग चलाकर उन्हें रिहा किए जाने की मांग करते रहते हैं।

हाल ही में आसाराम को सजा के समय इस तरह के काफी प्रयास सोशल मीडिया पर किए गए। इससे पहले कुछ यही हाल रामपाल, राम रहीम और ऐसे तमाम तथाकथित बाबाओं के समर्थकों का रहा है। भक्तों की दीवानगी ऐसी है कि आईटी टीम एक ट्रेंड शुरू करके केवल शुरुआत करती है, इसके बाद खुद को भक्त कहने वाले युवा उसमें इतनी पोस्ट करते हैं कि वह उस दिन ट्रेंड करती है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के सामने आती है।

प्रदेश में दो बाबा राम रहीम और रामपाल काट रहे जेल तो राजस्थान में आसाराम, सेलिब्रिटी, सीएम और पीएम की पोस्ट का ले रहे सहारा

दिमाग पर करते हैं असर, पीढ़ियां बंध जाती मोहपाश में

मनोवैज्ञानिक प्रेम कुमार के अनुसार अभावों में जीते लोगों के लिए भगवान जैसा कॉन्सेप्ट अंतिम सहारा जैसा होता है। इसलिए ये इस तरह के लोगों के दिमाग पर वार करते हैं, जिससे उन्हें अपनी तरफ आकर्षित कर सकें। समाज में फैले जातिगत भेदभाव, ऊंच-नीच व अमीरी-गरीबी का फर्क लोगों को बाबाओं की शरण में जाने को मजबूर कर देता है।

शहीदों के आश्रित को नौकरी में बेहतर विकल्प देगी सरकार

चंडीगढ़|जवानों की शहादत के बाद उनके आश्रितों को नौकरी देने के नियमों में भाजपा सरकार फेरबदल करने की तैयारी कर रही है।

शहीद के परिवार में बेटा, बेटी प|ी को नौकरी देने का प्रावधान है, जबकि शहीद की विवाहित बेटी और अविवाहित शहीद के मामले में आश्रित परिवार में भाई और बहन को भी नौकरी दिए जाने का विकल्प दिया जाएगा, ताकि तकनीकी अड़चन दूर करते हुए उनको मान-सम्मान दिया जा सके। हरियाणा में शहीद परिवार तथा पूर्व सैनिकों को बेहतर सहयोग करने की दिशा में कदम उठा रही भाजपा सरकार जल्द ही शहीद के आश्रित को नौकरी के मामले में सामने आ रही तकनीकी अड़चन को दूर करने में जुट गई है।

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