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एक्सईएन डीके अग्रवाल ने टेंडर की टर्म्स एंड कंडीशंस बदली, डिले हुआ हॉस्पिटल का काम

यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अफसरों की नाकामयाबी के चलते शहर में डेवलपमेंट के काम नहीं हो पा रहे। ताजा मामला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 03:10 AM IST

एक्सईएन डीके अग्रवाल ने टेंडर की टर्म्स एंड कंडीशंस बदली, डिले हुआ हॉस्पिटल का काम
यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अफसरों की नाकामयाबी के चलते शहर में डेवलपमेंट के काम नहीं हो पा रहे। ताजा मामला सेक्टर-48 में बन रहे 100 बेडेड हॉस्पिटल से जुड़ा है। हॉस्पिटल के काम को पूरा करने के लिए जो टेंडर हुआ उसकी टर्म्स एंड कंडीशंस को टेंडर होने के बाद बदल दिया गया। नतीजतन टेंडर को कैंसिल करना पड़ा और डिपार्टमेंट की इस नाकामयाबी का खामियाजा उस कंपनी ने उठाया जिस कंपनी को यह काम करना था। एक्सईएन डीके अग्रवाल द्वारा किसी अन्य कंपनी से टेंडर के काम करवाने की चाहत के कारण यह सब हुआ। अब इसकी शिकायत चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, फाइनेंस सेक्रेटरी अजॉय कुमार सिन्हा सहित सेंट्रल विजिलेंस कमीशन को हुई है।

ऐसे बदल डाली टर्म्स एंड कंडीशंस: एक्सईएन डीके अग्रवाल ने सेक्टर-48 में बन रहे 100 बेड हॉस्पिटल की फॉल सीलिंग, कैनोपी व कुछ अन्य कामों का 2 करोड़ 17 लाख रुपए का टेंडर 30 अप्रैल 2018 को लगाया। इसमें लिखा गया कि जीएसटी की रकम कॉन्ट्रैक्टर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में जमा करवाएगा और बाद में इंजीनियर इन चार्ज जीएसटी की इस रकम को कॉन्ट्रैक्टर को रीइम्बर्स करेगा। इन टर्म्स एंड कंडीशंस के हिसाब से टेंडर में कुल 9 कंपनियाें ने हिस्सा लिया। इसमें पुनीत शर्मा एंड एसोसिएट्स की कंपनी सबसे लोएस्ट रही। उन्होंने यह काम 1.44 करोड़ रुपए में करने का दावा किया। 25 मई 2018 को डीके अग्रवाल ने पुनीत शर्मा एंड एसोसिएट्स को लेटर ऑफ इंटेंड निकाली। इस लेटर में टर्म्स एंड कंडीशंस को बदलकर लिखा गया कि जीएसटी को रीइम्बर्स नहीं किया जाएगा और आइटम के जो रेट रहेंगे वह जीएसटी को मिलाकर ही रहेंगे। इस पर 30 मई को कंपनी ने अग्रवाल को लेटर लिखा कि टेंडर अपलोड होने के बाद उसकी टर्म्स एंड कंडीशंस को बदला नहीं जा सकता। हमने टेंडर के जो रेट दिए हैं वह जीएसटी के अलावा के दिए हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग के बाद ली बैंक गारंटी: कंपनी ने 8 जून को अग्रवाल के ऑफिस में बैंक गारंटी जमा करवानी चाही लेकिन अग्रवाल के स्टाफ ने लेने से मना कर दिया। जब पुनीत शर्मा ने वीडियो रिकॉर्डिंग की तब जाकर बैंक गारंटी ली गई। बावजूद इसके टेंडर अलॉट नहीं किया और 12 जून को अग्रवाल ने कंपनी को लेटर निकालते हुए उसकी अर्नेस्ट मनी का 50% यानी 2 लाख 20 हजार रुपए जब्त कर लिए।

डेविएशन की इजाजत नहीं इसलिए जो काम हो चुके उसका टेंडर लगा दिया: शिकायत में कहा गया है कि जो काम हो चुके हैं उसका टेंडर लगा दिया गया है। टेंडर में लिखा गया कि 40 एमएम की रब्ड स्टोन फ्लोरिंग यानी रेड स्टोन लगाया जाना है जिसकी कीमत 4.20 लाख रुपए है। जबकि यह पत्थर पहले ही गौतम बिल्डर्स ने लगा दिया है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि टेंडर में डेविएशन की इजाजत नहीं है। हॉस्पिटल की बिल्डिंग काे तैयार करने का टेंडर गौतम बिल्डर्स के पास है। ऐसे में उनसे कई ऐसे काम भी करवा दिए गए जो टेंडर में थे ही नहीं और ना ही इनकी पेमेंट की गई। सूत्रों के अनुसार उनको कहा गया था कि दूसरा टेंडर उनको ही अलॉट करेंगे और इसलिए ये काम पहले ही कर दो।

टेंडर विदड्रॉ कर गाैतम बिल्डर्स को देने का दबाव

शिकायत में पुनीत शर्मा ने आरोप लगाया कि एक्सईएन डीके अग्रवाल ने पुनीत को बुलाया और कहा कि वह टेंडर का काम करने से मना कर दे और गौतम बिल्डर्स कंपनी से मिले और जो नुकसान होगा उसकी भरपाई गौतम बिल्डर्स कर देगा। क्योंकि सेक्टर-48 की जिस बिल्डिंग में पुनीत काम करेगा उस बिल्डिंग का ज्यादातर काम गौतम बिल्डर्स कर रहे हैं। पुनीत ने कहा कि अग्रवाल के कहने पर वह गौतम से मिले लेकिन तीन दिन के बाद उन्हें मना कर दिया गया क्योंकि अगर पुनीत काम करने से मना भी कर दें तो भी गौतम बिल्डर्स को काम नहीं मिलेगा क्योंकि टेंडर में वह कंपनी तीसरे नंबर पर है।

गौरव भाटिया | चंडीगढ़

यूटी इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के अफसरों की नाकामयाबी के चलते शहर में डेवलपमेंट के काम नहीं हो पा रहे। ताजा मामला सेक्टर-48 में बन रहे 100 बेडेड हॉस्पिटल से जुड़ा है। हॉस्पिटल के काम को पूरा करने के लिए जो टेंडर हुआ उसकी टर्म्स एंड कंडीशंस को टेंडर होने के बाद बदल दिया गया। नतीजतन टेंडर को कैंसिल करना पड़ा और डिपार्टमेंट की इस नाकामयाबी का खामियाजा उस कंपनी ने उठाया जिस कंपनी को यह काम करना था। एक्सईएन डीके अग्रवाल द्वारा किसी अन्य कंपनी से टेंडर के काम करवाने की चाहत के कारण यह सब हुआ। अब इसकी शिकायत चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, फाइनेंस सेक्रेटरी अजॉय कुमार सिन्हा सहित सेंट्रल विजिलेंस कमीशन को हुई है।

ऐसे बदल डाली टर्म्स एंड कंडीशंस: एक्सईएन डीके अग्रवाल ने सेक्टर-48 में बन रहे 100 बेड हॉस्पिटल की फॉल सीलिंग, कैनोपी व कुछ अन्य कामों का 2 करोड़ 17 लाख रुपए का टेंडर 30 अप्रैल 2018 को लगाया। इसमें लिखा गया कि जीएसटी की रकम कॉन्ट्रैक्टर इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में जमा करवाएगा और बाद में इंजीनियर इन चार्ज जीएसटी की इस रकम को कॉन्ट्रैक्टर को रीइम्बर्स करेगा। इन टर्म्स एंड कंडीशंस के हिसाब से टेंडर में कुल 9 कंपनियाें ने हिस्सा लिया। इसमें पुनीत शर्मा एंड एसोसिएट्स की कंपनी सबसे लोएस्ट रही। उन्होंने यह काम 1.44 करोड़ रुपए में करने का दावा किया। 25 मई 2018 को डीके अग्रवाल ने पुनीत शर्मा एंड एसोसिएट्स को लेटर ऑफ इंटेंड निकाली। इस लेटर में टर्म्स एंड कंडीशंस को बदलकर लिखा गया कि जीएसटी को रीइम्बर्स नहीं किया जाएगा और आइटम के जो रेट रहेंगे वह जीएसटी को मिलाकर ही रहेंगे। इस पर 30 मई को कंपनी ने अग्रवाल को लेटर लिखा कि टेंडर अपलोड होने के बाद उसकी टर्म्स एंड कंडीशंस को बदला नहीं जा सकता। हमने टेंडर के जो रेट दिए हैं वह जीएसटी के अलावा के दिए हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग के बाद ली बैंक गारंटी: कंपनी ने 8 जून को अग्रवाल के ऑफिस में बैंक गारंटी जमा करवानी चाही लेकिन अग्रवाल के स्टाफ ने लेने से मना कर दिया। जब पुनीत शर्मा ने वीडियो रिकॉर्डिंग की तब जाकर बैंक गारंटी ली गई। बावजूद इसके टेंडर अलॉट नहीं किया और 12 जून को अग्रवाल ने कंपनी को लेटर निकालते हुए उसकी अर्नेस्ट मनी का 50% यानी 2 लाख 20 हजार रुपए जब्त कर लिए।

डेविएशन की इजाजत नहीं इसलिए जो काम हो चुके उसका टेंडर लगा दिया: शिकायत में कहा गया है कि जो काम हो चुके हैं उसका टेंडर लगा दिया गया है। टेंडर में लिखा गया कि 40 एमएम की रब्ड स्टोन फ्लोरिंग यानी रेड स्टोन लगाया जाना है जिसकी कीमत 4.20 लाख रुपए है। जबकि यह पत्थर पहले ही गौतम बिल्डर्स ने लगा दिया है। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि टेंडर में डेविएशन की इजाजत नहीं है। हॉस्पिटल की बिल्डिंग काे तैयार करने का टेंडर गौतम बिल्डर्स के पास है। ऐसे में उनसे कई ऐसे काम भी करवा दिए गए जो टेंडर में थे ही नहीं और ना ही इनकी पेमेंट की गई। सूत्रों के अनुसार उनको कहा गया था कि दूसरा टेंडर उनको ही अलॉट करेंगे और इसलिए ये काम पहले ही कर दो।

कुछ अनसुलझे सवाल

जीएसटी की टर्म्स एंड कंडीशंस की पहले अग्रवाल फिर सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर सीबी ओझा और आखिर में चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने अप्रूवल दी थी।

अगर जीएसटी रीइम्बर्स नहीं किया जाना चाहिए था तो फिर क्या टेंडर की टर्म्स एंड कंडीशंस को बिना देखे अप्रूव कर दिया गया।

इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से गलती हुई और टेंडर कैंसिल करना था तो फिर कॉन्ट्रैक्ट की रकम को क्यों जब्त किया गया।

अगर टेंडर में होने वाले काम पहले ही हो चुके थे तो फिर उन कामों का टेंडर लगाया ही क्यों गया।

टेंडर कैंसिल करने से हॉस्पिटल के पूरा होने में जो अड़चन आई है उस पर क्या किसी अफसर के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

सीधी बात

डीके अग्रवाल, एक्सईएन

क्या टेंडर होने के बाद किसी क्लॉज को बदला जा सकता है?

- जी नहीं, ऐसा नहीं हो सकता।

आपने जीएसटी रीइंबर्समेंट की क्लाॅज टेंडर में डाली तो फिर क्यों बदल दी?

- रीइंबर्समेंट की कोई क्लॉज नहीं डाली गई थी।

हमारे पास टेंडर के डॉक्यूमेंट्स हैं जिनमें क्लॉज लिखी गई है?

- कल आप ऑफिस में मिलना तो इस बारे में बात करेंगे।

टेंडर कैंसिल करके कॉन्ट्रैक्टर की रकम जब्त क्यों की गई?

- यह सबकुछ चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद ने किया है।

जो काम हो चुके हैं उसका टेंडर क्यों लगाया गया?

-ऐसा नहीं है, टेंडर के सभी काम होने बाकी हैं।

शिकायत में कहा गया है कि आप गौतम बिल्डर्स से यह काम करवाना चाहते थे इसलिए यह सब किया?

- यह आरोप पूरी तरह से गलत है।

मुझे एक्सईएन अग्रवाल ने बताया था कि जीएसटी की रीइंबर्समेंट नहीं की जा सकती फिर भी मैं इस मामले को चेक करवाऊंगा। - मुकेश आनंद, चीफ इंजीनियर

एक्सईएन ने नियमों से बाहर जाकर टर्म्स एंड कंडीशंस को बदला ताकि गौतम बिल्डर्स को यह काम मिल सके। गलती एक्सईएन ने की लेकिन अर्नेस्ट मनी मेरी जब्त कर ली गई। - पुनीत शर्मा, कॉन्ट्रैक्टर व शिकायतकर्ता

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