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अपनी बात दृढ़ता से रखना क्रोध-अपशब्द नहीं: योगेश्वर खेमका का जवाब-अपनी बात रखिए पर मर्यादा के साथ

हरियाणा सरकार द्वारा प्रोफेशन गेम्स व विज्ञापन करने वाले खिलाड़ियों की कमाई में सरकार की हिस्सेदारी लेने के आदेश...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 10, 2018, 03:05 AM IST

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खेमका का जवाब-अपनी बात रखिए पर मर्यादा के साथ
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    हरियाणा सरकार द्वारा प्रोफेशन गेम्स व विज्ञापन करने वाले खिलाड़ियों की कमाई में सरकार की हिस्सेदारी लेने के आदेश पर खड़े हुए विवाद के बाद पहलवान योगेश्वर दत्त और खेल विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने शनिवार को फिर एक के बाद एक ट्वीट किए। इस पर अशोक खेमका भी चुप नहीं बैठे और उन्होंने जवाबी ट्वीट करते हुए योगेश्वर को मर्यादित भाषा में विरोध करने की सलाह दी।

    उल्लेखनीय है कि सरकार ने शुक्रवार को आदेश दिए थे कि सरकारी नौकरी करने वाले खिलाड़ी यदि वे किसी प्रोफेशनल खेल मेें हिस्सा लेते हैं या विज्ञापन करते हैं तो उसकी कमाई का 33% हिस्सा खेल परिषद को देना होगा। खेल विभाग का नोटिफिकेशन सर्कुलेट होने पर सरकारी नौकरी में शामिल रेसलर योगेश्वर दत्त, बबीता फौगाट और सुशील कुमार जैसे खिलाड़ियों ने विरोध किया। अंतत: देर शाम सीएम मनोहर लाल ने ट्वीट कर फैसले को फिलहाल रोक दिया है।

    सरकार की किरकरी होने के बाद सीएम मनोहर लाल खट्‌टर ने कहा था कि हमें अपने खिलाड़ियों के योगदान पर गर्व है। भरोसा दिलाते हैं कि उनकी राय सुनी जाएगी। खट्टर ने फैसले से जुड़ी नोटिफिकेशन फाइल मंगाई है, तािक खिलािड़यों की भी राय ली जा सके। इस मामले में शुक्रवार को खेल मंत्री ने आदेशाें का समर्थन किया था। वहीं, खिलाड़ियों ने इस पर विरोध जताया था।

    पहलवान योगेश्वर और प्रधान सचिव खेमका आमने-सामने

    पलायन को आप जिम्मेदार: योगेश्वर

    ऐसे अफसर से राम बचाए, जब से खेल विभाग में आए हैं, तब से बिना सिर -पैर के तुगलकी फरमान जारी किए जा रहे हैं। हरियाणा के खेल-विकास में आपका योगदान शून्य है किंतु ये दावा है मेरा इसके पतन में आप शत प्रतिशत सफल हो रहे हैं। अब हरियाणा के नए खिलाड़ी बाहर पलायन करेंगे और साहब आप जिम्मेदार।

    जिन खिलाड़ियों पर असर पड़ा, उन्हें पता भी नहीं : योगेश्वर का दोबारा ट्वीटः मीडिया के माध्यम से आज ये नोटिफिकेशन सामने आया है, तब जा कर तो उन खिलाड़ियों को पता चला। जिनपर इसका प्रभाव पड़ेगा। इतना बड़ा बदलाव और किसी को खबर भी नहीं। खेल के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों से विचार-विमर्श भी किया जा सकता था। अपनी बात-विचार दृढ़ता से रखना क्रोध-अपशब्द नहीं होता।

    खेल में शिष्टता शोभित: खेमका

    खेल एवं पुलिस दोनों में शिष्टता शोभित है। इस अधिसूचना के पहले वाणिज्यिक विज्ञापन या व्यवसायिक खेल सरकारी कर्मचारी के लिए निषिद्ध था। आपका क्रोध एवं अपशब्द दोनों ठीक नहीं। 48 दिनों के विलंब के बाद अभी अचानक यह आक्रमक प्रतिक्रिया क्यों?

    जवाबी ट्वीट- कॉमर्शियल विज्ञापन सरकारी कर्मचारियों के लिए निषिद : आपको जानकारी होगी कि कामर्शियल विज्ञापन एवं वाणिज्यिक खेल सरकारी कर्मचारियों के लिए निषिद्ध है। अपनी बात रखिए, लेकिन मर्यादा के साथ।

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