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ईएसआईसी ने 6 महीने से पास नहीं किया 1.20 लाख का बिल, नहीं लगी नकली टांग

मोहित शंकर|मोहाली mohit.shanker@dhrsl.com डेराबस्सी की एक फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी सीता राम मंडल की टांग जनवरी 2017...

Danik Bhaskar | May 17, 2018, 03:10 AM IST
मोहित शंकर|मोहाली mohit.shanker@dhrsl.com

डेराबस्सी की एक फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी सीता राम मंडल की टांग जनवरी 2017 में मशीन में आने से कट गई थी। करीब 6 महीने तक उसका इलाज चला। अब उसे आर्टिफिशियल टांग लगाई जानी है, लेकिन ईएसआईसी को एस्टीमेट भेजे जाने के बावजूद पिछले 6 महीने से उसका करीब 1.20 लाख का बिल पास नहीं किया गया। वह 6 महीने से कभी लालड़ू ईएसआईसी ऑफिस तो कभी चंडीगढ़ के सेक्टर-19 स्थित आईसीएसई ऑफिस के चक्कर लगा रहा है, लेकिन बिल पास नहीं हुआ। जब तक बिल पास नहीं होगा, उसे आर्टिफिशयल टांग नहीं लग सकेगी। तंग आकर सीता राम ने एडवोकेट एवं लेबर लॉ एडवाइजर जसबीर सिंह के जरिये ईएसआईसी के डायरेक्टर सुनील तनेजा को लीगल नोटिस भेजा है।

डेराबस्सी की जेटीएल इंफ्रा लिमिटेड फैक्ट्री में काम करने वाले सीता राम मंडल की टांग 19 जनवरी 2017 को मशीन में आने से कट गई थी। फैक्ट्री मालिक ने करीब 6 महीने तक उसका प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया। उसके बाद अब उसे आर्टिफिशियल टांग लगनी है, जिसके लिए ईएसआईसी को एस्टीमेट भेजा गया था।

दिसंबर 2017 से लालड़ू, मोहाली और चंडीगढ़ ईएसआईसी ऑफिस जा रहा है मरीज

सीता राम नकली टांग लगवाने के लिए दिसंबर 2017 से लालड़ू ईएसआईसी डिस्पेंसरी के चक्कर काट रहा था, लेकिन उससे टालमटोल की जा रही थी। इसके बाद लालड़ू डिस्पेंसरी की ओर से सीता राम को 24 अप्रैल 2018 को लेटर नंबर- एसआर/2018/47 सौंप कर मोहाली ईएसआईसी के ऑफिस भेजा गया, लेकिन मोहाली ऑफिस में भी उसकी फाइल नहीं ली गई। उसके बाद 1 मई 2018 काे लीगल नोटिस भेजने के बाद फाइल रीजनल डायरेक्टर के सेक्टर-19 चंडीगढ़ ऑफिस में जमा करवाई गई। हालांकि नियमों के अनुसार लालड़ू आॅफिस में ही फाइल जमा होनी चाहिए थी, लेकिन लालड़ू ऑफिस वालों ने उसी को फाइल थमा कर मोहाली भेजकर पल्ला झाड़ लिया। सीताराम ने बताया कि उसने फाइल जमा करवाने और बिल पास करवाने के लिए लालड़ू आॅफिस के मैनेजर से संपर्क किया था। उन्होंने उसे ईएसआईसी के हेड आॅफिस में डॉ. अमन सिंह, एसएमओ रीजनल ऑफिस ईएसआईसी सेक्टर-19 चंडीगढ़ के पास भेजा। वहां उसकी मुलाकात डॉ. अमन सिंह से 24 अप्रैल 2018 को हुई। उसके बाद वह डायरेक्टर सुनील तनेजा से भी मिला।

एलिजिबिलिटी न होने की कही जा रही थी बात, नियम कुछ और

लेबर लॉ एडवाइजर एडवोकेट जसबीर सिंह ने बताया कि मरीज की एलिजिबिलिटी न होने की बात कहकर उसे वापस भेजा जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार मरीज की जनवरी 2017 में टांग कटी थी, लेकिन उसके बाद मरीज की ओर से ईएसआईसी को हर महीने की सैलरी से कोई पैसा नहीं दिया गया, इसलिए उसकी एलिजिबिलिटी नहीं बनती।

ईएसआईसी एक्ट 1948 के सेक्शन-2(8) इम्प्लॉयमेंट इंजरी के तहत अगर काम करते समय किसी एक्सीडेंट में कर्मचारी को कोई डिसएबिलिटी होती है तो वह पूरी तरह इंश्योर्ड है। उसके इलाज का पूरा खर्च ईएसआईसी करेगा। इसमें सिर्फ यह देखा जाता है कि कर्मचारी का ईएसआईसी कार्ड बना हो।



-मरीज आया था, उसका काम हो जाएगा।


-मरीज 6 महीने से चक्कर लगा रहा है, इसकी जानकारी नहीं है। मरीज की एलिजिबिलिटी में कोई इश्यु था, इसलिए उसके डॉक्यूमेंट्स चेक किए जा रहे थे।


- मरीज को जो नकली टांग लगनी है, उसके प्रोसिजर के बारे में जानकारी नहीं है। विभाग के डॉक्टरों व अन्य अधिकारियों से बात कर प्रोसिजर क्लियर किया जाएगा।

सीधी बात