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कोई ब्लैकमेल कर एफिडेविट वापस लेने को नहीं कह सकता, पावर छिनने से कोई फर्क नहीं पड़ता: वीसी

चंडीगढ़ | पीयू के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर और सिंडीकेट मेंबर्स के बीच चल रहे विवाद के कारण सिंडिकेट ने अपने अधिकार जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 03:10 AM IST

कोई ब्लैकमेल कर एफिडेविट वापस लेने को नहीं कह सकता, पावर छिनने से कोई फर्क नहीं पड़ता: वीसी
चंडीगढ़ | पीयू के वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर और सिंडीकेट मेंबर्स के बीच चल रहे विवाद के कारण सिंडिकेट ने अपने अधिकार जो उन्हें दिए थे, वे वापस ले लिए। वीसी का कहना है कि कोई भी ब्लैकमेल करके उन्हें एफिडेविट वापस लेने के लिए नहीं कह सकता। वह भी लोकतांत्रिक देश के वासी हैं और उनकी आवाज दबाना संभव नहीं है। सिंडीकेट ही नहीं सीनेट भी चाहे तो अपनी पावर्स वापस ले सकती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। पीएचडी वाइवा का गाइड तय करने, एक्सटेंशन देने जैसे काम यदि वह नहीं करेंेगे तो यूनिवर्सिटी बंद नहीं होगी। यूं भी किसी को आपत्ति थी तो वह एफिडेविट के खिलाफ अपना एफिडेविट सब्मिट कर सकता है। पहले सीनेटर तीन फैकल्टी के मंेबर थे और बाद में चार का बनाया जाने लगा। सीनेटर कभी कंबाइंड, कभी लंैंग्वेज ताे कभी मेडिकल फैकल्टीज से चुनाव लड़कर, जोड़-तोड़ करके जीतते रहे हैं। उन्होंने एफिडेविट में जो कुछ भी लिखा, उस सच से सभी वाकिफ हैं। मेंबर्स को कोई शिकायत थी तो वह उस व्यक्ति के पास जाते जिसने वीसी को सलेक्ट किया है। वह कार्रवाई करते, ब्लैकमेल करने का क्या अर्थ है।

विरोधी होने पर बोले- पीयू का माहौल ही ऐसा

वीसी से जब पूछा गया कि वे लोग जो उनके साथ होते थे, अब विरोध में क्यों हैं। इस पर उन्होंने कहा कि पीयू का माहौल ही ऐसा है। वह तो जीके चतरथ और अशोक गोयल को भी कह चुके हैं कि आप लोगों के साथ खड़े होना मजबूरी है, क्योंकि ऐसा ना करने पर आप यूनिवर्सिटी नहीं चलने देंगे। यह बात सिंडिकेट की प्रोसिडिंग में दर्ज है।

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