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सिफारिश: यूनिवर्सिटी के टीचर्स करेंगे सिंडिकेट मेंबर्स को चुनने के लिए वोट

पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म को लेकर बनी जस्टिस बीवी प्रसून की कमेटी ने जो रिपोर्ट सबमिट की है उसमें अधिकतम 46 फैलो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 03:10 AM IST

पीयू में गवर्नेंस रिफॉर्म को लेकर बनी जस्टिस बीवी प्रसून की कमेटी ने जो रिपोर्ट सबमिट की है उसमें अधिकतम 46 फैलो रखने का प्रस्ताव है। इसमें सभी डीन को आॅर्डिनरी फैलोज में जगह दी गई है। इसके अलावा पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन, पंजाब यूनिवर्सिटी स्टाफ एसोसिएशन और स्टूडेंट काउंसिल के प्रेसिडेंट को मेंबर बनाने का प्रस्ताव है। स्टूडेंट काउंसिल प्रेसिडेंट को मेंबर बनाने का प्रस्ताव पहले भी आया था पर कुछ टीचर्स के विरोध से काम ही नहीं हो पाया। ये भी सिफारिश की गई है कि यूनिवर्सिटी के टीचर्स सिंडिकेट मेंबर चुनने के लिए वोट करें। पीयू की तरह महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी में भी सीनेट का इलेक्शन होता है और वहां पर स्टूडेंट के दो रिप्रजेंटेटिव होते हैं। अरुण कुमार ग्रोवर के ज्वाइन करने के बाद यह बात लगातार चल रही थी कि स्टूडेंट प्रेसिडेंट को मेंबरशिप देनी चाहिए पर इस पर सहमति नहीं बन पाई। कुछ लोगों का कहना है कि स्टूडेंट प्रेसिडेंट का कार्यकाल सिर्फ 7 महीने का होता है इसलिए दिक्कत आएगी। हालांकि टीचर्स एसोसिएशन और स्टाफ एसोसिएशन के प्रेसिडेंट का कार्यकाल करीब 1 साल का ही होता है और हर साल उनका नाम गजट नोटिफिकेशन में बदलने के लिए भेजा जाता है।

रजिस्टर्ड ग्रेजुएट कॉन्स्टीट्यूएंसी से अब तक 15 मेंबर चुने जाते थे जिनको कम करके 6 कर दिया गया। कॉन्स्टीट्यूएंसी का नाम भी बदलकर पोस्ट ग्रेजुएट कर दिया गया है। इसमें कम से कम पोस्ट ग्रेजुएट व्यक्ति ही अप्लाई कर सकेगा और कम से कम 2 महिलाएं होंगी। प्रोफेसरों की संख्या 2 से बढ़ाकर 4 कर दी है जिसमें 2 महिलाएं होना जरूरी है। यही नियम एसोसिएट और असिस्टेंट प्रोफेसर पर भी लागू होता है जहां पर 50% महिलाएं होंगी।

सीनेटर लगातार दो टर्म से ज्यादा इलेक्ट नहीं हो सकेगा

सीनेटर की टर्म 4 साल की होती है। सीनेटर वही फैकल्टी अडॉप्ट कर सकेगा जिसमें उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया है और दूसरी फैकल्टी होगी जिसकी उनको पूरी जानकारी है। सेकेंडरी फैकल्टी में सीनेटर और डेली बिजनेस में तो पार्टिसिपेट कर सकेगा लेकिन उसको सिंडिकेट इलेक्शन में वोट करने का अधिकार नहीं होगा।

ऐसे होगा सिंडिकेट का गठन

वाइस चांसलर चेयरपर्सन रहेंगे। सेक्रेटरी हायर एजुकेशन पंजाब, सेक्रेटरी हायर एजुकेशन चंडीगढ़ और सभी फैकल्टीज से 2 फेलो या यूनिवर्सिटी प्रोफेसर मेंबर होंगे। सभी फैकल्टीज से एक-एक महिला का होना जरूरी है। सिंडिकेट मेंबर्स को डेलीगेट होने वाली एग्जिक्यूटिव फंक्शन को वाइस चांसलर या किसी सब समिति को सौंपने के अधिकार को भी खत्म कर दिया गया है।

छोटे-बड़े कई कामों से सीनेट को मिली फुर्सत

यूजीसी के नियम अनुसार अब से कॉलेजों की एफिलिएशन-डिसएफिलिएशन जैसे काम नहीं करने होंगे। हालांकि उनसे डिग्री, डिप्लोमा, ऑनर्स के मार्क्स, प्राइस, रिवाइज और लिटरेचर प्रमोशन जैसे काम भी ले लिए गए हैं। रिपोर्ट में लिखा कि यदि किसी मुद्दे पर सिंडिकेट बिना वोट के एकमत होकर डिसीजन करती है तो उस पर सीनेट डिस्कशन नहीं करेगी। सीनेट में डिस्कशन तभी हो सकेगा यदि रजिस्ट्रार को लिखित में 7 दिन पहले जानकारी दी जाएगी।

यदि 10 फीसदी मेंबर्स सीक्रेट बैलेट के जरिए वोट की मांग करते हैं तो चेयरपर्सन उसको कराएगा। ऑनरेरी डिग्री पर वोटिंग के प्रावधान को खत्म कर दिया गया है।

फाइनेंस से जुड़े सभी मसलों पर सिंडिकेट कोई भी डिसीजन लेने से पहले इसको बोर्ड ऑफ फाइनेंस की अप्रूवल के लिए भेजेगी।

केंद्र सरकार की ओर से हायर एजुकेशन मिनिस्ट्री ऑफ सोशल वेलफेयर की बजाय अब मिनिस्ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट और यूजीसी की ओर से दो नाॅमनी बोर्ड ऑफ फाइनेंस के मेंबर होंगे।

डिपार्टमेंट ऑफ ईवनिंग स्टडीज के हेड एकेडमी काउंसिल के मेंबर नहीं होंगे। पहले यह कॉलेज होता था जिसके प्रिंसिपल को रजिस्ट्रेशन बेस पर मेंबर चुना जाता था।

कॉलेजों के 10 प्रोफेसर अपने बीच के ऐसे ही मेंबर चुनेंगे जो एकेडमिक काउंसिल के मेंबर होंगे

मेंबरशिप के लिए प्रिंसिपलों की संख्या 15 से घटाकर 10 कर दी गई है

एकेडमिक काउंसिल में असिस्टेंट प्रोफेसर की नॉमिनेशन वाइस चांसलर अब रोटेशन के द्वारा करेंगे

एकेडमिक काउंसिल की मीटिंग के लिए कोरम को 9 मेंबर से बढ़ाकर 20 मेंबर्स कर दिया गया है

यदि एकेडमिक काउंसिल की ओर से किए गए किसी डिसीजन को सिंडिकेट दो तिहाई मत से पास नहीं करती तो वह सजेशन के साथ एकेडमी काउंसिल के पास वापस जाएगा। अगर फिर भी एकेडमी काउंसिल बिना किसी बदलाव के उसको पास कर देती है तो फाइनल डिसीजन सीनेट में होगा।

कुछ लोग पीयू का पंजाब का दावा घटाना चाहते हैं

इससे पहले भी यूनिवर्सिटी ने एक ड्राइव चलाई थी कि हरियाणा को फिर से अधिकार दे दिए जाएं। कुछ लोग पंजाब का यूनिवर्सिटी पर दावा कम करने की कोशिश में जुटे हैं और उक्त कमेटी की सिफारिशें भी इसी का नतीजा है। विधायक मीटिंग में आते हैं और उनको कई बार कहा गया है कि यदि आप राजनीतिक मेंबर्स चाहते हैं तो किसी अन्य दिन मीटिंग रखी जाए क्योंकि रविवार का दिन इलाके में आम लोगों से मिलने का दिन होता है। फिर भी हरसंभव कोशिश होती है की मीटिंग का हिस्सा बना जाए। यूनिवर्सिटी के इस प्रस्ताव को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता कि पंजाब विधानसभा के 2 मेंबर्स एक्स ऑफिशियो मेंबर्स नहीं होंगे।

-भारत भूषण आशू, कैबिनेट मिनिस्टर पंजाब व सीनेटर

रिपोर्ट में ये भी हैं प्रस्ताव

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