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व्हीकल्स के कारण चंडीगढ़ की हवा खराब, 10 साल में गाड़ियां 64% बढ़ीं

चंडीगढ़ की हवा खराब करने में गाड़ियों की बढ़ती संख्या मेजर पार्ट है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 10...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 03:10 AM IST

व्हीकल्स के कारण चंडीगढ़ की हवा खराब, 10 साल में गाड़ियां 64% बढ़ीं
चंडीगढ़ की हवा खराब करने में गाड़ियों की बढ़ती संख्या मेजर पार्ट है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 10 साल में चंडीगढ़ में गाड़ियों की संख्या में 64% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब ये है कि करीब हर महीने एवरेज 3 हजार गाड़ियां नई रजिस्टर्ड हो रही हैं।

बुधवार को आईटी पार्क में एयर क्वालिटी को लेकर हुई पहली कॉन्फ्रेंस में इसी तरह के फैक्ट्स रखे गए। चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन के एन्वायर्नमेंट डिपार्टमेंट और क्लीन एयर एशिया एजेंसी की तरफ से ये कॉन्फ्रेंस एयर पॉल्यूशन को लेकर ही करवाई।

इसमें होम कम सेक्रेटरी एन्वायर्नमेंट अनुराग अग्रवाल भी पहुंचे। इसके अलावा डायरेक्टर एन्वायर्नमेंट संतोष कुमार, सीपीसीसी मेंबर सेक्रेटरी टीसी नोटियाल और पंजाब और हरियाणा से अफसरों ने हिस्सा लिया। कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की तरफ से प्रेजेंटेशन दिखाई गई। जिसमें बताया गया कि पिछले 10 साल में गाड़ियों की संख्या बढ़ी तो इसके साथ ही चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन का ट्रेंड भी परमिशेबल लिमिट से ज्यादा चला गया। अब हालत ये है कि पर्टिकुलेट मैटर्स (पीएम)10 और 2.5 का लेवल परमिशेबल लिमिट से ही ज्यादा चंडीगढ़ का है।

एक्शन प्लान बनाओ, टाइम बाउंड इंप्लीमेंटेशन जरूरी...

क्लीन एयर एशिया एजेंसी देहरादून और भुवनेश्वर में काम कर रही है और प्रशासन भी इसी एजेंसी से टेक्निकल स्पोर्ट लेगा। चंडीगढ़ की हवा ठीक करने के लिए एक्शन प्लान तैयार करेगा। होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने कहा कि टाइम बाउंड इस पर काम होना चाहिए। क्योंकि चंडीगढ़ रहने के लिए सबसे अच्छी जगह है। ये अच्छी ही रहे इसके लिए जरूरी है कि एयर क्वालिटी जो खासतौर से सर्दियों में वेरी पुअर कैटेगरी तक पहुंच गई थी उसको लेकर काम करें। यहां पर डायरेक्टर एन्वायर्नमेंट संतोष कुमार ने कहा कि बिना साथ लगते एरिया में भी एयर पॉल्युशन को रोकने के लिए काम होने के चंडीगढ़ में फर्क नहीं पड़ेगा।

सिटी रिपोर्टर | चंडीगढ़

चंडीगढ़ की हवा खराब करने में गाड़ियों की बढ़ती संख्या मेजर पार्ट है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 10 साल में चंडीगढ़ में गाड़ियों की संख्या में 64% की बढ़ोतरी हुई है। इसका मतलब ये है कि करीब हर महीने एवरेज 3 हजार गाड़ियां नई रजिस्टर्ड हो रही हैं।

बुधवार को आईटी पार्क में एयर क्वालिटी को लेकर हुई पहली कॉन्फ्रेंस में इसी तरह के फैक्ट्स रखे गए। चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन के एन्वायर्नमेंट डिपार्टमेंट और क्लीन एयर एशिया एजेंसी की तरफ से ये कॉन्फ्रेंस एयर पॉल्यूशन को लेकर ही करवाई।

इसमें होम कम सेक्रेटरी एन्वायर्नमेंट अनुराग अग्रवाल भी पहुंचे। इसके अलावा डायरेक्टर एन्वायर्नमेंट संतोष कुमार, सीपीसीसी मेंबर सेक्रेटरी टीसी नोटियाल और पंजाब और हरियाणा से अफसरों ने हिस्सा लिया। कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी की तरफ से प्रेजेंटेशन दिखाई गई। जिसमें बताया गया कि पिछले 10 साल में गाड़ियों की संख्या बढ़ी तो इसके साथ ही चंडीगढ़ में एयर पॉल्यूशन का ट्रेंड भी परमिशेबल लिमिट से ज्यादा चला गया। अब हालत ये है कि पर्टिकुलेट मैटर्स (पीएम)10 और 2.5 का लेवल परमिशेबल लिमिट से ही ज्यादा चंडीगढ़ का है।

एक्सपर्ट्स ने कहा- चंडीगढ़ के लोगों के लंग्स क्या बाकियों से अलग हैं

यहां कॉन्फ्रेंस में हेल्थ स्टडी न करने पर एक्सपर्ट्स ने कहा कि एयर पॉल्यूशन को लेकर कई स्टडी हो चुकी हैं, ये तय हो चुका है कि पर्टिकुलेट मैटर्स हेल्थ के लिए बेहद खतरनाक है तो फिर क्या चंडीगढ़ में रहने वाले लोगों के लंग्स अलग हैं क्या? इसलिए हेल्थ स्टडी के बजाए पॉल्यूशन कम करने की तरफ काम होना चाहिए।

आसपास के एरिया में भी पड़ता है असर...

एचएस ने कहा कि हवा बाउंडरी नहीं देखती और जहां पर एयर पॉल्यूशन हो रहा है सिर्फ वहीं नहीं बल्कि आसपास के एरिया में भी इसका असर पड़ता है। ट्राईसिटी में एयर पॉल्यूशन कंट्रोल करने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है। चंडीगढ़ में बढ़ रहे व्हीक्लस के आरण आसपास के एरिया के पॉल्यूशन पर भी असर हो रहा है।

प्लानिंग में ये:

कमर्शियल व्हीकल्स जैसे टैक्सी व बाकी व्हीकल्स को सिर्फ सीएनजी में किया जाएगा।

एयर मॉनिटरिंग सेंटर बढ़ाए जाएंगे, इसके लिए मोबाइल मॉनिटरिंग भी शुरू की जाएगी।

एयर पॉल्यूशन करने वाले या बिना सर्टिफिकेट चलने वाले व्हीकल्स पर चालान बढ़ाया जाएगा।

कंस्ट्रक्शन साइट्स पर डस्ट को कंट्रोल करने के लिए नॉर्म्स बनेगी।

पंचकूला और मोहाली में भी डीजल व्हीकल्स को रोकने को लेकर फैसला होगा।

मॉडर्न टेक्निक्स के जरिए हर साल का टारगेट फिक्स करना और उसी हिसाब से पॉल्यूशन को कम करना।

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